INTERVIEW!! ‘‘मैं सिर्फ अभिनय करना चाहता हूं..’’ – जिम सर्भ

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फिल्म ‘‘नीरजा’’ में खूंखार आतंकवादी खलिल का किरदार निभाकर रातों रात स्टार बन जाने वाले कलाकार जिम सर्भ मूलतः थिएटर कलाकार हैं। ‘नीरजा’ उनकी पहली प्रदर्शित फिल्म है मगर वह इस फिल्म से पहले ‘अजीब आशिक’ और ‘यशोधरा’ जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। इनमें से ‘यशोधरा’ अधूरी पड़ी है, जबकि ‘अजीब आशिक’ कई साल पहले पूरी हो गयी थी मगर जिम सर्भ के अनुसार ‘अजीब आशिक’ के रिलीज होने की कोई उम्मीद नहीं है। बहरहाल, फिल्म ‘नीरजा’ के प्रदर्शन के बाद से वह जमकर तारीफ बटोर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अब उन्हें कोंकणा सेन शर्मा निर्देशित फिल्म ‘डेथ इन द गंज’ के प्रदर्शन का बेसब्री से इंतजार है, जिसमें उन्होंने खलिल से बिल्कुल विपरीत किरदार निभाया है।

अपनी अब तक की अभिनय यात्रा को लेकर क्या कहेंगे ?

मैं पारसी हूँ मेरा जन्म, शिक्षा दीक्षा वगैरह मुंबई में ही हुआ मैं बचपन से ही अभिनय के अलावा कुछ और करना ही नहीं चाहता था मेरे पिता पहले मर्चेंट नेवी में कैप्टन थे फिर उन्होने ऑस्ट्रेलिया में रीयल स्टेट एजेंट के रूप में काम किया फिर उन्होने कंटेनर डिवलप करने का काम शुरू किया मेरी मां फिजियो थेरेपिस्ट थीं मेरी मां ने फिजियोथेरेपिस्ट की पढ़ाई की और बहुत कम समय के लिए ही प्रैक्टिस की।

अभिनय की प्रेरणा कहां से मिली ?

मुझे भी नहीं पता स्कूल व कॉलेज में अभिनय ही करता रहा मेरी स्कूली शिक्षा ‘‘अमरीकन स्कूल ऑफ बॉम्बे’’ में हुई। अटलांटा की अमरी यूनिवर्सिटी से मैंने स्नातक की डिग्री हासिल की। जहां अंडरग्रेज्युएट होते ही हमें प्रोफेशनल के साथ नाटकों में काम करने का अवसर मिला। हर नाटक में आधे विद्यार्थी और आधे प्रोफेशनल होते थे इस तरह हमें बहुत अच्छी ट्रेनिंग मिली।

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थिएटर में किसके साथ जुड़े ?

पहले मैं अटलांटा में ही ‘‘लायन थिएटर’’ के साथ नाटकों में अभिनय करता रहा। यह बहुत बड़ा नाट्यग्रुप है और मैं यहां पहले कुछ साल नीचे का ट्रेनी था। मुझे सब्जेक्ट पर रिसर्च मैटेरियल इकट्ठा करना, सेट बनाने सहित हर काम को करना पड़ता था मैं नाटक के लिए कलाकार भी तय करता था तो दूसरी तरफ मैं अभिनय भी कर रहा था मैं अटलांटा में कइयों से परिचित हो चुका था तो वह मुझे अपने नाटकों में अभिनय करने का अवसर देते थे कॉलेज से बाहर निकलने के बाद मैंने पहला नाटक ‘‘आइस ब्लेंड’’ किया था और इस पहले नाटक के लिए ही मुझे सपोर्टिंग एक्टर का अटलांटा अवॉर्ड भी मिल गया था पर कुछ दिनों बाद मुझे लगा कि मेरे लिए अटलांटा में कोई जगह नहीं है मेरी सही जगह तो भारत में है मैं यहां क्या कर रहा हूं। इस बात का अहसास होते ही मैं वापस मुंबई आ गया।

मुंबई में अभिनय करियर की शुरूआत कहां से हुई ?

थिएटर से हुई नरेश के साथ अंग्रेजी नाटक ‘‘ओके टाटा बाय बाय’’ किया था। सुनील शानबाग, अलिक पद्मशी और अतुल कुमार के साथ नाटक किया जिसमें से सबसे ज्यादा चर्चित नाटक रहा – ‘‘नॉएज आफ’’ इसके बाद मेरे लिए सब कुछ बहुत आसान हो गया था। 15 से अधिक नाटकों के सौकड़ों शो में अभिनय कर चुका हूं। नाटकों में अभिनय करते हुए फिल्में मिली और मेरी फिल्म ‘‘नीरजा’’ में मेरी परफार्मेंस को काफी पसंद किया जा रहा है।

‘‘नीरजा’’ कैसे मिली थी ?

