जब भारत रत्न लता मंगेशकर गाती है तो इंसानों और भगवानों दोनों की दुनिया सुनती है, जब वो लोगों को बुलाती है तो वो उड़ते हुए आते हैं – अली पीटर जॉन

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अब मैं जो भी कहने जा रहा हूँ वो मेरे दिल की भावनाये हैं जो तबसे है जब मैंने उन्हें पहली बार गाते सुना था और मैं तब 5 साल का था। जब वो गाती है, तो हम जो यहाँ जी रहे हैं और वो लोग जो पिछले 75 सालों से यहाँ रह रहे हैं उन्हें सुनना पड़ता है क्योंकि कोई और विकल्प होता नहीं है। जब वो गाती है तो ऊपर बैठे भगवान भी अपने फरिश्तों के साथ कर रहे कामों को भूल जाते हैं और बस उन्हें गाते हुए सुनते हैं। जब वो गाती है तो सूरज, चाँद और सितारे भी अपनी जगहों पर ठहर जाते हैं और इंसानों में बनी सबसे खूबसूरत आवाज को सुनते हैं। जब वो गाती है तो सारे जानवर अपने पिंजरों से, पंछी आसमान से, मछलियां समुन्दर से और बीच से रेत भी अपना सर झुकाते हैं आदर में। जब वो गाती है तो सबसे खूंखार खूनी और मुजरिम भी अपनी जिन्दगी में बदलाव लाने के बारे में सोचने लगते हैं। जब वो गाती है तो नेता भी अपनी चालों के बारे में सोचना बंद कर देते हैं और उनके गाने की तारीफे शुरू कर देते हैं क्योंकि उनके भाषण लोग बहुत सुन चुके हैं। जब वो गाती है तो बड़े से बड़े उस्ताद और गीतकार उनकी बराबरी करने की कोशिश करते हैं जिसमें वो बुरी तरह हारते हैं और जो वो एक चिराग से रौशनी नहीं कर पाते तो उनके नाम के 100 चिराग जलाते हैं संगीत की देवी का नाम दे कर उनकी तारीफ करते हैं क्योंकि ये एक ऐसा तोहफा है जो भगवान ने सिर्फ एक ही इंसान को दिया है, इस जन्म और अगले कई जन्मों के लिए।lata mangeshkar

ये कुछ ऐसी भावनाये हैं जो भारत रत्न लता मंगेशकर मेरे अंदर जगाती आयी है जब से मैंने संगीत को जानने की कोशिश की है। उन्होंने दुनिया भर में गाना गाया है जहा बहुत से शेख और उनकी बेगमें और कई राजा रानियों ने अपनी 100 साल पुराणी प्रथाएं बदली ही और ध्यान रखा है कि वो लता के हर कॉन्सर्ट में पहुंचे। अफसोस की बात है कि पिछले कुछ सालों ने उनका बुढ़ापा देखा है जहां उन्होंने काफी हद तक गाना छोड़ दिया है लेकिन एक ऐसा घराना है जहा लता के गाने आज भी जीते हैं और आगे भी जीते रहेंगे।

 कोई मुझे इनकी इतनी तारीफ करने से रोक लो वरना मैं तारीफें करना बंद नहीं कर पाऊँगा इस करोड़ो में एक बार हुए भगवान के अजूबे की जिन्हें हम लता मंगेशकर के नाम से जानते हैं ये सब ख्याल मेरे दिमाग में तब आये जब वो अपने पिता, पंडित दीनानाथ मंगेशकर की 75 बरसी पर मौजूद थी। वहां पर और भी कई महान हस्तियां मौजूद थी जैसे वैजयन्तीमाला जो अपनी उम्र से कई गुना छोटी दिख रही थी, भारतीय क्रिकेटरों में से एक महान क्रिकेटर और हमारे पुराने कप्तान कपिल देव और मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान पर सबको ही लता की तारीफ में कुछ कहने लिए शब्दों की कमी पड़ रही थी। मेरे अभी तक के अनुभव में सिर्फ अमिताभ बच्चन ही एक ऐसे शख्स है जो लता के साथ न्याय कर पाये  जिन्हें लता जी ने ‘शब्दों का शहंशाह’ और ‘आवाज के जादूगर’ नाम दिए जिसके कारण वो आदर सम्मान में उनके सामने सर झुकाने लगे क्योंकि उन्होंने उस औरत से ऐसी तारीफ की उम्मीद नहीं की थी जिन्होंने बच्चन खानदान की जिन्दगी पर असर डालना तब से ही शुरू कर दिया था जब से उन्होंने पहली बार लता जी का गाना सुना था।lata didi

