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मूवी रिव्यू: हिलेरियस कॉमेडी ‘ड्रीम गर्ल’

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रेटिंग***

आयुष्मान खुराना एक ऐसे एक्टर हैं जो अलग तरह की  फिल्मों में विविधता पूर्ण भूमिकाएं करते लगातार नजर आ रहे हैं । इस बार भी उन्होंने नवोदित डायरेक्टर राज शांडिल्य की फिल्म ‘ ड्रीम गर्ल’ में बिलकुल अलग प्रकार की भूमिका अभिनीत की है ।

कहानी

मथुरा में, बाप जगजीत सिंह (अन्नू कपूर)और बेटा करम सिंह (आयुश्मान खुराना)रहते हैं । पिता की शवों के समान की दुकान है जबकि करम बेरोजगार है। दोनों अपने पर चढ़े लोन को लेकर परेशान है लिहाजा करम कैसी भी नौकरी करने के लिये तैयार है । जब उसे छोटू (राजेश शर्मा) के कॉल सेंटर मे औरत की आवाज में बात करने की नौकरी मिलती है तो वो उसके लिये ही करते हुए लोगों को एन्टरटेन करने लगता है । दरअसल करम बचपन से राम लीला और कृष्णलीला में सीता  और राधा बनता आ रहा है, उसमें एक टैलेंन्ट है कि उसे हर तरह की आवाजें निकालने में महारत हासिल है। उसका यही हुनर उसकी कमाई का साधन बनता है । कुछ ही दिनों में करम पूजा के तौर में कितने ही लोगों को अपनी आवाज का दीवाना बना लेता है जिसमें प्रमुख हैं हवलदार राजपाल(विजयराज),माही का भाई महेन्द्र (अभिशेक अनर्जी,टोटो (राज भंसाली,  रोमा(निधि बिष्ट) तथा खुद करम के पिता जगजीत सिंह ।  उसके इस राज में उसका दोस्त स्माइली( मनजोत सिंह) शामिल है। फिर उसकी प्रेमिका माही (नुसरत भरूचा)भी इस राज से अवगत हो जाती है । बाद में करम इस नौकरी  को छोड़ना चाहता लेकिन छोटू उसे ब्लैकमेल करते हुये नौकरी करते रहने पर मजबूर करता है। बाद में करम छोटू और अपने दीवानों से कैसे निपटता है,इसका लुत्फ फिल्म देखकर उठायें ।

अवलोकन

कॉमेडी सर्कस जैसे शो लिखने के बाद डायरेक्टर बने राज शांडिल्य इससे पहले कुछ फिल्में पहले भी लिख चुके हैं । इस फिल्म से उन्होंने बतौर डायरेक्टर डेब्यु किया और उन्होंने पहली ही ऐसी साफ सुथरी कॉमेडी फिल्म दी है, जिसमें शुरूआत से लेकर आखिर तक दर्शक हंसता रहता है । हालांकि पहले भाग में कुछ खास नहीं होता लेकिन दूसरे भाग में किरदार और कहानी दोनों डेवलप होते नजर आते हैं । इसके बाद फिल्म का तकरीबन हर किरदार हंसाता नजर आता है । कसी हुई पटकथा और चुटीले संवाद फिल्म की जान हैं, जिनमें वन लाइनर खूब हंसाते हैं । कुछ बातें खटकती भी हैं जैसे आयुष्मान और नुसरत के प्यार में डायरेक्टर ने धैर्य न दिखाते हुये दूसरे ही सीन में दोनों का प्यार दिखा दिया । इसके अलावा कई जगह कहानी में झोल दिखाई दिया,लेकिन क्लाईमेक्स पेट पकड़ कर हंसाने वाला है । फिल्म का संदेश कि सोशल मीडिया के दौर में हर आदमी भीड़ में भी अकेला है जो और प्रभावशाली बन सकता था ।

अभिनय

आयुष्मान इस बार अपनी भूमिका में हिलेरियस परर्फामर साबित हुये हैं, उन्हांने अपनी आवाज और बाडीलैंग्वेज से दर्शकों को खूब हंसाया, उनके दोस्त की भूमिका में मनजोत सिंह का भी पूरा सहयोग रहा । यही नहीं अन्नु कपूर का बुढ़ापे का प्यार और विजयराज की कॉमिक टाइम लाजवाब रहे । इनके अलावा अभिषेक बनर्जी, निधि बिष्ट तथा दादी बनी अदाकारा भी याद रह जाते हैं । नुसरत भरूचा के हिस्से में कम फुटेज आई,लेकिन जितना भी मिला उसका उसने भरपूर फायदा उठाया ।

क्यों देखें

हिलेरियस कॉमेडी देखनी हैं तो फिल्म मिस न करें ।

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