INTERVIEW!! ‘‘हॉलीवुड बॉलीवुड को बर्बाद कर देगा, ये मैंने 1995 में कहा था’’ – अमिताभ बच्चन

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हॉलीवुड या अमेरिकन फिल्म इंडस्ट्री जंहा भी गई, वंहा उसने सब कछ बर्बाद करके रख दिया। ये कहना हैं अमिताभ बच्चन का। उनका कहना है कि 1995 में हमने अपनी कंपनी एबीसीएल को कार्पोरेटर बनाकर पहली शुरूआत की थी। उसी वक्त हमने घोषणा की थी कि हमें जल्दी से अपने घर को संभाल लेना चाहिये, क्योंकि अमेरिकंस यहां आने वाले है। ये रिकॉर्ड रहा है कि हॉलीवुड जंहा जंहा गया उसने उस जगह की इंडस्ट्री को बर्बाद करके रख दिया। जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, इटली आदि जंहा भी गया उन सारे देशों की फिल्म इंडस्ट्री उसने खत्म करके रख दी।

अमिताभ कहते हैं, एक बार मैं अमेरिका गया था छूट्टियां बिताने। इससे पहले मेरे पास वार्नर ब्रदर्स,फॉक्स तथा इरोस और न जाने कौने कौन से हॉलीवुड के बड़े बैनर्स से चिट्ठियां आती थी कि आप एक बार हमसे आकर मिलो। मै उन चिट्ठियों को लेकर समझता था कि शायद कोई मजाक कर रहा है, वरना हॉलीवुड के इतने बड़े बैनर भला मुझसे क्यों मिलना चाहेंगे। 1990 में छुट्टियां बिताने मैं जब अमेरिका गया तो मैं वहां मैने अपने एक वकील मित्र को ये सारी बताई,  तो उसने कहा जाकर मिल लो, मिलने में क्या हर्ज है। अपने वकील मित्र की बात मानते हुये मैं इन्हीं में से एक बड़े बैनर के एक साहबान से मिला। आप यकीन करें कि आधे घंटे मे उसने मुझे हमारी फिल्म इंडस्ट्री के बारे में ए टू जैड तक सब कुछ बता दिया, कि वहां कौन बड़े बैनर्स हैं कौन बड़ा स्टार है किस स्टार की फिल्में ज्यादा चलती है या कैसे फिल्में ज्यादा चलती हैं वगैरह वगैरह। मैं तो इतना हैरान था कि वहां मेरे मुंह से बोल तक नहीं फूट रहा था। बाद में मैंने अपने वकील दोस्त को सारी बातें बताई कि यार उसे तो हमारे बारे में सब कुछ पता है, तो उसने मुस्कराते हुये कहा, कि मिस्टर बच्चन अब आप वापस मुंबई जाईये और वहां सबको बताईये कि जल्द ही वहां अमेरिकंस आ रहे हैं। आज मैं महसूस कर रहा हूं कि जिस तरह से हॉलीवुड यहां आकर धीरे धीरे सब कुछ कैप्चर कर रहा हैं वो दिन दूर नहीं जब और देशों की फिल्म इंडस्ट्रीज जैसा हाल यहां का भी न हो जाये। हालांकि ऐसा भी नहीं हैं कि वे हमसे ज्यादा टेलेंटिड हैं।

Amitabh bachchan with Mayapuri Journalist Shyam sharma
Amitabh bachchan with Mayapuri Journalist Shyam sharma

ऑस्कर के बारे में अमिताभ का कहना है कि हमारी समझ में नहीं आता कि ऑस्कर को हम क्यूं इतना भाव देते हैं कि अगर वो किसी को मिल गया तो समझ लीजिये कि उसने किला जीत लिया। हम लोग क्यों नहीं समझते कि वो अवॉर्ड उनका है तो वहां के लोगों को ही दिया जायेगा। क्या हम उन्हें फिल्म फेयर अवॉर्ड के लिए बुलाते हैं, तो फिर क्यों हम लोग ऑस्कर के लिये पागल बने रहते हैं। कई लोग कहते हैं कि हमारे फलां कलाकार ने फिल्म में बिलकुल वैसा काम किया, जैसा हॉलीवुड के फंला कलाकार ने किया था। मेरा कहना है कि उस कलाकार को कहो कि वो यहां आकर उन परस्थितियों में आकर काम करें जैसे हम करते हैं। तो उसे पता चलेगा कि कौन ज्यादा टेलेंटिड है। किसी ने लिखा कि बाजीराव मस्तानी में रणवीर सिंह ने इतना बढि़या काम किया कि उसकी तुलना हॉलीवुड के एक्टर रसल क्रो के साथ की जाती है। मेरा यहां कहना है भाई साहब रसल क्रो को बोलो कि वो यहां आकर रणवीर की तरह मल्हारी नाचकर दिखाये, कर पायेगा ? नहीं कर पायेगा। सो हम उनसे कहीं ज्यादा गुणी हैं।

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Mayapuri