‘जानवरों से खिलवाड़ करने वाले लोग नहीं पसंद’

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दीवाली मेरे लिए एक ऐसा पर्व है जब मैं अपने को रिजुविनेट और रिलैक्स करती हूं। मुझे दीवाली त्यौहार पर जो सजावट होती है, वह बहुत अच्छी लगती है, लेकिन पटाखों के शोर धमाके बिल्कुल अच्छे नहीं लगते। मुझे इस बात की बेहद फिक्र होती है कि दिवाली पर पटाखों के धमाकों से हमारे पर्यावरण पर तो बुरा असर पड़ता ही है, बेचारे जीव जंतुओं पर भी कितना बुरा असर पड़ता है। मेरी पालतू बिल्लियां, दिवाली-पटाखों के धमाकों से डरकर घर में इधर उधर दुबकी फिरती है। ऐसे में मैं घर पर लाउड म्यूजिक लगा लेती हूं ताकि उन्हें बाहर धमाकों का शोर सुनाई ना दे। चलो घर के पालतू जानवरों को तो हम ऐसे धमाकों से प्रोटेक्ट कर सकते हैं लेकिन जो सड़क के लावारिस जीव जंतु है उन्हें कोई प्रोटेक्ट करने वाला नहीं होता। इसीलिए हमें ही उन्हें इन धमाकों के घबराहट से बचाना चाहिए। कई बार शरारती बच्चे, स्ट्रीट डॉग और कैट के पूंछ पर या गले में पटाखे बांध कर जला देते हैं, कितना इन-ह्यूमन एटीट्यूड है। दीवाली पर अच्छे अच्छे कपड़े पहनिए, पार्टी मनाइए, लजीज पकवान खाइए, मित्रों रिश्तेदारों से मिलकर खूब मस्ती कीजिए, परिवार के साथ शॉपिंग कीजिए, खुद अपने घर पर मिठाईयां बनाइए, घर डेकोरेट कीजिए, लेकिन पटाखों से तौबा ही कीजिए। आलिया से जब पूछा गया कि आप सिंगल हैं, तो वह कौन सी दिवाली होगी जब आप किसी को अपना बना कर उनके साथ दिवाली मनाएंगे?? इस पर खिलखिलाती हुई आलिया बोली, ठहरो ठहरो, फिलहाल ऐसी दिवाली दूर है।


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Mayapuri

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