INTERVIEW!! ‘‘कस्तूरी पूरी तरह से डिग्लैमराइज किरदार है..’’ – मीनाक्षी दीक्षित

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पिछले छह वर्षों से दक्षिण भारतीय भाषाओं तेलगू,कन्नड़,तमिल व मलयालम के सिनेमा में व्यस्त अभिनेत्री मीनाक्षी दीक्षित मूलतः उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर की रहने वाली हैं.उनके सारे रिश्तेदार लखनऊ, कानपुर व रायबरेली में बसते हैं.मीनाक्षी दीक्षित के चेहरे में माधुरी दीक्षित का अक्स नजर आता है.यही वजह है कि जब माधुरी दीक्षित ने फिल्मकार कुंदन शाह की फिल्म ‘‘पी से पी एम तक’’में वेश्या का किरदार निभाने से इंकार कर दिया, तब कुंदन शाह ने अपनी इस फिल्म में वेश्या कस्तूरी की भूमिका निभाने के लिए मीनाक्षी दीक्षित को जोड़ा. अब जबकि यह फिल्म रिलीज होने जा रही है, तो मीनाक्षी दीक्षित अपनी बाॅलीवुड की इस पहली फिल्म को लेकर काफी उत्साहित हैं।

आपने अभिनय को कैरियर बनाने की बात कब सोची थी?

यदि मैं यह कहूं कि तकदीर ने मुझे अभिनेत्री बना दिया, तो कुछ भी गलत नहीं होगा. मैं लखनऊ के ब्राम्हण परिवार की लड़की हूं, जहां फिल्मों का कोई माहौल नहीं था। मेरे पिता जाने माने एडवोकेट हैं. मेरा एक भाई व बहन साॅफ्टवेयर इंजीनियर है. पर घर का माहौल बहुत ज्यादा दकियानूसी नहीं था. इसके चलते मुझे पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया. मैंने लखनऊ में दयावती मोदी स्कूल से स्कूली पढ़ाई पूरी की.बाद में कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की.पढाई के दौरान स्कूल व काॅलेज में डांस और गायन के साथ साथ दूसरी सांस्कृतिक गतिविधियों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया करती थी.स्कूल में तो मैं बहुत चर्चित थी.इसके बाद मैं कुछ सहेलियों के साथ मुंबई घूमने आयी थी। यहां मजाक मजाक में मैंने डांस के रियालिटी शो ‘‘नच ले विथ सरोज खान’’ के लिए आॅडीशन दे दिया. इस शो में मेरा चयन हो गया.जब मैंने इस बात की जानकारी अपने माता पिता को दी, तो वह बहुत नाराज हुए.बड़ी मुश्किल से मैं उन्हें मना पायी.इस शो से मुझे काफी शोहरत मिली. इस शो को मेरे माता पिता के साथ ही सभी रिश्तेदारों ने देखा. तो उन्हें लगा कि अच्छा काम कर रही हूं. इसलिए नाराजगी दूर हो गयी।
इस रियालिटी शो की पाॅपुलारिटी के ही चलते मुझे तेलगू फिल्म ‘लाइफ स्टाइल’ में अभिनय करने का मौका मिला. उसके बाद से अब तक मैं दक्षिण भारत की तमिल, तेलगू, कन्नड़ व मलयालम भाषाओं की 11 फिल्में कर चुकी हूं।

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डांस शो ‘नच ले विथ सरोज खान’ तो काफी लोकप्रिय था. पर आपको हिंदी फिल्मों की बजाय दक्षिण की फिल्मों के आॅफर मिले?

सच तो यह है कि मेरे पास हिंदी सीरियल और हिंदी फिल्मों के भी आॅफर आ रहे थे. पर मैं सिर्फ फिल्म या सिर्फ अभिनय करने के लिए किसी फिल्म से नहीं जुड़ना चाहती थी. मैं अच्छे बैनर की फिल्म में अच्छे किरदार को निभाते हुए अपना कैरियर शुरू करना चाहती थी.मुझे यह मौका तेलगू फिल्म ‘लाइफ स्टाइल’ में मिला, तो मैंने भाषा की बंदिश को नजरंदाज करते हुए ‘लाइफ स्टाइल’ कर ली।

 क्या आपने अभिनय की कोई ट्रेनिंग भी ली?

जी नहीं! सच कह रही हूं. जब मैंने पहली तेलगू फिल्म साइन की थी, उस वक्त मैं खुद नहीं समझ पा रही थी कि मैं अभिनय कर पाऊंगी या नहीं. मैंने कभी थिएटर नहीं किया था. एक्टिंग की कोई ट्रेनिंग नहीं ली थी. मुझे यह तो पता था कि मैं अच्छी डांसर हूं और मेरे गले में अच्छा सुर है.पर अभिनय कर पाऊंगी, इसका कोई अहसास नहीं था. लेकिन मुझे लगता है कि अभिनय प्रतिभा मेरे अंदर है. दक्षिण के निर्देशकों ने उसें पाॅलिश कर बाहर निकाला।

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पर हिंदी फिल्मों तक पहुंचने में आपको छह साल का वक्त क्यों लग गया?

