मुझ पर किसी बात का कोई असर नही होता शर्मिला टैगोर

1 min


0

sharmila_tagore_young_600x450

मायापुरी अंक 13.1974

“एक महल हो सपनों का” के सैट पर शर्मिला टैगोर से मुलाकात हो गई। वह बर्मा शेल में शूटिंग कर रही थी। जहां वह अपने प्रेमी धर्मेन्द्र से मिलने आई। और धर्मेन्द्र वहां एक और ही लड़की के साथ आए हुआ थे। हौज में लड़कियां नही रही है और धर्मेन्द्र की हालत खराब हो रही है। वह एक लड़की लीना चन्दावरकर से कहते हैं।

“उफ पानी से शोले उबल रहे है” “आप शायरों का भी जवाब नही,

कांटों को फूल बना देते है। पानी को शराब

“और हसीना को खुदा बना देते है। बैठिये धर्मेन्द्र उसकी बात काट कर कहते हैं।

“खुदा बैठ गया तो खुदाई डांवा डोल हो जाएगी। लीना हंसते हुए कहती है।

अगर तुम मेरी जिन्दगी में न आती तो न मालूम मेरा क्या हाल होता। और शर्मिला टैगोर दोनों की बातें वृक्ष की आड़ से सुन लेती है। और उलटे पांव वापस चली जाती है। उसे नही मालूम था कि अपने जिस प्रेमी का उस से जिक्र किया करता था वह और कोई नही उसका अपना विशाल (धर्मेन्द्र) है। वह डॉक्टर की रिपोर्ट सुनाने विशाल के घर गई थी। और उसे घर न पाकर यहां क्लब चली आई थी। यहां आकर पता चला कि उसकी सौतेली बेटी लीना धर्मेन्द्र की मोहब्बत में गिरफ्तार हो चुकी है।

शर्मिला को शूटिंग से अवकाश मिला तो हमने उससे कहा।

किसी जमाने में हर कोई पत्रिका आपके जिक्र से भरी रहती थी। आप आज कल उस जोर शोर से न्यूज में नही नजर आती क्या बात है

“किसी कलाकार को न्यूज में रखने वाले आप लोग है और नजर अन्दाज करने वाले भी आप है। हम लोग खुद तो पत्र-पत्रिकाएं छापते नही। और अगर कोई कुछ लिखता भी है तो हम उसका असर नही लेते। शर्मिला ने कहा। “अब तो वही बात है कि दर्द मे दिल इतने दिनों से है कि आदत हो गई। आदमी सफाई भी करे तो किस किस की सफाई करे? “इसलिए अच्छा यही होता है कि कान बन्द कर लो। और मुंह सीलो। वरना जीना दूभर हो जाता है। शर्मिला हमारे पूछने से पूर्व ही बोलने लगी। “आप तो दिल की बात भी समझ जाती है। हम आपके और पटौदी साहब के आपसी संबंधो के बारे में जानना चाहते थे कि वाकई उनमें दराड़ पड़ने लगी है ? हमने पूछा।

“मैं अपने निजी मामलात में इस प्रकार का दखलअन्दाजी कतई पसन्द नही करती। मेरा बस चले तो मैं ऐसे लोगों को गोली से उड़ा दूं जो बिना वजह किसी की गृहस्थी में ऐसा जहर घोला करते है। शर्मिला ने प्रगट करते हुए कहा। क्या ऐसा कोई घर है जहां पति-पत्नी में कभी झगड़ा या तकरार न होता हो लेकिन हमारी जरा जरा सी बातों को उछाल दिया जाता है। मैंने जिस तरह किसी की परवाह किये बिना शादी की थी उसी तरह अलग भी हो सकती हू। इसमें छुपाने की क्या बात है। लेकिन लोग भूल जाते है कि मैं एक एक्ट्रैस ही नही एक लड़के की मां भी हूं। मैं अपनी औलाद के भविष्य को अंधकार में नही धकेल सकती। मुझ में और टाइगर (पटौदी) में काफी अन्डरस्टैडिंग है। हम में अब भी वैसा ही प्रेम है। जो लोग बदनाम करते है उन्हें खुदा अपने आप समझेगा। शर्मिला टैगोर ने चिढ़कर कहा।


Mayapuri

0 Comments

Leave a Reply