मैने बचपन से अपनी शर्तो पर जीना सीखा है- कंगना रनौत

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तनु वेड्स मनु तथा क्वीन तथा तनु वेड्स मनु आदि फिल्मों के बाद एक बार फिर फिल्म ‘तनु वेड्स मनु रिर्टन’में कंगना रनौत के अभिनय के नये नये रंग देखने के लिये मिलने वाले है। फिल्म के अलावा कुछ अन्य बातों को लेकर कंगना के साथ एक बैठक ।

 

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पिछले दिनों आमिर खान और आपकी आदतों को लेकर काफी चर्चायें हुई ?

आमिर खान जैसे बडे़ स्टार से मेरी आदतों की तुलना करना मेरे लिये किसी एवार्ड से कम नहीं । दरअसल हुआ यह था कि मैं फिल्म फेयर एवार्ड लेने नहीं गई थी । तो मेरा एवार्ड उसी रात को रेखा जी मेरे घर पर देने आई थी । दरअसल मेरा भी मानना है कि इन पुरस्कारों से कहीं बड़ा एवार्ड मेरे लिये हैं जो मुझे मेरे दर्शक मेरी फिल्म हिट कर मुझे देते हैं । यह एवार्ड तो किसी को भी मिल सकता है लेकिन जो प्यार दर्शकों से मिलता है वह हर किसी को नसीब नहीं हो पता । बस मेरी ऐसी सोच को देखते हुये मीडिया ने मेरी तुलना आमिर सर से करनी शुरू कर दी थी।

तनु वेड्स मनु को कैसे देखती हैं ?

यह शायद पहली बार हुआ कि किसी फिल्म की नायिका शराब पीती है लड़कों को घुमाती है उनके साथ फ्लर्ट करती है। उसे लाइफ में हमेशा थ्रिल चाहिये होता है । पहले फिल्मों में ऐसी लड़कियां वैंप होती थी । लेकिन निर्देशक आनंद राय का अपना अंदाज हैं हमेशा वह रीयल लोकेशसं पर शूट करते हैं । उन्होंने नायिका को ऐसे पेश किया जिसमें ढेर सारी खामियां थी बावजूद इसके वह दर्शकों को काफी पंसद आई । और अब तो यह इन्डस्ट्री का ट्रैंड बन चुका है ।

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फिल्म के पार्ट टू में तो आपने दोहरी भूमिका निभाई है ?

इन दोनों भूमिकाओं को लेकर मेरी एक कशमश रही है, क्योंकि तनु की अपेक्षा दत्तो को ज्यादा प्रशंसा हासिल हुई । इसलिये मेरी कोशिश रही कि मैं ऐसा क्या करूं कि बेचारी तनु की तरफ भी एटेन्शन हो। लेकिन इस बार दोनों भूमिकायें निभाते हुए बहुत ही आंनद आया ।

आपने भी कुछ ऐसी फिल्में की हैं, जिन्हें महिला प्रधान फिल्में कहा जाता है ?

एक वक्त कोई सोच भी नहीं सकता था कि कभी इस पुरूष प्रधान फिल्म इन्डस्ट्री में नायिका प्रधान फिल्म बनाने की कोई हिम्मत करेगा । लेकिन न सिर्फ यह फिल्में बन रही हैं बल्कि हिट भी हो रही हैं। यही नहीं आज फिल्मों में भारी बदलाव आ चुका है, कहानीयों में बदलाव आ गया है । सबसे अहम् बात की सबसे ज्यादा दर्शक में बदलाव आया है। इसीलिये आज यहां हर तरह की फिल्में बन रही हैं और उन्हें पसंद किया जा रहा है ।

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इतनी फिल्में करने के बाद भी आज आपको क्वीन फेम कहा जाता है ?

मेरे लिये यह गर्व की बात हैं कि मेरे हिस्से में एक ऐसी फिल्म आई जिसे लोग आज भी नहीं भूल पा रहे हैं और उसे मेरे साथ जोड़ते हुये मेरे बारे में बात करते हैं । मुझे भी क्वीन की भूमिका बेहद पसंद है । एक ऐसी सीदी सादी कमजोर और दबी हुई सी लड़की जिसे कभी बाहर की दुनियां देखने का अवसर नहीं मिला और एक दिन उसे अकेले दिल्ली से पेरिस और एम्सटर्डम तक सफर करना पड़ता है। इस यात्रा के दौरान उसमें कितना बदलाव आता है। यह सब उस भूमिका की हईलाईट थी ।

तनु और दत्तो से आपकी निजी जिन्दगी किस हद तक मिलती है ?

दोनों का कुछ न कुछ मुझ में भी है । जैसे तनु की तरह मैं भी एक हद तक आजाद ख्यालों की हूं । दत्तो की तरह मुहंफट तो नहीं लेकिन एक हद तक साफगोह जरूर हूं । मैने बचपन से ही अपनी शर्तो के साथ जीना सीखा है ।

Kangna

अब तो आप लेखिका भी बन गई हैं ?

लिखने का शौक मुझे बचपन से ही रहा है । मैं बचपन में कविता, शेरो शायरी तथा छोटी छोटी कहानियां लिखती रही हूं। जब मुझे क्वीन के कुछ संवाद लिखने का मौंका मिला, उसके बाद उत्साहित हो, मैने यू एस ए जाकर न्यूयार्क फिल्म एकेडमी से विधिवत राइटिंग कोर्स किया ।

अभिनय, लेखन । इसके आगे और क्या ?

आगे मैं फ्रांस जाकर बैंकिंग कोर्स करना चाहती हूं । मैं अच्छी कुक हूं लेकिन मैं एक्सपर्ट कुक बनाना चाहती हूं । वह अलग बात है कि व्यस्तता के चलते खाना बनाना तो दूर, मुझे चाय तक बनाने का वक्त नहीं मिल पाता । वैसे मैं फिश करी और मटन कोफ्ते बनाने में एक्सपर्ट हूं ।

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