यूनियन मिनिस्टर अनुराग ठाकुर की तरफ से देशभक्तों के लिए एक अनोखा तोहफा

1 min


अगर मैं आपसे कहूँ कि देशभक्ति पर बनी आपने कितनी फिल्में देखी या सुनी हैं? तो शायद आप पाँच, दस या बड़ी हद पंद्रह फिल्मों के नाम बता पायेंगे। पर सच तो ये है कि हमारे भारत में सैकड़ों ऐसी फिल्में बनी हैं जिनमें आज़ादी से जुडी एक एक बात, एक एक हीरो का ज़िक्र है और सिर्फ हिन्दी में ही नहीं, देश की हर भाषा में ऐसी राष्ट्रवादी फिल्में बनी हैं पर आज की पीढ़ी तक यह फिल्में पहुँच ही नहीं पाई हैं।

लेकिन अब माननीय ब्रॉडकास्टिंग एंड इनफार्मेशन मिनिस्टर अनुराग ठाकुर ने 27 अगस्त के दिन चित्रान्जली (एट) सेवेंटी फाइव, यानी आज़ादी के पिछत्तर्वें वर्ष ध्यान में रखते हुए एक ऐसी डिजिटल एक्सीबिशन लॉन्च की है जहाँ आप 1921 से लेकर 2019 तक के सिनेमा सफ़र में, विभिन्न भाषाओँ की पिचहत्तर फिल्मों के पोस्टर देख सकते हैं और उनके बारे में जान सकते हैं। श्री अनुराग ठाकुर ने इस एक्सीबिशन पर के लॉन्च पर ख़ुशी जताते हुए कहा कि “हमने यहाँ 75 आइकोनिक फिल्मों के पोस्टर्स और उनके सन्दर्भ इकट्ठे करने की कोशिश की है। यह सारे पोस्टर्स डाउनलोड हो सकें ऐसी व्यवस्था की गयी है। आप इन्हें शेयर कर सकते हैं। भविष्य में सिर्फ पोस्टर ही नहीं हम फिल्में दिखाने का इंतज़ाम भी करेंगे, ऐसी आशा है”

इसी मौके पर श्री अनुराग ठाकुर के साथ टूरिज्म, कल्चर और उत्तर पूर्वी क्षेत्र के डेवेलोप्मेंट मिनिस्टर श्री जी किशन रेड्डी ने आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए ‘संविधान का निर्माण’ के नाम से एक और एक्सीबिशन का विमोचन किया जिसमें आज की पीढ़ी को संविधान से जुड़ी छोटी से छोटी जानकारी, रोचक अंदाज़ में दी जा रही है।

श्री अनुराग ठाकुर ने कहा “इस आज़ादी के अमृत महोत्सव पर मुझे ये एक्स्हीबिशन लॉन्च करते बहुत ख़ुशी हो रही है। इस तरह हमारे देश के नागरिक अपने संविधान के बारे में बेहतर रूप से जान पायेंगे। हमारा ये कदम इस देश के युवा को प्रोत्साहित करेगा और जन-भागीदारी को भी दर्शायेगा।

श्री अनुराग ठाकुर और श्री किशन रेड्डी के साथ डॉक्टर एल मुरुगन, श्री अर्जुन राम मेघवाल और श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने भी इन एक्स्हीबिशन का विमोचन किया।

सबसे पहले फिल्मों के बारे में आपको बताते हैं।

आप इस अपने मोबाइल का डेस्कटॉप पर वेब साईट www.nfai.gov.in/virtual-poster-exhibition-gallery.php सर्च करेंगे तो राष्ट्रिय फिल्म संघ्रालय का पेज खुल जायेगा। इस फोटो गैलरी में आपको तीन श्रेणियों में देशभक्ति से जुड़ी फिल्मों के पोस्टर्स मिलेंगे।

पहली श्रेणी है – सिनेमा की नज़र से स्वतंत्रता संघर्ष

दूसरी श्रेणी है – समाज सुधारकों पर बना सिनेमा

और तीसरी श्रेणी है – हमारे वीर सिपाहियों को नमन

इनमें सबसे पहली श्रेणी की बात करें तो आप यहाँ नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर रमणीक देसाई की फिल्म ‘एक कदम’ का पोस्टर भी देखेंगे। यह फिल्म 1947 में हिन्दी भाषा में रिलीज़ की गयी थी। वहीँ 1948 की फिल्म वन्देमातरम् मराठी में बनी थी।

यहाँ 1961 की कन्नड़ फिल्म किट्टूर चिनम्मा का ज़िक्र भी ज़रूरी है क्योंकि यही वो फिल्म थी जिसमें रानी चिनम्मा को अंग्रेज़ों से लोहा लेते और शहीद होते दिखाया गया था। इस फिल्म को नेशनल अवार्ड भी मिला था।

इसी तरह आप महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आज़ाद पर बनी जगदीश गौतम की फिल्म का पोस्टर भी यहाँ देख सकते हैं।

साथ ही महानायक अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म ‘सात हिन्दुस्तानी’ का पोस्टर भी शामिल किया गया है।

1967 में आई मलयालम फिल्म कुंजली मरक्कर का पोस्टर भी आप इस एक्स्हीबिशन में देख सकते हैं। यह नेशनल अवार्ड विनिंग फिल्म भारतीय नवल ऑफिसर्स पर बनी पहली फिल्म थी जिन्होंने यूरोप की सेनाओं को कालिकाट में रोका था और उनके साथ युद्ध किया था।

भारत की क्षेत्रीय भाषाओँ के साथ साथ अंग्रेज़ी फिल्म ‘गाँधी’ का पोस्टर भी इसमें शामिल है। हॉलीवुड के ग्रेट एक्टर बेन किंग्सले इस फिल्म में महात्मा गाँधी का रोल कर रहे हैं। इस फिल्म को आठ ऑस्कर अवार्ड्स मिले थे।

बलराज साहनी की बहुचर्चित फिल्म आनंद-मठ का पोस्टर भी  यहाँ मौजूद है.

