INTERVIEW!! ‘‘ मैं इस किरदार को लेकर बहुत डरा हुआ था’’ – इमरान हाशमी

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किसिंग किलर की चर्चित इमेज से अलग शायद पहली दफा इमरान हाशमी ने एक ऐसी फिल्म ‘हमारी अधूरी कहानी’ की है जिसकी कहानी एक अरसे बाद महेश भट्ट ने लिखी है । ये कहानी भी उनकी जिन्दगी के निजी पन्नो से ली गई है । इससे पहले उनका इसी नाम से एक उपन्यास भी प्रकाशित हो चुका है । फिल्म को लेकर क्या कहना है इमरान का, बता रहे हैं श्याम शर्मा के साथ एक बातचीत में ।

एक अरसे बाद भट्ट सरहब द्वारा लिखी कहानी पर बनी फिल्म में काम करने को लेकर कितने रोमांचित हैं ?

वाकई मेरे लिये तो ये फिल्म एक अवार्ड की तरह है । जो अचानक मेरी झोली में आकर गिरी । जंहा तक भट्ट साहब की फिल्मों की बात की जाये तो आपने जर्नली देखा होगा कि मैं रोता नहीं हूं । लेकिन सारांश और जख़्म देखते हुए मैं फूट फूट कर रोया था या इस बार इस फिल्म ने भी मुझे खूब रूलाया ।

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यहां भट्ट साहब की जिन्दगी के कौन से अंश दिखाई देने वाले हैं ?

ये मेरी ग्रेड मदर की जिन्दगी और उनके फादर की जिन्दगी से इंसपायर फिल्म है ।इसमें उनकी जिन्दगी के अलग अलग अनुभव है इसलिये ये एक रीयल फिल्म लगती है । एक उदाहरण देना चाहूंगा जिसके बारे में मुझे पहले पता नहीं था । दरअसल मेरी ग्रेंडमदर उस दौरान आई सी यू मे भर्ती थी। मैं उस वक्त बहुत छोटा था। भट्ट साहब नेे वो पोर्शन फिल्म में डाला है मेरा रोल किसी बच्चे ने किया है लेकिन वो फिल्म का बहुत ही इमोशनल सीन है ।

अपनी भूमिका के बारे में क्या कहेगें ?

इस तरह का किरदार मैने पहली बार किया है । मैं यानि आॅरव करीब सो होटलों का अकेला मालिक है। बहुत ही प्रेशियस लड़का है । महज पेंतीस साल की उम्र में उसने ये सब हासिल कर लिया है । उसी दौरान उसे पता चलता है कि उसकी जिन्दगी में कोई ट्रेजडी है । सबसे बड़ी बात की आॅरव इतना सब कुछ हासिल कर लेने के बाद भी बहुत ही शरीफ और डाउन टू अर्थ लड़का है । मेरे डैडी ने फिल्म देखकर कहा कि यार पहली बार मुझे पता चला कि तू इतना शरीफ आदमी है । बारह साल के करियर में तूने जो पाप किये हैं वो सब इस फिल्म में धो डाले ।

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ये भट्ट साहब की किताब पर बनी फिल्म है ?

जी हां । और ऐसा पहली बार हुआ कि फिल्म पहले बन गई और किताब बाद में लिखी गई । हालांकि अब तो किताब भी प्रकाषित हो गई है ।

आपके कोआर्टिस्टों की बात करें तो विद्या बालन के साथ आपकी ये तीसरी फिल्म हैं और राजकुमार राव के साथ पहली । इनके बारे में क्या कहना है ?

विद्या की अगर बात की जाये तो तीनों फिल्मों में उनके अलग अलग किरदार रहे हैं । मेरे भी । लेकिन अगर इस फिल्म की बात की जाये तो एक लाइन में फिल्म या किरदारों के बारे में नहीं बताया जा सकता । यहां हर किरदार की अपनी एक ट्रेजडी है ।मेरी मां के साथ भी एक हादसा होता है ।जो मुझे बाद में पता चलता है । तो मैं भी भटक रहा हूं उसी दौरान ये ओरत वसुधा मुझे मिल जाती है । मैं उसे इस कदर प्यार करने लगता हूं कि उसके लिये सब कुछ लुटा देने के तैयार रहता हूं । राजकुमार यानि हरि जो वसुधा का पति है उसके भी कुछ ग्रे शेड हैं जो उसने बहुत ही असरदार ढंग से निभाये हैं । जंहा तक मेरी बात की जाये तो मैने अभी तक ऐसा रोल नहीं निभाया जिसमें इस तरह के इमोशन हैं कि आप फिल्म देखते हुए रो कर बाहर निकलेगें ।

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फिल्म में कहीं न कहीं फिल्म ‘अग्निसाक्षी’से प्रेरित लगती है ?

मैने तो वो फिल्म नहीं देखी । लेकिन अगर कुछ है भी तो इसे इत्तफाक भी कहा जा सकता है ।

ये फिल्म करने के बाद क्या सोचते हैं ?

इस फिल्म में किरदार ऐसे हैं कि उन्हें निभाते हुए मैं बहुत डरा हुआ था । मैं ही नहीं बल्कि मेरे अलावा भी हर एक्टर डरा हुआ था । यहां तक डायरेक्टर भी। हमें यही डर था कि क्या हम सही तरह से अपनी अपनी भूमिका निभा पायेगें ।

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मोहित सूरी के साथ ये फिल्म करते हुए कैसा लगा और उसमें क्या बदलाव महसूस किया ?

वो पहले से काफी मेच्यौर हो गया है । मेरी उसके साथ ये आठवी फिल्म हैं । इसलिये अब तो हम लोग एक दूसरे की बात सिर्फ इशारे से ही समझ जाते हैं । जहां तक इस फिल्म की बात की जाये तो भट्ट साहब ने उस पर भरोसा किया और वो उस भरोसे पर खरा उतरा । जबकि वो अभी सिर्फ चौबीस साल का है ।


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Mayapuri

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