‘‘नितिन केनी के नेतृत्व में ‘एस्सेल विजन’ फिल्म के कंटेंट पर यकीन करता है’’- संजय गुप्ता

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‘‘कांटे’’,‘‘मुसाफिर’’, ‘‘जिंदा’’, ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’, और ‘शूट आउट एट वडाला’’जैसी स्टाइलिष व एक्शन प्रधान बड़े सितारों से युक्त फिल्मों का निर्माण कर चुके फिल्मकार संजय गुप्ता इन दिनों काफी चर्चा में हैं. उनकी इस चर्चा की वजह यह है कि 2015 में जहाॅं वह ऐष्वर्या राय बच्चन की मुख्य भूमिका वाली फिल्म‘‘जज्बा’’ की षूटिंग शुरू करने जा रहे हैं, वहीं उन्होने ‘जीटीवी’ की सिस्टर कंपनी ‘‘एस्सेल विजन’’के साथ ‘जज्बा’के अलावा दो अन्य फिल्मों का निर्माण करने के लिए हाथ मिलाया है. ज्ञातब्य है कि फिल्म ‘जज्बा’ से ही ऐष्वर्या राय बच्चन की अभिनय जगत में वापसी होने जा रही है.

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आप अतीत में भी दूसरे प्रोडक्षन हाउस के साथ मिलकर फिल्मों का निर्माण करते रहे हैं. इस बार आपने अपनी नयी फिल्म ‘‘जज्बा’’के लिए एस्सेल विजन को क्यों चुना?

एस्सेल विजन के साथ हाथ मिलाने की सबसे बड़ी वजह नितिन केनी हैं. क्योंकि नितिन केनी एक क्रियेटिव फिल्म निर्माता हैं. नितिन केनी ऐसे निर्माताओं में से हैं, जो सामने वाले निर्माता से यह नहीं पूछते हैं कि उनकी फिल्म का बजट क्या हैं और फिल्म कितना कमाएगी? बल्कि वह सबसे पहले कहानी व पटकथा के बारे में जानकारी माॅंगते हैं. उसके बाद वह कलाकारों के बारे में पूछते हैं. फिर वह यह जानने की कोषिष करते हैं कि हम उसे किस तरह से बनाने वाले हैं. फिल्म निर्माण का हमारा विजन, हमारी अप्रोच व हमारा स्केल को लेकर सवाल करते हैं. एक फिल्म को लेकर नितिन केनी की यह जो सेाच है, अप्रोच है,उसने मुझे बहुत उत्साहित किया. यानी कि नितिन केनी के नेतृत्व में ‘एस्सेल विजन’फिल्म केकंटेंट पर यकीन करता है. उसे महत्व देता है. इसके अलावा ‘एस्सेल विजन’ हमारे देश के बहुत बड़े सेटेलाइट चैनल ‘‘जी टीवी’’ का हिस्सा है. आज की तारीख में जीटीवी सबसे बड़ा मीडिया ग्रुप है. तो मुझे एक बड़ा प्लेटफार्म मिल रहा है. वैसे भी हम हर फिल्म किसी न किसी स्टूडियो के साथ ही बनाते आए हैं. हमने अतीत में ‘बालाजी टेलीफिल्म्स’और ‘इरोज इंटरनेषनल’के साथ फिल्में बनायी हैं. अब ‘एस्सेल विजन’हमारे लिए ‘वन स्टाॅप शाप’है. इस कंपनी की शुरूआत ढाई सो करोड़ रूपए से हुई है.

इससे पहले आपने ‘बालाजी टेली फिल्मस’या ‘इरोज इंटरनेशनल’ के साथ मिलकर जो फिल्में बनायी थीं. वहां कंटेंट को लेकर कोई समस्या आयी थी?

जी नहीं! समस्या कभी नहीं होती. पर हर इंसान काम करने के लिए ज्यादा से ज्यादा कम्फर्ट जोन तलाषता है. नितिन केनी ने लगभग दस साल पहले फिल्म ‘‘गदरःएक प्रेम कथा’’ के निर्माण के साथ चेक पेमेंट सहित कई चीजों की शुरूआत की थी.

आपको नहीं लगता कि आज की सभी काॅरपोरेट कंपनियों ने उसी को अपना रखा हैं?

