क्या सुपर कूल है एकता कपूर

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जिस देश में हर चार में से तीन लड़कियां गर्भ में ही मार डाली जाती हों, जहां लड़के के लिए सपने और दुआएं मांगी जाती हों, जहां लड़की को बोझ समझा जाता हो…पराया धन समझा जाता हो। वहां अगर कोई लड़की, अपने आपको इस मर्दों की दुनिया में सबसे बेहतर सिद्ध करती है, तो उसके जज़्बे, उसके जुनून और उसकी काबलियत को सलाम करने को जी चाहता है।

‘क्या सुपर कूल है हम’ के प्रमोशन के लिए दिल्ली में आई एकता कपूर। फतेहपुर सीकरी की दरगाह में चद्दर चढ़ाकर, अपनी फिल्म की सफलता की दआएं मांग कर, इण्डियन फिल्म इण्डस्ट्री की क्वीन, एकता कपूर, हमारे साथ रूबरू थी। कुछ ऐसी बातों को लेकर जो अक्सर नहीं सुनाई देती। तस्वीर के एक नये रुख के साथ मैंने उनसे बातचीत की।

॰ क्या लगता है, इण्डियन फिल्म इण्डस्ट्री, जो पुरूष प्रधान रही है। वहां एक कम उम्र लड़की ने सबसे ऊंचा मुकाम हासिल किया?

– इतना आसान नहीं था हरविन्द्र जी, पर माँ बाप के आशीर्वाद से और एक लगन से… कि कुछ ऐसा करना है जो आज तक नहीं हुआ। आसमान छूना मुश्किल ज़रूर है,पर नामुमकिन नहीं। बस इरादा पक्का हो, अच्छे लोगों का साथ हो और बस आगे बढ़ने का साहस हो…मंजिल खुद ब खुद कदमों में आ जाती है।

॰ ‘हम पाँच’ से ‘डर्टी पिक्चर’ लंबा सफर… लोग अक्सर फिल्मों में स्टार्स को लेते हैं पर आपकी फिल्मों में काम करके लोग खुद स्टार बन जाते हैं?

-यह सब ऊपर वाले की कृपा है। पर स्टार मेकर होना या किसी को कुछ बना देना। यह तारीफ के लिए अच्छा है पर बनता वही है, जो मेहनत करना जानता है। और बनाता वही है, जिसे मेहनत करवानी आती है। काम कुछ भी करो, परफेक्ट करो।

॰ कैसा लगता है जब लोग अक्सर कहा करते हैं कि अगर हमारे घर में बेटी हो, तो एकता कपूर जैसी हो?

– बहुत बड़ी बात कह दी आपने…दरअसल सबसे मुश्किल है कि अगर आप स्टार सन या स्टार बेटी हैं तो आपको हमेशा आपके माता पिता की छवि से कंपेयर किया जाता है। बरगद के साये में उससे ऊंचा वृक्ष नहीं उगता। शायद यही वजह है कि फिल्म स्टार की अगली पीढ़ी को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। आज अच्छा लगता है कि लोग मुझे मेरे अपने नाम से जानते है। पर पिता का आशीर्वाद, मम्मी का स्नेह और भाई का प्यार हमेशा मेरा पथ प्रदर्शक रहा है। और बेटी कैसी भी हो…पर पैदा होने दीजिए…बेटियां ही इंदिरा गांधी बनती है। बेटियां ही किरण बेदी, कल्पना चावला, मदर टेरेसा बनती है और आपके प्यार के सदके एक बेटी ही, एकता कपूर बनी है।

॰ ‘क्या सुपर कूल हैं हम’ में कंट्रोवर्सी क्यों हो रही है….जबकि आप हमेशा इससे बचती रही है?

– ऐसा कुछ नहीं है। सेंसर ने ना जाने क्यों इसका प्रोमो पास नहीं किया। आपने देखा है कि उसमें ऐसा कुछ नहीं है। हाँ वक्त के बदलते परिवेश में, जैसा वातावरण आसपास है, वही दिखाने की कोशिश की है। बाकि दर्शक ही इसका असली निर्णय करेंगे।

॰ आप क्या समझती है कि आजकल बन रही फिल्मों में क्या खास है?

– सब कुछ, आजकल बेहतरीन तकनीक से फिल्में बन रही है और रियलिस्टिक सिनेमा वापिस आ गया है। लोग वो देखना चाहते है, जो वे महसूस करते है। जो उन्हें अपने आसपास होता नज़र आता है। यदि हम पिछले 70 वर्ष के इण्डियन फिल्म इतिहास पर नज़र डाले तो 30, 000 से अधिक फिल्में भारत में बनी है पर जो नयापन लिए है, वो आपके दौर की फिल्में है, मैं सभी फिल्म मेकर्स को बधाई का पात्र समझती हूँ।

आँखों में बुलंद इरादे, कुछ कर गुजरने का जुनून…पा जाने का जज़्बा….जीतने का हुनर….एक बेहद विनम्र, प्यारी और मासूम सोच वाली इस एकता से यह लम्हें शायद जि़ंदगी के सबसे हसीन लम्हे थे। एक शेर जो एकता कपूर को बेहद पसंद आया, आपकी नज़र है…

‘‘ बुलंद कर अपनी हस्ती को, उस हालात के लिए…

कि खुदा तरसे, तुझसे मुलाकात के लिए।’’

 

 

 


Mayapuri