एक स्वप्न्न सुन्दरी के साथ मेरा सुहाना सफर, लेकिन…(तुमको हम जन्मदिन मुबारक किया बोले, आपका होना ही एक मुबारक जश्न है)

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हेमा मालिनी

मैं उन दिनो सत्रह साल का था और अपने ही सपनो को सजाने की जदो जहद में मगन था कि एक अजीब सी लहर दौड़ पड़ी सारे देश मे। हर जगह लोग एक ड्रीम गर्ल कि बाते कर रहे थे। इस लहर ने मुझे भी जकड़ दिया था और मैं इस ड्रीम गर्ल को देखना चाहता था। मुझे बहुत दूर और बहुत देर तक इंतजार करने की जरूरत नही पड़ी। मेरे पड़ोस में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ का एक ड्राइवर रहता था, जो हर शुक्रवार को ‘स्क्रीन’ जो हिंदुस्तान का सबसे मशहूर और नामचीन फिल्म साप्ताहिक होता था लेकर आता था सिर्फ मेरे लिये .उस शुक्रवार को ‘स्क्रीन’ के तीसरे पन्ने पर पूरी तस्वीर थी ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी कि और धीरे धीरे ‘ड्रीम गर्ल’ एक ऐसी हकीकत बन गई थी जिनके बिना ऐसा लगता था की जिंदगी कुछ भी नही थी।

ड्रीम गर्ल कि लहर में मैं बहता चला गया और जब ‘मैंने जॉनी मेरा नाम’ देखी देवानंद के साथ वो लहर मेरा नशा बन गई और ऐसे वक्त में जब मेरे पास खाने के पैसे नहीं होते थे, मैं ‘ड्रीम गर्ल’ कि हर फिल्म देखता था जैसे इन फिल्मों को देखना मेरी जिंदगी कि जरूरत बन गई थी ।

मैने देव साहब के साथ ‘ड्रीम गर्ल’ के साथ वो सारी फिल्में देखी जैसे ‘अमीर गरीब’ तेरे मेरे सपने और ‘जानेमन’। वक्त दौड़ता रहा पर ऐसा भी वक्त आया जब जिन जिन सितारों का मैं सिर्फ ख्याल करता था और सपने देखा करता था वो सारे मेरे जान पहचान के हो गये और कुछ तो मेरे जिगरी दोस्त भी बन गये और उन मे अगर किसी के साथ मेरी कट्टर दोस्ती बनी तो वो देव साहब थे। और उन्होंने कभी बातों बातों में मुझे बताया कि हेमा मालिनी कितनी अच्छी कलाकार और उससे ज्यादा कितनी अच्छी इंसान थी। उन्होंने मुझे ये भी बताया कि कैसे हेमा मंदिर जाती थी पूजा करने जब उनकी यानी देव साहब कि कोई भी फिल्म रिलीज होती थी।

हेमा मालिनी

हेमा मालिनी एक बहुत बड़ी सुपर स्टार बन गई थी और उनको इतने पैसे मिलते थे जितने बडे एक्टर को मिलते थे। मैं नटराज स्टूडियो में खड़ा था जहाँ पर मेरे साथ बड़े बड़े फिल्ममेकर जैसे रामानंद सागर, एफ. सी. मेहरा, प्रमोद चक्रवर्ती और शक्ति सामंत थे। उतने मैं एक बड़ी सी गाड़ी आकर रुक गई और एक महिला उसमंे से उतरी और उन चारों में एक हलचल हो गई थी। उस महिला ने उनके साथ कुछ बातें कि और गाड़ी में बैठकर चली गई। मैं जैसे एक भूल भूलैया में खो गया और वापस आते ही मैंने उन चारों से पूछा ‘ये कौन थी?’ सब मुझे देखते रहे जैसे मैंने कोई बड़ा गुनाह किया था और शक्ति सामंत ने एक अजीब सी मुस्कुराहट दी और कहा ‘अली, तुम इतना सब जानते हो और एक अठारह लाख कि हीरोइन तुम्हारे सामने खड़ी होती है और तुम उसको पहचानते भी नही? अरे इडियट, हेमा मालिनी थी।’