देखिए, नितिन केनी ने ही सबसे पहले 2000 में सोचा था कि पूरी फिल्म का निर्माण ‘व्हाइट मनी’ और पूरी पारदर्ताशिता के साथ किया जा सकता है. यह उनका विजन था. उन्होंने अपने इसी विजन पर काम करते हुए फिल्म‘‘गदरः एक प्रेम कथा’’ का निर्माण किया था. इस फिल्म ने अपार सफलता बटोरी थी. नितिन केनी ने जो यह शुरूआत की, उसे तमाम लोगों ने अपने अपने हिसाब से अपनाया है. 2000 में भी नितिन केनी ‘जीटीवी’का ही हिस्सा थे और अब वह ‘एस्सेल विजन’के कर्ताधर्ता हैं, जो कि जीटीवी का ही अंग है. तो यहां भी वही सारी चीजें अपनायी जा रही हैं. मुझे यह मानने में कोई संकोच नही कि तमाम काॅरपोरेट कंपनियों ने उनके बनाए फार्मूले पर बाद में काम किया.

आपने फिल्म ‘‘जज्बा’’ का निर्माण करने की बात ऐष्वर्या राय की वापसी को ध्यान में रखते हुए सोचा..?

ऐसा कुछ नहीं था. फिल्म की पटकथा तैयार होने के बाद मुझे महसूस हुआ कि फिल्म के चरित्र में ऐश्वर्या राय बच्चन ही फिट बैठती हैं. क्योंकि इस चरित्र के लिए लार्जर देन लाइफ व्यक्तित्व की जरूरत है. आम हीरोइन इस तरह के चरित्र के साथ कभी भी न्याय नहीं कर सकती. उन सारी चीजों पर ध्यान देने पर ऐष्वर्या राय बच्चन ही सही लगी.मैं उनसे जाकर मिला. उन्होंने पहले कहानी सुनी. फिर पूरी स्क्रिप्ट सुनी.यह हमारी खुष किस्मती रही कि उन्हें हमारी फिल्म की कहानी व पटकथा पसंद आ गयी. और ऐष्वर्या राय बच्चन ने हमारी फिल्म ‘‘जज्बा’’ के साथ ही अभिनय में अपनी वापसी का निर्णय लिया.

फिल्म‘‘जज्बा’’को लेकर क्या कहेंगे?

-यह एक स्मार्ट एक्षन थ्रिलर फिल्म हैं,जिसका स्क्रीनप्ले बहुत टाइट है. इस फिल्म में सारे कलाकार जो किरदार निभा रहे है,उस तरह के किरदार उन्होंने कभी नहीं निभाए हैं.

‘‘एस्सेल विजन’’में किस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं?

जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि ‘एस्सेल विजन’के नितिन केनी सबसे पहले फिल्म की कहानी पर बात करते हैं. वह लाभ या नुकसान की बात बाद में करते हैं.उनके साथ आकाष चावला व गिरीष जौहरी जैसे बहुत बेहतरीन लोग जुड़े हुए हैं. वह फिल्म के प्रमोषन, वितरण आदि में चैंपियन हैं. ऐसे में एक फिल्म निर्माता के लिए काम करना बहुत कम्फर्ट जोन हो जाता है. हम एस्सेल विजन के साथ अच्छी कंटेंट वाली फिल्म बनाने का इरादा रखते हैं.

‘‘एस्सेल विजन’’के साथ जीटीवी जुड़ा हुआ है. तो इसका कितना फायदा आपको मिलेगा?

मैंने पहले ही कहा कि जीटीवी की जो ‘ग्रोथ’है, जीटीवी जितने बड़े स्तर पर दर्षकों तक पहुंचता है, उसका तो फायदा हमें मिलेगा. जीटवी सिर्फ भारत तक ही नही बल्कि विदेशों में भी अपना वजूद रखता है.

भारतीय सिनेमा में बदलाव को आप किस रूप में देखते हैं?

देखिए, समय के साथ बदलाव आना स्वाभाविक है. अब लोगों की काम करने की षैली बदल गयी है. अब लोग प्रोफेषनल हो गए हैं. अलग अलग तरह की फिल्में बनायी जा रही हैं. छोटी फिल्में भी बन रही हैं.

इसके बाद क्या योजना है?
काफी योजनाए हैं. हमने तीन फिल्मों को एस्सेल विजन के साथ बनाने का अग्रीमेंट किया है.चरणबद्ध तरीके के साथ एस्सेल विजन उनकी घोषणा करेगा. हम इस वक्त सारा ध्यान ‘जज्बा’ पर दे रहे हैं.


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Mayapuri

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