समारोह का हृदयेश आर्ट्स के अविनाश प्रभावलकर ने आयोजन कराया था जिन्होंने दिन रात लगा कर उस समारोह को कामयाब बनाया और हर साल 24 अप्रैल के तरह पुलिस वालों के लिए अंदर और बाहर की भीड़ को संभालना बहुत मुश्किल होता जा रहा था पर ये लोग भी क्या करते जब दर्शकों को पता था की आज उन्हें एक महफिल मिलने वाली है जहां नाइटिंगेल अपने परिवार के साथ स्वयं वहां मौजूद होंगी और 50, 60 और 70 के दशक के कई बड़े कलाकार भी मौजूद होंगे। वैजयन्तीमाला भी चेन्नई से आयी थी और आते भी क्यों ना, आखिर लताजी ने खुद उन्हें न्योता भेजा था और इससे भी बड़ी बात यह है की जिस एक्टर ने ये सोचा था कि वो किसी के भी घर के किसी समारोह में नहीं जायेंगे, उन्होंने अपनी कसम तोड़ दी जब उन्होंने इनविटेशन पर लता जी का स्टाम्प देखा जिनके गाने सुन कर वो बड़े हुए है और ऐसा कुछ कपिल देव के साथ भी हुआ जिन्हें लताजी में अपना सबसे बड़ा फैन मिला जिनका मुझे पता है कि उन्हें क्रिकेट के बारे में और लोगों से बेहतर जानकारी है। अगर गीत गाने के अलावा लता जी को कोई और चीज पसंद थी तो वो था क्रिकेट का एक अच्छा खेल। उनको अच्छे से पता है की कौन-सा खिलाड़ी अच्छा है और कौन-सा नहीं और कौन-सी टीम दुनिया का सबसे अच्छी क्रिकेट टीम है। मुझे स्वर्गीय मोहन वाघ, जो की लताजी और उनके परिवार के व्यक्तिगत फोटोग्राफर थे, के घर पर क्रिकेट मैच देखने का मौका भी मिला था जिसे मैंने गवाया नहीं। लता जी को वहां सिर्फ 15 मिनट का ही काम था मगर जब डे एंड नाईट मैचेस शुरू हुए तो उन्हें भी अपनी होश नहीं रही और वो हर बॉल जो खिलाई गयी और जो खेली गयी पर अपनी कमेंटरी भी जरूर देती थी। 90 के दशक की बात करे तो उन्हें उस समय पर हर महत्वपूर्ण क्रिकेट खिलाड़ी का नाम मालूम था और उनमें से कुछ को वो अच्छे से जानती भी थी।

अगर कोई भी समारोह मंगेश्करों से जुड़ा है तो संगीत तो उसमें मिलेगा ही और आज के जमाने में भी दर्शक अच्छे गानों के भूखे हैं लेकिन अब सिर्फ सुर और ताल की होटचपॉच ही देखने को मिलता है जिसे संगीत के नाम पर सुनाया जाता है। लता मंगेशकर, आर.डी. बर्मन, नौशाद, शंकर-जयकिशन, खय्याम, मदन मोहन, सी रामचंद्र, एसडी बर्मन, मोहम्मद रफी, मुकेश, मन्ना डे और आज के समय में सिर्फ ए आर रहमान के ही गाने ऐसे होते हैं जिन्हें सुन कर दर्शक एक दूसरी ही दुनिया में पहुंच जाते हैं।Lata-Mangeshkar

आमिर जो सर्वश्रेष्ठ निजी पुरस्कारों को न लेने के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं उन्होंने यह  निर्णय तब लिया था जब एक आयोजक ने उन्हें धोखा दिया उन्हें वो पुरस्कार नहीं दिया गया जिसके आमिर योग्य थे। लेकिन इस बार वह इस फिल्म के पुरस्कार पाने के लिए बहुत खुश और उत्साहित थे। जिसमे उन्होंने एक आम आदमी की तरह काम किया और पूरी तरह से दो अलग आमिरों में खुद को बदल दिया। इस समारोह में ‘दंगल’ के निर्देशक, नीतेश तिवारी भी उपस्थित थे और आमिर ने कहा कि ‘दंगल’ की सफलता के लिए सभी श्रेय उनकी लेखकों के दल नीतेश तिवारी, पीयूष गुप्ता, श्रेयस जैन और निखिल मेहरोत्रा को दिया जाता है जिन्होंने मेरा दिन बनाया और बहुत से लोग इस विशेषाधिकार वाले लोगों का हिस्सा क्यों सोचते हैं कि गाने की रानी क्यों इतनी कमजोर और मुझे लगा कि उनसे कह रहा था कि सतांसी की महिला से उनकी क्या उम्मीद थी और कई ऐसे लोग भी थे जो आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बारे में चिंतित थे और आश्चर्यचकित थे कि उनके पुरस्कार के साथ आमिर को पेश करने के लिए क्यों चुना जा रहा है और ऐसे अन्य लोग भी हैं जो उन्हें पुरस्कार प्रदान कर सकते है। और कई लोग यह सोच रहे थे की लता जी ने आमिर को पुरस्कार पेश क्यों नहीं किया। और ऐसे लोग थे जो हमेशा फिल्मों, संगीत और क्रिकेट से संबंधित होते हैं वह पूछते हैं कि एक राइट विंग लीडर जो एक फिल्म समारोह में शायद ही कभी या किसी समारोह में हुआ था? क्या यह पंडित दीनानाथ मंगेशकर की स्वतंत्रता वीर सावरकर की खुली प्रशंसा की वजह से थी? या क्या ये आने वाली चीजों का संकेत था? भारत के अगले राष्ट्रपति के रूप में उल्लेख किया गया भागवत का नाम नहीं था, यह माना जाता है कि उनके सम्मान में कमी आई है, लेकिन अगर वह मंगेशकर परिवार की घटना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो, तो वह इस देश में कुछ भी हो सकता है जिसे राजनीति के बारे में सब पता है जो आम आदमी कभी नहीं कह सकता. मुझे नहीं लगता कि यहां तक कि भारत रत्न के पास ऐसे किसी भी व्यक्ति को प्रदान करने के लिए एक संतोषजनक उत्तर होगा जो इस तरह के प्रश्न पूछते हैं जो किसी को नाखून या सुइयों के बिस्तर पर रख सकते हैं। खैर 24 अप्रैल 2017 को कुछ मुकाबले के अलावा याद किया जाएगा,  जब वह बारह वर्ष की लड़की थीं तब से अपने पिता की सालगिरह मनाई मनाती आ रही है। वह अपने पिता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए हर संभव प्रयास करती थी। आभार एक भावना है जो दुनिया से धीरे-धीरे जा रहा है। उस दुनिया मैं हम जी रहे हैं।


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Mayapuri

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