नाना पलसीकर मेरी कहानी मुझसे सुनो

1 min


304924

 

मायापुरी अंक 15.1974

एक फिल्म आई थी ‘कानून। इस फिल्म में नाना पलसीकर ने एक चोर की भूमिका अभिनीत की थी, जिसके लिए वे पुरस्कृत भी किए गए थे। पिछले वर्ष एक फिल्म प्रदर्शित हुई ‘प्रेम पर्वत’ आलोचकों ने नाना के अभिनय के बारे में लिखा कि नाना ने लाजवाब अभिनय पेश किया है नाना इस फिल्म के हीरो थे।

नाना से मुलाकात हुई तो मैंनें तुरंत कहा, ‘आप बरसों से फिल्म उद्योग में है, अपने साथियों के बारे में कुछ खास खास बातें बताइए न ?

नाना ने बड़े प्यारे अंदाज में मेरी ओर देखा, फिर बोलो, ‘क्या सुनोगे ?‘जो आपकी मर्जी चाहे बताइए, अपने साथियों के बारे में कहिए। ‘ठीक है मैं तुम्हें अशोक कुमार के बारे में बताता हूं, फिल्मी दुनिया में मेरे पहले फैन है। ‘अच्छा’

‘अशोक कुमार से मेरी मुलाकात सन 37 या 38 में हुई थी। ‘कहा? ‘बाम्बे टॉकिज में, उन दिनों मैं बांम्बे टॉकिज की फिल्म ‘दुर्गा’ में काम कर रहा था।

‘और अशोक कुमार भी तो वही एक्टिंग किया करते थे ‘जी नही ‘जी नही वे एक्टर तो बाद में बने, पहले वहां लेबोट्री में टेक्निशियन थे।

‘टेक्निशियन ?

‘जी हां आपको एक खास बात बताता हूं उन दिनों वहां का सारा कारोबार अंग्रेजी तरह से होता था।‘वह कैसे नाना साहब ?

अच्छा तब तो सब बहुत परिश्रम करते होगें। जी हां। और अशोक कुमार ने मेरे अभिनय के रशेज देखे। मेरा अभिनय उन्हें इतना पसंद आया कि रशेज देखने के बाद वे सीधे मेरे पास आये, मुझे मुबारकबाद दी और कहा, आप एक महान एक्टर है। मैं तो शर्म से घट गया। मैंने अशोक कुमार से कहा, अशोक साहब मुझे इतना बड़ा मत बनाइए, बस यही से हमारी दोस्ती का श्री गणेश हुआ, जो वक्त के साथ-साथ बढ़ रही है। और आज हम एक दूसरे के बहुत ही करीब और गहरे दोस्त है।

‘यह तो बड़ी अच्छी बात है। ‘एक मजे की बात बताऊं ? बताइए।

‘उन दिनों अशोक कुमार मेरे फैन थे और आज मैं उनका फैन हूं। अशोक कुमार अपनी मेहनत, और कबिलियत और फैन के बल पर किस जगह है, यह तो सारी दुनिया जानती है। मुझे यह कहने में कोई संकोच नही कि अशोक कुमार का शुमार न सिर्फ भारत के बल्कि दुनिया के बेहतरीन एक्टरों में हो सकता। बेशक नाना साहब।

‘अशोक कुमार की ही तरह मेरा दूसरा साथी है सुनील दत्त जो किसी जमाने में रेडियो से संबन्धित थे। सुनील से मेरी पहली मुलाकात फिल्म ‘दो बीघा जमीन’ की रिलीज के वक्त हुई। वह एक रेडियो प्रोग्राम के सिलसिले में मेरे पास आया था और मेरा इंटरव्यू भी लिया था। अच्छा।

‘जी फिर रमेश सहगल की फिल्म ‘रेलवे प्लेटफॉर्म में पहली बार हमने एक साथ काम किया था। ‘रेलवे प्लेटफॉर्म, यह तो शायद सुनीलदत्त की पहली फिल्म थी न

‘जी हां और इसीलिए शूटिंग के दौरान सुनीलदत्त बहुत नर्वस था। मैंने सुनील का हौसला बढ़ाया। अपने तजुर्बों के बारे में उसे बताया। और जल्द ही हम दोनों को एक साथ काम करने का मौका नही मिला बरसों बाद ए.बी. एम.की पहली फिल्म मैं चुप रहूंगी और फिल्म गुमराह बनी, और हम दोनों फिर इकट्ठे हो गये। मगर मैं सुनील की तरक्की की राह पर बढ़ता हुआ देख कर बहुत खुश होता।