मुझे ऑडिशन के लिए बुलाया गया था मैं ऑडिशन देने गया और फिल्म के निर्देशक राम माधवानी को मुझमें कुछ पसंद आ गया, तो उन्होंने मुझे इस फिल्म में प्लेन हाइजैकर खलिल के किरदार के लिए चुन लिया। फिर मैंने सोचा कि हाई जैकर क्या होते हैं। उनके दिमाग में उस वक्त क्या कर चल रहा होगा फिर मैंने सोचा कि हाई जैकर भी मेरे जैसे इंसान ही होंगे वह अलग प्रजाति के तो हो नहीं सकते मैने सोचा कि यदि मैं अचानक इस कमरे के अंदर पहुंच जाऊं और सब कुछ अपने कंट्रोल में करने की सोचूं, तो भी कहीं न कहीं अंदर से एक डर तो होगा ही। मेरे दिल की गति बढ़ जाएगी ऐसे में मैं प्लेन में बैठे लोगों की केअर कर रहा हूं, तो इसकी वजह यह है कि मैं अंदर से डरा हुआ हूं यही बात लोगों को पसंद आ रही है।

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आपने खलिल के किरदार को निभाने से पहले कोई रिसर्च वर्क किया था ?

मैंने यह जानने की कोशिश की कि आतंकवादी गुट किस तरह के लोगों को अपने गुट के साथ जोड़ता है तो मुझे कोई खास बात पता नहीं लगी। हां! आतंकवादी संगठन ऐसे लोगों को ही अपने साथ जोड़ता है, जिनकी अपनी कोई जिंदगी न हो वह कहीं आते जाते न हो जिनकी जिंदगी में अकेलेपन के अलावा कुछ न हो। खलिल को लेकर बहुत कुछ उपलब्ध भी नहीं है एक दो तस्वीरें ही हैं तो ऐेसे में मुझे पटकथा पर ही निर्भर रहना पड़ा। मुझे लगा कि खलिल ने बचपन में बहुत हिंसा देखी है और वह एक ट्रॉमा में जी रहा है इसलिए खलिल एक सायकोपैथ है। वह बाकी हाईजैकरों से थोड़ा सा अलग रहता है जब वह किसी को गोली मारता है, तो उस वक्त चेहरा एकदम सपाट होता है जब किसी को गोली मारना हो, तो उसे गुस्से की जरुरत नहीं होती है। उस वक्त उसे लगता है कि मैं अपने काम को अंजाम दे रहा हूं।

आपके अनुसार खलिल क्या है ?

वह ऐसा पात्र है, जिससे उसके साथ के सह आतंकी भी डरते हैं यह क्रूर आतंकी है।

फिल्म ‘‘नीरजा’’ की रिलीज के बाद किस तरह का रिस्पांस मिल रहा है ?

बहुत अच्छा उम्मीद से ज्यादा तारीफ मिल रही है नीरजा के भाई अखिल भनोट ने मेरे फेसबुक वॉल पर लिखा- ‘‘बहुत बेहतरीन परफार्मेंस कई दृश्यों में मुझे लगा कि मैं तुम्हे पकड़कर गोली मार दूं, लोग तारीफ कर रहे हैं पर हर किसी को याद रखना चाहिए यह वास्तविक घटना थी लोगों के साथ यह सब वास्तव में घटा था, जिसे मैंने कल्पना कर परदे पर साकार किया ऐसे में दर्शकों के बीच बैठकर किसी को अपनी बहन को मौत के घाट उतारते देखना आसान नहीं हो सकता। फिल्म इंडस्ट्री के लोग भी काफी तारीफ कर रहे हैं।

कोई दूसरी फिल्म भी कर रहे हैं ?

कोंकणा सेन शर्मा के निर्देशन में फिल्म ‘‘डेथ इन द गंज’’ कर रहा हूं, इसकी शूटिंग करके लौटा हूं इसके अलावा एक और फिल्म है जिसकी शूटिंग नौ मार्च से शुरू करुंगा पर इस फिल्म के बारे में कोई बात नहीं कर सकता इसके अलावा कुछ नए आफॅर मिले हैं, जिनकी पटकथाएं अभी पढ़ रहा हूं।

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‘‘डेथ इन द गंज’’ में किस तरह का किरदार निभा रहे हैं ?

खलिल के एकदम विपरीत बहुत प्यारा और मीठा इंसान जिसके अपने दोस्तों का एक ग्रुप है लोग उसका फन करते हैं उसे पानी में ढकेल देते हैं, छोटे शहर का एंग्लो इंडियन है।

आपको अपना करियर किस दिशा में जाता हुआ नजर आ रहा है ?

पता नहीं मैं तो हर तरह की फिल्म या नाटक आदि में सिर्फ अभिनय करना चाहता हूं।

बॉलीवुड में बहुत कम पारसी कलाकार हैं आपको उम्मीद थी कि लोग आपको स्वीकार करेंगे ?

जी हां! क्यों नहीं करेंगे मेरे मन में कभी शक नहीं हुआ कि लोग मुझे स्वीकार नहीं करेंगे।

किस कलाकार के फैन हैं ?

नवाजुद्दीन सिद्दिकी, इरफान खान, राधिका आप्टे, कल्की आदि।


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Mayapuri

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