मेरी मम्मी किसी से नही डरती – नीतू सिंह

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मायापुरी अंक 43,1975

फिल्मालय स्टूडियो में नीतू सिंह ‘परवरिश’ की शूटिंग कर रही थीं। हम भी वहां पहुंच गए। वे जरा फ्री हुईं तो हमने उन्हें जा घेरा। उन्होंने तुरंत इधर-उधर देखा जैसे किसी को ढूंढ रही हों। हमने कहा,

भई किसी तलाश है?

मम्मी को देख रहीं थी नीतू किसी मासूम बच्ची की तरह बोलीं।

हां, मैं यह भूल गया था कि आप आजकल मम्मी के बिना किसी को इंटरव्यू नहीं देती। यह किसी डॉक्टर ने कहा है या मम्मी की हिदायत है? हमने हंसते हुए पूछा।

“साहब यह भी बड़ी मजबूरी है, अकेलें अगर पत्रकारों से बातें करो तो ऐसे बाल की खाल निकाल कर प्रश्न करेंगे कि आदमी ‘बोर’ हो जाए और कुछ लोग जान बूझकर ऐसे प्रश्न कर के उत्तेजित कर देते हैं ताकि गुस्से में कोई ऐसी बात निकलवा सकें जो उछाली जा सके। इसलिए मैं अकेले बात करते हुए डरने लगी हूं” नीतू सिंह ने बताया।

लेकिन मम्मी हों या न हों जो कुछ पूछना है वह तो लोग जब भी पूछेंगे। अगर आप जवाब नही देंगी तो लोग और ज्यादा बातें उछालेंगे ! क्या आप यह नही जानतीं? हमने कहा।

जानती हूं इसीलिए मम्मी को साथ रखती हूं। उन्होंने दुनिया देखी हैं। अगर कोई बुरी नीयत से प्रश्न करता है तो वह स्वयं उसका जवाब दे देती हैं और मुझसे अगर कोई गलत बात निकल जाए तो टोक देती हैं। डर पत्रकारों का ही नहीं फिल्म वालों का भी है। कुछ ऐसे लोग भी हैं जो स्वयं अपने बारे में गॉसिप लिखवाते हैं। और इस के लिए वह हीरोइनों के आगे पीछे रहते हैं ताकि लोगों को देखने पर दाल में काला लगे और वह फिर बात का बतगंड़ बनाकर ‘पब्लिसिटी’ पा सकें। नीतू सिंह ने अपने डरने का कारण बताते हुए कहा।

ऐसे कौन से हीरो हैं? हमने पूछा।

“कही आपकी मम्मी तो नही डरती हैं इन हीरो लोगों से क्योंकि वह तो स्वयं साये की तरह आपसे चिपकी रहती है।“

वह किसी से नही डरतीं उन्हें मुझ पर पूरा-पूरा विश्वास है। इंडस्ट्री में सभी तरह के लोग हैं। मुझे किसा का नाम नहीं लेना क्योंकि ऐसे लोग आपसे छिपे थोड़े ही होंगे। और आप उन्हें भी जानते होंगे जिनके साथ कोई भी काम करे वह उस की बराबर इज्जत करते हैं और प्रोत्साहन भी देते हैं। नीतू सिंह ने बताया। दरअसल मेरी मम्मी से ऐसे ही लोग जलते हैं जिनके मन में खोट होता है।

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Mayapuri