‘अच्छा, तो आपको सुनील दत्त का अभिनय बहुत पसंद आता है। ‘हां, लेकिन कभी-कभी नही, जैसे ‘मदर इंडिया रिलीज हुई तो लोगों ने सब ने सुनील के अभिनय की बहुत प्रशंसा की। वैसे सुनील ने मेहनत भी बहुत की थी, मगर मेरे ख्याल में जो काम पुरानी ‘मदर इंडिया यानी ‘औरत’ में याकूब ने किया था, वह सुनील नही कर सका।

‘क्या यह बात आपने सुनील दत्त को बतायी थी मैंने पूछा। नाना बोले, ‘जी हां और जानते सुन कर सुनील ने क्या कहा’

क्या कहा ? मैनें पूछा तो नाना ने जवाब दिया,

‘सुनील ने मुझसे कहा, ‘मुझसे यकीन है एक दिन आयेगा, जब आप मेरे काम से खुश हो जायेंगे।

नाना साहब फिर आप सुनील के काम से खुश हुए

‘बिल्कुल, फिल्म ‘मुझे जीने दो’ देखने के बाद मैंने महसूस किया कि सुनील जितना अच्छा एक्टर है। उतना ही अच्छा निर्देशक है और उतना ही अच्छा प्रोड्यूसर भी, मैंने रेशमा और शेरा’ भी देखी, बहुत अच्छी लगी। मैं तो हमेशा भगवान से प्रार्थना करता हूं कि वह सुनीलदत्त को बहुत तरक्की दे। कामयाबी दे।

‘और आपकी प्रार्थना भगवान ने सुन ली। आज सुनीलदत्त व्यस्ततम कलाकार है। लगभग 60-70 फिल्मों में वे अभिनय कर रहे है।

‘यह सब प्रभू इच्छा’ है।

‘नाना साहब, अब किसके बारे में बता रहे है

‘ओम प्रकाश के बारे में, जिसमें हिंदुस्तानी फिल्मों का सर्वश्रेष्ठ कॉमेडियन मानता हू।

‘ओम प्रकाश के बारे में, जिसमें हिन्दुस्तानी फिल्मों का सर्वश्रेष्ठ कॉमेडियन मानता हूं।

‘ओम प्रकाश जी से आपका परिचय कैसे हुआ?

‘ओम प्रकाश से में पहली बार रमेश सहगल की फिल्म ‘फिर सुबह होगी’के प्रीमियर पर मिला था, वहां बहुत सारे लोग आये थे। गैर फिल्मी मेहमान भी थे। और फिल्मी सितारे भी। मगर वहां ओमप्रकाश की नजरें किसी फिल्मी सितारे या किसी बड़ी हस्ती को नही ढूंढ रही थी।

‘अच्छा, तो फिर किसे ढूंढ रहे थे वे ? आपका मतलब है

मेरा वाक्य पूरा होने से पहले नाना बोले।

‘जी हां लेकिन क्या बताऊं मुझे देखते ही ओम प्रकाश बड़े जोर से चिल्लाये। मेरे पास आये और मुझे गले लगा लिया। फिर कहा बैठ जाओ नाना? फिर जेब से एक दस रूपये का नोट निकाला और मेरे बारे में अपनी राय लिखकर वह नोट मुझे दे दिया, जो आज तक मेरे पास महफूज है। ‘बतौर यादगार के’

‘जी हां, यादगार के तौर पर भी और हमारी दोस्ती की शुरूआत के तौर पर भी।

‘नाना जी ओम प्रकाश के बारे में आपाकी व्यक्तिगत राय क्या है?‘ओम प्रकाश यारों का यार है। आदमी नही हीरा है और वह भी बहुत भारी।

‘वाह क्या खूब तुलना की है आपने।

‘आपने ओम प्रकाश की फिल्में ‘खानदाना और ‘दस लाख’ तो देखी होगी? जी हां दोनों में उनका अभिनय लाजवाब था।

‘और उन दिनों तो उन्होनें एक के बाद एक फिल्मों में शानदार अभिनय पेश करके यह साबित कर दिया कि वे भी प्रथम श्रेणी के कलाकार है। ‘बिल्कुल सच कहा है आपने’‘और कुछ’ जी ‘नही शुक्रिया’

और इस शुक्रिया के साथ ही मैंनें नाना से विदा ली।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये