INTERVIEW!! ‘‘नया ट्रेंड शुरू करने के मकसद से कोई फिल्म नहीं करता..’’ – फरहान अख्तर

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15 साल पहले बतौर निर्देशक फिल्म ‘दिल चाहता है’ से बाॅलीवुड में अपने कैरियर की शुरूआत करने के बाद से अब तक फरहान अख्तर कई क्षेत्रों में अपने पैर पसार चुके हैं. अब वह चर्चित अभिनेता, निर्माता , पार्श्वगायक, पटकथा लेखक, गीतकार, टीवी कार्यक्रम संचालक व समाज सेवक भी हैं. वह ‘मैन अगेंस्ट रेप एंड डिस्क्रीमिनेशन’ (एमएआरडी) नामक ‘एनजीओ’ बनाकर काम कर नारियों की सुरक्षा और समाज तथा देश में पुरूषों के समकक्ष दर्जा दिलाने के लिए काम कर रहे हैं.इसके लिए वह शहर दर शहर जाकर वहां के कालेजों में म्यूजिकल कंसर्ट करने के साथ ही काॅलेज के लड़कों से इस मुद्दे पर लंबी बातचीत कर उनके माइंड सेट को बदलने का प्रयास करते रहते हैं।

फिल्म ‘दिल चाहता है’ से अब तक सिनेमा जगत में जो बदलाव आया, उसे किस तरह देखते हैं?

यह बदलाव बहुत ही ज्यादा सकारात्मक है.यह बदलाव प्रगति का है. नई नई सोच के फिल्मकार आ रहे हैं. आज कल फिल्मों में कंटेंट पर ध्यान दिया जा रहा है. एक ही ढर्रे की फिल्में नहीं बन रही है. धीरे-धीरे फाॅर्मूला फिल्में गायब हो रही हैं. मैं यह नहीं कहूंगा कि फाॅर्मूला फिल्में नहीं बन रही है. लेकिन एक वक्त वह था, जब सिर्फ फाॅर्मूला फिल्में बन रही थी. अब वह दौर नहीं रहा. अब कंटेंट आधारित फिल्में सफल हो रही है।

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आपकी फिल्म ‘दिल चाहता है’ को 15 साल पूरे हो गए. पीछे मुड़कर देखते हैं, तो क्या अहसास होता है?

सच..मुझे तो पता ही नहीं चला. समय कितनी तेजी से भागता है. मैंने अपने कैरियर की शुरूआत बतौर निर्देशक ‘दिल चाहता है’ से किया था. उसके बाद मैंने निर्माता, निर्देशक व अभिनेता के रूप में काफी काम किया. मैंने 5 फिल्में निर्देशित की.करबीन 12 फिल्मों में अभिनय किया और 12 फिल्मों का निर्माण किया. पर यह फिल्म मेरे लिए हमेशा यादगार फिल्म रहेगी. कुल मिलाकर मेरे लिए 15 वर्ष की यह यात्रा काफी उत्साहवर्धक रहा।

कहा जाता है कि ‘भाग मिल्खा भाग’ से आपने बायोपिक फिल्मों का एक ट्रेंड शुरू किया?

मैं कभी भी किसी भी फिल्म में यह सोचकर काम नहीं करता कि एक नया ट्रेंड शुरू करूं. मैं हमेशा कुछ नया और रोचक काम करना चाहता हूं. दूसरी बात मुझसे पहले इरफान ने बायोपिक फिल्म ‘पानसिंह तोमर’ की थी. पर यह सच हैं कि ‘भाग मिल्खा भाग’ को मिली सफलता के बाद तमाम फिल्मकारों ने बायोपिक फिल्में बनाना शुरू किया है. मुझे लगता है कि यह एक अच्छा ट्रेंड है. कम से कम हमारे लोगों को देश के लिए कुछ बेहतरीन काम कर चुके लोगों के बारे में जानने का मौका तो मिलेगा।

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‘भाग मिल्खा भाग’ को बाॅक्स आॅफिस सफलता मिली. आपके अभिनय को न सिर्फ सराहा गया बल्कि इस फिल्म के लिए आपको सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के कई पुरस्कार भी मिले. उसके बाद आपके पास फिल्मों की कतार लग जानी चाहिए थी?