शहीद उधम सिंह को यूँ तो इतिहास भले ही भूल गया हो लेकिन सिनेमा कभी नहीं भूला। 1999 में रिलीज़ हुई राज बब्बर की इसी नाम से फिल्म ज़रूर दर्शनीय है। इसका पोस्टर भी इस गैलेरी में शामिल किया गया है।

भारतीय सिनेमा में जब भी देशभक्ति से जुड़ी फिल्मों की बात जायेगी तब भारत कुमार के नाम से मशहूर मनोज कुमार का नाम ज़रूर शामिल होगा. यहाँ भी मनोज कुमार जी की दो फिल्में, पूरब और पश्चिम और उपकार फोटो गैलरी में शामिल की गयी हैं.

ये तो बात हुई आज़ादी के आंदोलनों से जुड़ी फिल्मों के बाद समाज सुधारकों पर बनी कुछ फिल्मों का ज़िक्र भी होना चाहिए।

भाषाओँ में मूक भाषा भी तो एक भाषा ही है। 1921 में रिलीज़ हुई वी शांताराम की साइलेंट फिल्म उदयकाल का पोस्टर भी इस गैलरी में शामिल है। यह फिल्म शिवाजी महाराज से शुरु होकर अन्ग्रेज़ो के खिलाफ पहले आन्दोलन तक का सफ़र दिखाती है। इस फिल्म के एक सीन को लेकर ब्रिटिश सेंसर बोर्ड ने फिल्म को रिलीज़ करने से आपत्ति जताई थी। इस फिल्म का पोस्टर भी आप यहाँ देख सकते हैं।

विवादित फिल्मों की बात चली है तो भला कमल हसन की मोस्ट कंट्रोवर्शियल फिल्म ‘हे राम’ का ज़िक्र क्यों न हो। कमल हसन, शाहरुख़ खान और रानी मुखर्जी जैसे सितारों से सजी यह फिल्म भी इस गैलरी में मौजूद है।

साथ ही देश की सेनाओं पर बनी फिल्मों के बिना भला राष्ट्रवादी फिल्मों की सूची  कैसे पूरी हो सकती है।

इस गैलरी में 1962 में हुई भारत-चीन की जंग पर बनी फिल्म हकीक़त से लेकर कारगिल वॉर पर बेस्ड एलओसी कारगिल के पोस्टर्स भी इसमें शामिल हैं।

आप न सिर्फ इन पोस्टर्स को देख सकते हैं बल्कि इनपर क्लिक कर फिल्म से जुड़ी फर्स्ट हैण्ड नॉलेज भी पा सकते हैं। फिर देखिएगा, ऐसा ज़रूर होगा कि किसी पोस्टर को देखते-देखते आपका मन उस फिल्म को देखने का भी करने लगेगा।

इसी तरह वेबसाइट http://constitution-of-india।in पर आप जायेंगे तो वहाँ एक लाल रंग का पर्दा नज़र आएगा। टच करके उस पर्दे की डोर खींचने पर आपके सामने आज़ादी का अमृत महोत्सव लिखा हुआ आयेगा और देश की तेरह भाषाओँ में पढ़ने का विकल्प भी नज़र आयेगा। आप अपनी पसंदीदा भाषा चुनकर आगे बढ़ेंगे तो सबसे पहले संविधान के रचियता डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर की तस्वीर नज़र आयेगी। इसके बाद हमारी संसद आप देख सकेंगे।

 

फिर यह डिजिटल किताब कुछ इस तरह खुलेगी कि आपको असली किताब के पन्ने पलटने की आवाज़ भी आयेगी और देश के पहले प्रधानमंत्री राजेंद्र प्रसाद जी का भाषण भी सुनने को मिलेगा। यह भाषण 14 अगस्त 1947 के दिन रिकॉर्ड किया गया था।

अब जैसे जैसे आप आगे पन्ना पलटते जायेंगे, आपको संविधान से जुड़ी तमाम जानकारियां मिलती जायेंगी जिनमें संविधान के निर्माण के लिए पहली बैठक कब हुई थी, इसमें कौन कौन शामिल था। गाँधी जी के क्या विचार थे।

इतना ही नहीं, 1947 में भारत के कारखानों में बनते तिरंगे की तस्वीरें भी आप देख सकेंगे। साथ ही 15 अगस्त 1947 के अख़बारों की मुख्य लाइन्स भी आप पढ़ सकेंगे।

इसके बाद संविधान से जुड़ी और भी कई छोटी बड़ी जानकारियों के बाद, आपको आखिर में एक प्रश्नोत्तरी यानी भी मिलेगी। यहाँ संविधान से जुड़े दस सवाल होंगे और हर सवाल के चार चार विकल्प भी मौजूद होंगे। आपको एक विकल्प चुनकर उनका उत्तर देना होगा।

आज डिजिटल होती दुनिया में, बिना किसी शक़ के हम कह सकते हैं कि भारत सरकार द्वारा लॉन्च की गयी ये ई-एक्स्हीबिशन हमारी पीढ़ी के लिए एक अनमोल तोहफे से कम नहीं है।

सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’