मैंने आज कल शराब बिल्कुल छोड़ रखी है – धर्मेन्द्र

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मायापुरी अंक 16.1975

‘सन एण्ड सेन्ड’ में उस दिन शत्रुघ्न सिन्हासाहब की बर्थडे पार्टी थी। मेहमान आ चुके थे और ‘दुल्हा’ गायब था। अन्दर मेहमान दुल्हे को भूल कर अपनी खुशी जाहिर करने के लिए विदेशी शराब में डूबने लगे थे। सिम्पल कपाड़िया मेहमानों में अपनी मौजूदगी का सुबूत एक-एक से ‘पर्सनली’ मिलकर दे रही थी। हर कोई उससे एक ही सवाल कर रहा था “आपकी पहली फिल्म कब सैट पर जा रही है ?” सिम्पल बेचारी इस सवाल से बोर हो रही थी क्यों कि वह स्वयं नही जानती थी कि उसकी फिल्म कब सैट पर जाएगी (उसने कौन सी फिल्म साइन की है, उसका कौन हीरो है यह उसकी सिर दर्दी नही, बल्कि पप्पा चुन्नी की सिर दर्दी है।

हम वहां से ताजी हवा मे सांस लेने बाहर लान में निकल आये। अभी हम पूरी तरह सांस भी न लेने पाये थे कि देखा कि एक भीड़ हॉल में दाखिल हो रही है। हम पलट कर अन्दर जाये, तो दरवाजे में ही धर्मेन्द्र टकरा गये। वह शत्रुघ्न सिन्हा को वर्षगांठ की बधाई देने आये थे। यह उनकी खुशकिस्मती थी कि उनके पीछे-पीछे ही शत्रु भी वहां पहुंच गये था। धर्मेन्द्र तुरन्त ‘फर्ज’ से निवृन हो कर वापस जा रहा थे कि हमने जा घेरे।

“यह क्या बात हुई आप अभी आये और वैसे ही उल्टे पांव वापस चल दिये? ऐसी जल्दी में तो आपको कभी देखा ही नही। हमने मेजबानों के से अन्दाज में कहा।

मैंने आज कल शराब बिल्कुल छोड़ रखी है। और सुबह-सवेरे ‘प्रतिज्ञा’ की शूटिंग के लिए वापिस जाना है धर्मेन्द्र ने उत्तर में कहा। शराब ही छोड़ी है या शबाब से भी हाथ खींच लिया हमने मजाक में कहा।

“शराब” और शबाब का चोली दामन का साथ है किन्तु उसके बावजूद मैं हुस्ने शराब से दूर ही रहता हूं। लेकिन आपके बिरादरी वाले मुझे बिना वजह कांटों में घसीटते रहते हैं। धर्मेन्द्र ने बड़ी सफाई से जवाब दिया।

पिछले दिनों सुना था कि आपने एक फिल्मों की शौकीन लड़की को अपने यहां शरण दी थी? हमने मौका देखकर सवाल दागा। मैंने पनाह नही दी थी बल्कि उसे पुलिस स्टेशन भिजवा दिया था। वह एक अच्छे घराने की लड़की थी जो फिल्मों के क्रेज में मुम्बई भाग आई थी। मैंने उसे वापिस जाने के लिए कहा किन्तु वह मानी नही तब पुलिस से मदद लेनी पड़ी। पुलिस ने उससे उसके मां बाप का पता मालूम किया और उसके मां बाप के आने तक हवालत में रखने की बजाए घर पर रखने को कहा। मैं एक शादी शुदा और बाल बच्चेदार आदमी हूं। पराई औरत की अपनी औलादकी तरह समझता हूं। वह बहुत कमसिन बच्ची थी इसलिए पुलिस ने हवालात की बजाए मेरे यहां उसे रखने को कहा है। मैंने अपने खर्च से उसे वापस भेजने का प्रबंध किया और उसे उसके बाप के हवाले करके खुद बैंगलौर शूटिंग को चला गया। इस पर भी लोग बदनाम करते हैं तो क्या करें। दरअसल मारने वाले का हाथ पकड़ा जा सकता है कहने वाले की जबान नही। धर्मेन्द्र ने लाचारी भरे स्वर में कहा। और समय के अभाव के कारण क्षमा मांगता हुआ होटल से बाहर चला गया।


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Mayapuri

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