आपको लगता है कि मेरे पास फिल्मों के आॅफर नहीं आए होंगे? मेरे पास बहुत अॅाफर आए. पर मैं उन कलाकारों में से नहीं हूं, जो एक साथ कई फिल्में करते हों. काम को लेकर मैं बहुत चूजी हूं. मैं कम मगर अच्छा काम करना चाहता हूं. इसकी एक वजह यह भी हैं कि मैं फिल्मों में काम करने के अलावा दूसरे काम भी करते रहना चाहता हू. मैं सामाजिक मुद्दों के लिए भी काम करना पसंद करता हूं. कुछ समय पहले मुझे ‘युनाइटेड नेशन’ ने ‘ही फाॅर शी’ कैम्पेन के लिए ब्रांड अम्बैसंडर चुना है।

आप एक एनजीओ मर्द (मैन अगेंस्ट रेप एंड डिस्क्रीमिनेशन) के साथ जुड़े हुए हैं. क्या इसके साथ जो काम शुरू किया था, वह बंद कर दिया?

यह एनजीओ चलता रहेगा. यह मेरा ‘लाइफ टाइम कमिटमेंट’ है. इसलिए बंद कभी नहीं होगा.अब तो यह सोशियल मीडिया पर बहुत एक्टिव हैं.इसका बहुत अच्छा रिस्पाँस मिल रहा है. हम इसके उत्सव काॅलेजों में करते हैं. विद्यार्थियों के बीच जाकर उनसे बात करते हैं. यह सिलसिला सदैव चलता रहेगा. बारिश के मौसम में गति धीमी पड़ जाती है. बारिश के बाद काॅलेज फेस्टिवल में ज्यादा जाता हूँ. मैं अतीत में मुंबई ही नहीं दिल्ली, बैंगलोर, इंदौर सहित कई शहरों के काॅलेजों में गया. मैंने हमेशा विद्यार्थियों के साथ बातचीत की. यह जो विद्यार्थी हैं, युवा पीढ़ी है, इन्हीं को जगाना पड़ेगा.तभी बदलाव आएगा. भविष्य के ओपीनियन मेकर यह विद्यार्थी ही है. 2014 में मैं राँची, बंगलोर, कोचीन, बेलगाम, हैदराबाद सहित कई शहरों में गया. इन शहरों के कालेजों में हमने ‘एम ए आर डी’ के तहत ही अपने ‘फरहान लाइव’ बैंड का म्यूजिकल कंसर्ट भी किया. जब हमने इस एनजीओ के लिए आईआईटी खड़गपुर में म्यूजिकल कंसर्ट किया. तो उस वक्त वहां के छात्रों से मेरी लंबी बातचीत हुई. हमारे एन जी ओ ‘एम ए आर डी’ को समाज के हर क्षेत्र की बड़ी बड़ी शख्सियत का समर्थन मिल रहा है. ‘एम ए आर डी’ के साथ तो कई विदेशी हस्तियां भी जुड़ रही हैं.जिनमें इमा वाॅटस्न, मिचाइल बोलटन, और शफाकत अली का समावेश है।

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फिल्म के अंदर धूम्रपान के दृश्य आने पर जिस तरह से ‘एंटी स्मोकिंग’की चेतावनी लिखी जाती है,उसको लेकर आप काफी नाराज रहते हैं?

जिस दिन से सेंसर बोर्ड ने निर्देश जारी किया था कि जब भी फिल्म में स्मोकिंग का सीन आए,तो उस जगह परदे पर एंटीस्मोकिंग की चेतावनी वाली लाइन जानी चाहिए,तभी से मैं इसके खिलाफ हूं.तब से मैं इसके खिलाफ आवाज उठाता आ रहा हूं. क्योंकि यह रचनात्मकता में दखलंदाजी है.इस तरह का रिमार्क परदे पर आते ही दर्शक का कहानी से ध्यान भंग हो जाता है.हमारी नजर में ‘स्मोकिंग’बड़ा मुद्दा है.हम भी चाहते हैं कि युवा वर्ग स्मोकिंग से दूर रहे.पर इसके लिए हमें नए तरह से कैम्पेन चलाना होगा.मैं फिल्म की शुरूआत में इस तरह के कैम्पेन को डालने के पक्ष में हू।

चूजी होने की वजह से ही 2014 की शुरूआत में ‘शादी के साइड इफेक्टस’ रिलीज हुई थी. उसके बाद कोई फिल्म रिलीज नहीं हुई?