देखिए, हिंदी मेरी मातृभाषा है.तो मेरे अंदर बात बार बार यह बात हिलौरे मार रही थी कि मुझे अपनी मातृभाषा में काम करना चाहिए. लेकिन मैं हिंदी फिल्मों में कोई छोटा मोटा किरदार नहीं निभाना चाहती थी. दक्षिण में मुझे हीरोइन के रूप में काम मिल रहा था. बडे़ बैनरों में काम कर रही थी. इसके साथ साथ यह सच है कि वहां मुझे भाषा को लेकर बहुत समस्या आ रही थी.पर मैं मेहनत कर रही थी.भाषा को लेकर मेरा स्ट्रगल जारी था.पर जिस तरह के अच्छे किरदार की मुझे तलाश थी, वह मिल नहीं रहे थे.जैसे ही मुझे कुंदन शाह की फिल्म ‘पी से पीएम तक’ का आॅफर मिला, मैंने तुरंत स्वीकार कर ली. मैंने इस फिल्म में एक वेश्या कस्तूरी का किरदार निभाया है. मैं अपने आपको खुशनसीब समझती हूँ कि मुझे कुंदन शाह ने अपनी इस फिल्म के साथ जोड़ा।

 फिल्म ‘पी से पी एम तक’ करने की वजह क्या रही?

मैं बाॅलीवुड में अपने कैरियर की पहली फिल्म में एक बडा भयानक और खतरनाक किरदार निभाने जा रही थी, जिसे कोई भी अभिनेत्री दस पंद्रह फिल्में करने या शोहरत बटोरने के बाद करने का साहस जुटाती है. इस तरह की फिल्म करने के लिए कलाकार के तौर पर हिम्मत चाहिए. फिर कुंदन शाह महज निर्देशक नहीं हैं, वह तो अपने आप में इंस्टीट्यूट हैं. मुझे कुंदन शाह के निर्देशन में काम करने का मौका मिल रहा था. सच कहूं तो जब उन्होंने मुझे अपनी फिल्म से जोड़ा, तो मुझे यकीन भी नहीं था कि वह मुझे वास्तव में अपनी फिल्म की हीरोइन बना रहे हैं. मुझे पता है कि वह हमेशा थिएटर से जुडे़ या प्रतिष्ठित कलाकारों को ही अपनी फिल्म से जोड़ते रहे हैं. मेरी नजर में तो अचानक मुझे ‘कोहिनूर का हीरा’ मिल गया।

आपने कस्तूरी के किरदार को निभाने के लिए क्या तैयारी की?

सबसे पहले तो कुंदन शाह ने मेरा वर्कआउट बंद करवाया. मैं दुबली पतली थी.उन्होने कहा कि मैं थोड़ी मोटी हो जाऊं. मुझे अपना वजन बढ़ाना पड़ा.उसके बाद मैं रेड लाइट एरिया यानी कि मुंबई के कमाठीपुरा गयी. वहाँ पर कुछ वेश्याओं से मिली.उनके साथ चाय पी. उनके हावभाव बाॅडी लैंग्वेज को पकड़ने की कोशिश की.लुक डस्टी लगे,इसके लिए धूप में चली.वह नहीं चाहते थे कि मैं परदे पर बहुत खूबसूरत नजर आऊं. फिल्म के अंदर मेरा मेकअप भी बहुत चेंज किया गया है. डस्टी मेकअप है. कई वेश्याओं की दर्दनाक कहानियां सुनी. उन्हें रोते हुए देखा. उनके दर्द को महसूस किया. उनकी दर्द भरी कहानियां सुनकर रोंगटे खडे़ हो गए थे.उनकी दर्दनाक जिदंगी को मैंने बहुत करीब से जाकर देखा. यह सब मेरे वर्कशॉप का हिस्सा था. काॅस्ट्यूम पर काम किया. बहुत सस्ते कपडे़ पहने हैं, जिन्हें आप सड़क छाप कपडे़ कह सकते हैं. पूरी तरह से यह एक डि ग्लैमराइज किरदार है।

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तो क्या इस फिल्म में समाज सुधार की बात कही गयी है?

यह एक हास्य प्रधान व्यंगात्मक फिल्म है. इसमें कहीं कोई भाषणबाजी नहीं है. फिल्म में असलियत पेश की गयी है. दो सौ रूपए के लिए अपना शरीर बेचने वाली वेश्या कस्तूरी एक मुकाम पर गलत ढंग से कमाए गए पचास करोड़ रूपए भी ठुकरा देती है. फिल्म के अंदर कई संदेष है, जिन्हें फिल्म देखते समय समय दर्शक समझ सकेगा. पर मनोरंजन भी भरपूर है।

इस फिल्म की षूटिंग करने के अनुभव क्या रहे?

कई तरह की समस्याएं आयी. हमने हर बात को सकारात्मक तरीके से लिया. जिंदगी तो समस्याओं से भरी होती है. कुंदन शाह के साथ हमने काफी मेहनत के साथ काम किया. इस फिल्म में काम करना मेरे लिए एक जंग लड़ने जैसा रहा. पर मैं पूरी जिंदगी कुंदन शाह की अहसान मंद रहूंगी. उन्होेंने मुझे आंतरिक रूप से काफी बदला.मेरी सोच व मेरे परसेप्शन में बदलाव आया.अब अभिनय, सिनेमा और अपने आप के प्रति भी मेरा नजरिया काफी बदल गया है।

 कोई दूसरी फिल्म..?

दक्षिण भारत में 2015 में मेरी तीन फिल्में रिलीज होने वाली हैं. जहां तक हिंदी का सवाल है, तो अभी ‘पी से पीएम तक’ को लेकर ही मैं ज्यादा सोच रही हू. दो फिल्में साइन की है, पर उनके बारे में अभी से बात करना ठीक नहीं रहेगा. मैं एक फिल्म संजय पूरण सिंह चैहाण के साथ भी कर रही हूं। कुछ फिल्मों के आॅफर हैं।


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Mayapuri

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