वक्त और तेजी से दौड़ता रहा और मैंने वो धरम-हेमा का वो जमाना भी देखा जब उन्होंने 28 फिल्मे की थी एक साथ और कैसे उनमें प्यार हो गया था और आखिर कैसे धर्मेन्द्र जो एक शादी – शुदा आदमी था उसने हेमा के साथ दूसरी शादी की थी। लोगो ने कहा था कि हेमा का कैरियर खत्म हो गया ,लेकिन हेमा तो ‘ड्रीम गर्ल’ से भी बडी स्टार बन गई और उनका रुतबा तब भी जबरदस्त था जब वो दो बेटियों कि माँ बन गई थी ।

मैं एक बार उनसे बात कर रहा था और उन्होंने इच्छा जाहिर कि थी महेश भट्ट के साथ फिल्म करने की। उन्होंने मुझसे कहा था कि मैं मेरे कॉलम में ये महेश वाली बात जरूर लिखे और मैंने वही किया। लेकिन जब ये बात छप गई तो उन्होंने मेरे संपादक को कंप्लेन किया कि उन्होंने महेश वाली बात बोली ही नहीं थी। बात वहाँ नहीं रुकी और वो बार बार फोन करती रही और उनका ‘डिमांड’ ये था कि मैं मेरे ही कॉलम में लिखू कि मैंने गलती कि है और मैं उसके लिये ‘ओपन अपोलोजी मांगू। मैंने ऐसा कुछ भी करने से इंकार कर दिया था और मेरी संपादिका जो मुझसे ज्यादा मेरे जिद को समझती थी उन्होंने मुझे मेरा फैसला पर ज्यादा भरोसा किया और वो कहानी खत्म हुई। लेकिन, कुछ ही महीनों बाद मेरी बात सच साबित हुई जब हेमा ने महेश भट्ट के साथ एक नई फिल्म, ‘जामिन’ साइन की जो बड़े धूमधाम से लॉन्च हुई थी लेकिन कभी बन नही पाई।

हेमा मालिनी

वक्त कभी कभी एक अजीब सा मरहम साबित होता है पुराने जख्मों पर। मुझे मालूम था कि एक वक्त जितेन्द्र और हेमा कि शादी तक कि बात हुई थी और धर्मेन्द्र ने अपनी मोहब्बत से बाजी जीत ली थी और जितेन्द्र और हेमा के बीच एक लंबी दरार पड़ गई थी जयपुर में एक बड़ा डॉक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टिवल होना था और प्रबंधको ने मुझसे रिक्वेस्ट की और मुझसे जितेन्द्र और हेमा जो अब सबके लिये हेमाजी हो गई थी मुख्य अतिथि के रूप में लाने की। मुझे बड़ा अचरज हुआ जब दोनो आने के लिए तैयार हो गये कुछ ही घंटों में। और जयपुर में उन दोनों ने एक पल के लिये भी ये नही दिखाया कि उनके बीच क्या हुआ था और उसके बाद इतने साल कैसे बीत गये थे ।

वक्त इतने सालों के बाद भी ‘ड्रीम गर्ल’ पर कोई बुरा असर नही दिखा सका। एक मीटिंग में बहुत सारे फिल्ममेकर के साथ यश चोपड़ा भी बैठे हुये थे। इतने में ‘ड्रीम गर्ल’ एक सुंदर सपने कि तरह झूमकर आ गई और सारे लोग उठकर खड़े हो गये और यश चोपड़ा ने कहा, ‘हेमा जी अगर आप इतनी खूबसूरत लगती रही तो हम जैसे आशिक आप पर मर मरकर मर जाएंगे। और बैठने से पहले यशजी ने हेमाजी को कहा ,‘हेमाजी, अगर आप हा कहे, तो मैं अभी आपको साईन करता हूँ मेरी अगली फिल्म के लिये और जो मुस्कुराहट हेमाजी ने उस वक्त दी आज भी मेरे आंखों में जिंदा है ।

आज हेमाजी बहुत बड़ी नेता है, मैं उनकी ना राजनीति मे मानता हूँ न उनके पार्टी में, लेकिन मेरे लिये बस इतना काफी है कि वो हमारे जमाने की स्वप्न्न सुन्दरी है जो सपने आने वाले कई युगों तक अपना जादू चलाती रहेगी


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Mayapuri

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