मगर 2014 में मैंने सबसे ज्यादा काम किया.2014 मेरे लिए सीखने वाला अनुभव रहा.मैंने एक तरफ ‘दिल धड़कने दो’और ‘वजीर’ फिल्मों की शूटिंग की. वहीं अपने म्यूजिकल बैंड ‘फरहान लाइव’ के साथ बेलगाम, कोचीन, बैंगलोर, हैदराबाद, रांची सहित कई शहरों के काॅलेजों में जाकर कार्यक्रम किए. यह सारे कार्यक्रम मेरे ‘एम ए आर डी मुहिम का हिस्सा रहे. जहाँ तक मेरी जानकारी है, अब तक कोई भी कलाकार मेरी तरह बी क्लास शहरों में नहीं गया।

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बतौर निर्माता 2015 में आपकी कौन सी फिल्में आने वाली हैं?

हमारी कंपनी की ‘दिल धड़कने दो’, ‘बंगिस्तान’, ‘वजीर’ फिल्में रिलीज होगी. जबकि इसी साल हम बतौर निर्माता ‘राॅक आॅन 2’ और ‘रईस’ की भी शूटिंग शुरू करने वाले हैं

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इन दिनों किन फिल्मों पर काम कर रहे हैं?

इन दिनों बतौर अभिनेता काफी व्यस्त हूं. इस साल मेरी दो फिल्में ‘दिल धड़कने दो’ और ‘वजीर’ रिलीज होंगी. ‘दिल धड़कने दो’ का निर्देशन मेरी बहन जोया अख्तर ने किया है, जिसमें मेरे साथ दीपिका पादुकोण, प्रियंका चोपड़ा, अनुष्का शर्मा, रणवीर सिंह, अनिल कपूर, जरीना वहाब, रिद्धिमा सूद भी हैं. तो वहीं मैंने फिल्म ‘वजीर’ में अमिताभ बच्चन के साथ काम किया है. इसके अलावा हम अपनी होम प्रोडक्शन कंपनी के तहत फिल्म ‘राॅक आॅन’ का सिक्वअल ‘राॅक आॅन 2’ की भी शूटिंग शुरू करने वाले हैं।

फिल्म ‘वजीर’ में मैंने एटीएस आॅफिसर का किरदार निभाया है. जिसके लिए मैंने अपने आपको काफी कुछ बदला है. इसमें आपको मेरा नया लुक नजर आएगा. इससे पहले मैंने इसी तरह अपने आपको बदलने की कोशिश फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ में की थी।

फिल्म ‘वजीर’ के ट्रेलर का क्या रिस्पांस मिल रहा है?

जो सोचा था,उससे कहीं ज्यादा बहेतरी रिस्पाँस मिल रहा है. हमारे  ट्रेलर को देखकर तमाम दिग्गज पुलिस अफसरों ने भी तारीफ की है. सबसे बड़ी बात यह है कि मेरे सबसे बडे़ आलोचक मेरे पिता जावेद अख्तर ने भी मेरी प्रशंसा की है.आपको पता है कि मेरे पिता ने कई फिल्मों में पुलिस अफसरों के यादगार चरित्र अपने पेन से लिखे थे.यदि ऐसा इंसान मेरी तारीफ कर रहा है,तो यह मेरे लिए गर्व की बात है।

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आपके पिता जावेद अख्तर का आपकी जिंदगी में क्या भूमिका है?

