मेरे हीरो धर्मेन्द्र जी – सायरा बानो

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saira-banu

 

मायापुरी अंक 18.1975

मै जानती हूं मेरी अनेक फिल्मों के हीरो धर्मेन्द्र के साथ मेरे मधुर संबंधों को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं और शायद आगे भी होती रहेंगी। पेपर के कालमों में भी हम दोनों के संबंधो को लेकर बेतुकी बातों के पिरामिड बनाने की कोशिश की गयी है।

सच बात तो यह है कि जब खुश मिजाज हीरो-हीरोइन एक साथ कई फिल्मों में दिल खोलकर कार्य करते हैं प्राइवेट तौर पर भी निकट आ जाते हैं। मैं यह कह सकती हूं कि धर्मेन्द्र के साथ मेरे पर्सनल रिलेशन्स भी हैं। पर ये पर्सनल रिलेशन्स इमोशनल हैं उस तरह के गंदे नही जैसा कि इन बातों की जानकारी न रखने वाले लोगों को भ्रम हो जाता है। आपने हम दोनो की कई फिल्में देखी होंगी जिनमें हम रोमांस करते हुए दिखाये गये हैं। हाल ही मैं ‘इंटरनेशनल कुक’‘रेशम की डोरी’‘पॉकेटमार’फिल्में प्रदर्शित हो चुकी है। इन फिल्मों में खासकर ‘इंटरनेशनल क्रुक’ के कुछ दृश्य काफी चर्चा के विषय बने। लोगों में इन दृश्यों के फोटूओं को लेकर गंदे विचार जाहिर किये। यहां तक कि कुछ लोगों ने जानबूझ कर इस मामले में मेरे खाविन्द यूसूफ मियां को भी घसीटने की कोशिश की। पर मैं बता देना चाहती हूं कि फिल्मों के इंटीमेट सीन फिल्मों तक ही रह जाते हैं। ये सीन फिल्मी हैं जिन्हें एक्ट करते हुए इतने मैकेनिकल हो जाते हैं कि हम रूमानी भाव में बह नही सकते और न बहक सकते हैं। धर्मेन्द्र वाकई खूबसूरत हीरो हैं। उनमें गजब का बांकापन और आकर्षण है। पर वे जितने खूबसूरत हैं उतने ही लाजवाब इंसान भी हैं। वर्ना अब तक उनकी सुखी गृहस्थी में आग लग जाती। धर्मेन्द्र की नजरों में क्या हूं यह तो वे ही बता सकते हैं पर मेरी नजर में धर्मेन्द्र खुश मिजाज और अपनी सीमाओं में रहने वाले इंसान हैं।

फिल्मों में काम करते हुए हम दोनों काफी निकट आये हैं इसका एक कारण यह भी है कि मेरे खाविंद साहब भी धर्मेन्द्र को प्यार करते हैं। धर्मेन्द्र मेरे साहब का आदर करते हैं, इस तरह दोनों के घरेलू संबंध हैं जो समय के साथ और भी गहरे होते चले गये है। ंइसलिए जब शॉट होने में देर होती है तो अक्सर मैं उनके निकट बैठ कर गपशप करती हूं हम दोनों अक्सर मेकअप रूम में (कभी वे मेरे मेकअप रूम में तो कभी मै उनके मेकअप रूम में) बैठ प्राइवेट बातें भी करते है। पर यें बातें गंदी नही होती। वे बातें जिंदगी से जुड़ी खास बातें होती हैं। कभी-कभी दोनों शूटिंग करते करते थक जाते हैं तो टहलने लगते हैं। आउटडोर शूटिंग के वक्त भी एकांत में टहलते हुए हंसी दिल्लगी करते रहते हैं। इन हंसी की बातों में हल्की फुल्की बातें भी होती हैं। इस तरह की इन्टीमेट बातें वही हो सकती है जहां संबंध गहरे होते हैं। पर हमारे गहरे संबंध में दोस्ती का भाव, स्नेह का भाव ज्यादा है इसलिए मै नही समझती कि यह कोई पाप है। मैं मॉडर्न लड़की हूं और पसर्नल रिलेशन के बारे मैं काफी लिबरल हूं। मुझे जो कुछ कहना था कह दिया।


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Mayapuri

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