‘ मैं ऐसी जगह कदम भी नहीं रखना चाहता’’ –  अर्जुन माथुर

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पूरी तैयारी की साथ ही अर्जुन माथुर ने बॉलीवुड मे प्रवेश किया था । लंदन में जन्में और दिल्ली तथा मुबंई से शिक्षित अर्जुन ने बाकायदा अभिनय की विधिवत शिक्षा ली । इसके उसने अपना कॅरियर शुरू किया बतौर सहायक निर्देशक  जैसे रंग दे बंसती, बंटी और बबली तथा मंगल पांडे आदि । उसी दौरान उसे मीरा नायर की शॉर्ट फिल्म ‘माइग्रेशन तथा फरहान अख्तर की फिल्म‘ पॉजिटिव’ की फिल्में मिली । और यहां से उसका एक्टिंग करियर भी शुरू हो गया । उसकी  रिलीज हुई फिल्म  ‘काॅफी ब्लूम’ को लेकर उससे एक बातचीत । 10BGMARJUN1_60917f

अपनी फर्स्ट फिल्म के बारे में क्या फीलिंग  थी ?

मेरी पहली फीचर फिल्म ‘ लक बाई चांस‘ थी जिसे लेकर औरों की तरह मैं भी काफी एक्साइटिड था । बाद में मुझे मिली फिल्मं जैसे बारह आना, माई नेम इज खान, आई एम तथा अंकुर अरोड़ा मर्डर केस आदि  से मेरा काफी आत्मविष्वास बढ़ा । बल्कि अंकुर अरोड़ा….  में तो मेरे काम की काफी तारीफ हुई थी ।

कॅाफी ब्लूम क्या है ?

कॅाफी ब्लूम एक स्टेट है जिसकी फिल्म में काफी अहमियत  है । बावजूद इसके  ये थोड़ी अलग सी लव स्टोरी है। इसे हत ट्रायगंल लव स्टोरी भी कह सकते  हैं ।

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आपका किरदार ?

मेरे केरेक्टर को वन ऑफ द मोस्ट लेयर्ड और कॉम्प्लेक्स कहा जा सकता था । देवानंद करीअप्पा यानि मैं बंगलौर में अपनी मां के साथ कॉफी बिजनिस चलाता हूं । देव को बहुत पहले एक लड़की प्यार में कुछ धोखा दे चुकी है जिसके बाद वो संयासी तक बनने के लिये तैयार हो गया था  क्योंकि उसकी लाइफ में ऐसा कुछ भी नहीं रह गया है जिसके साथ वह जीवन बिता सके । एक दिन उसे पता चलता है कि जिसने उनकी स्टेट खरीदी थी उसकी एक्स गर्लफेंड अब उसी की पत्नि है । यहां से कहानी में एक नया टर्न होती है ।

आपके को आर्टिस्ट कौन हैं?

बेसिकली ये चार किरदारों की कहानी है जिसमें मैं, मोहन कपूर सुगंधा गर्ग तथा एक बहुत टेलेंटिड आर्टिस्ट ईश्वरी बोस है ।

छोटे बजट की फिल्मों को लेकर आपकी क्या प्रतिक्रिया है।  ?

मैं अभी इतना बिड़ा या जिम्मेदार कलाकार नहीं बन पाया कि इस तरह का सवालों का जवाब दे सकूं । वैसे भी इस सवाल का जवाब षायद मेर पास नहीं है । फिर भी मैं इतना कह सकता हूं कि मैने अभी तक ज्यादातर छोटी फिल्में ही की हैं जिनका बजट छोटा ही होता है । लेकिन उनमें अंकुर अरोड़ा….या बारह आना या फिर आई एम जैसी फिल्मों की न सिर्फ तारीफ हुई बल्कि उन्होंने प्रोडयूसर को कमाकर भी दिया ।

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अपना का्रयटेरिया क्या है ?

मैं भी दूसरे एक्टर्स की तरह कमर्शियल फिल्में करना चाहता हूं  जो मुझे फाइनेंसली मजबूत बना सकती है । लेकिन मुझे उस तरह की फिल्में भी करनी है जो मेरे अंदर के अभिनेता की भूख शांत कर सके ।

क्या टीवी से भी लगाव हैं ?

बिलकुल नहीं । वैसे भी आज फिक्षन टेलीवीजन का क्या  स्टैंडर्ड है ? कुछ नहीं । मैं ऐसी जगह कदम भी नहीं रखना चाहता ।

और फिल्म ?

‘कोचिंग टाइगर मनू’ जो एक कॉमेडी फिल्म है । इसमें निमित बोस, सजंय मिश्रा, विजयराज तथा टीनू आंनद आदि कलाकार हैं । एक और फिल्म ‘अनु मेनन की वैडिंग’ है यहां मेरे अपोजिट कल्कि कोचलिन है जो मेरी वाइफ बनी है । एक और फिल्म है जिसका नाम एंग्री इंडियन गॉडसिस है ।

 


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Mayapuri

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