वह मेरी जिंदगी में मजबूत आधार हैं. वह हर गाना बेहतर लिखने का ही प्रयास करते थे.यदि उनका गीत किसी इंसान को पसंद आ जाए, तो भी वह उसे और बेहतर बनाने का प्रयास करते थे.मुझे उनकी इस कार्यपद्धति ने काफी प्रभावित किया. मैंने उनसे सीखा कि जब तक आप कोई काम सही ढंग से पूरा ना कर लें,उसे सही बनाते रहने का प्रयास करते रहना चाहिए. मैं अपने जोक्स को भी बार बार रिपीट करता हूं।

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आप लेखक, निर्देशक, गायक व अभिनेता हैं. तो जब आप अभिनेता के तौर पर व्यस्त रहते हैं, तो बाकी चीजें पीछे नहीं रह जाती?

जब मैं अभिनय करता हूं, उस वक्त मैं निर्देशन या गायन के बारे में नहीं सोचता. जब मैं निर्देशन करूंगा, तब मैं गायन या अभिनय के बारेे में नहीं सोचूंगा. जब मैं स्टेज पर गाना गाता हूं, तो अभिनय या निर्देशन के बारे में नहीं सोचता. जब मैं कंप्यूटर पर कहानी लिखने बैठता हूं, तो मैं किसी अन्य चीज के बारे में नहीं सोचता. जिस पल मैं जो काम करता हूं,मेरे लिए वही जरूरी होता है।

निर्देशन में वापसी कब होगी? 

मैं भी निर्देशन को ‘मिस’ कर रहा हूं और बहुत जल्द फिल्म निर्देशित करना चाहता हूँ. इतना तय है कि मैं खुद को निर्देशन में जितना कम्फर्ट महसूस करता हूँ, उतना अभिनय करते समय नहीं महसूस करता।

दूसरे निर्देषक के साथ काम करते समय आपका निर्देषक मन सलाह देने के लिए नहीं कहता?

मैं जब फिल्म निर्देशित करता हूं, उस वक्त भी मैं फिल्म के कलाकारों के साथ सिर्फ सलाह मशविरा करता हूं. तो यदि कलाकार के तौर पर मैं किसी फिल्म में अभिनय कर रहा हूं और मुझे कुछ गलत लगता है, तो मैं उस बारे में निर्देशक से बात करता हूं.इसमें कोई बुराई नहीं. हम सभी बेहतर फिल्म बनाने का ही प्रयास करते हैं।

राॅक आॅन’ के सीक्वल यानि कि ‘राॅक आॅन 2’ में क्या नयापन होगा?

अब इस फिल्म के किरदार काफी मैच्योर होंगे.इसका संगीत काफी समसामायिक होगा।

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तो क्या आपके राॅक बैंड के म्यूजिक कंसर्ट कुछ समय के लिए बंद रहेंगे?

नहीं! मैं स्टेज पर लाइव परफाॅर्म करते हुए इंज्वाॅय करता हूं. इसके अलावा मेरी राय में हम किसी भी बात को दूसरों तक संगीत के माध्यम से जल्दी व आसानी से पहुँचा सकते हैं. म्यूजिकल कंसर्ट करते हुए मैं लोगों से पुरूष और औरत के बीच समानता की बातें करता हूं. यह काम मैं पिछले चार साल से करता आ रहा हूं. हम अभी तीन माह के टूर पर जाने वाले हैं. मुझे नहीं लगता कि इससे ‘राॅक आॅन 2’ की षूटिंग में कोई बाधा आएगी।

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लेकिन जब आपने ‘राॅक आॅन’ बनायी थी.तो उस वक्त तो इसके सिक्वल की कोई योजना नहीं थी?

आपकी बात सही है. पर जैसा कि हमें अचानक लगा कि संगीत के माध्यम से हम बहुत सी बातें लोगों से आसानी से कह सकते हैं. इसलिए ‘राॅक आॅन’ के सिक्वल ‘राॅक आॅन 2’ की योजना पर काम शुरू हुआ।

तो क्या ‘दिल चाहता है’ का भी सिक्वल बनाने की सोच रहे हैं?

जी नहीं! मैं एक बार फिर आकाश, समीर और सिदार्थ के संसार में नहीं जाना चाहता.2001 में दोस्ती की यह कहानी बहुत बेहतरीन बनी थी. उस वक्त लोगों ने इसे बहुत पसंद किया था।


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