‘पहले अफेयर, फिर लिव इन रिलेशनशिप, उसके बाद शादी’’ – राधिका आप्टे

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मराठी तथा इंगलिश थियेटर से जुड़ी राधिका आप्टे ने शोर इन द सिटी, रक्तचरित्र तथा बदलापुर आदि हिन्दी फिल्मों से अपना फिल्मी करियर शुरू किया । राधिका एक पढ़ी लिखी आजाद ख्याल लिबरल फैमिली से ताल्लुक रखती लड़की है। शायद इसीलिये  अति बोल्ड फिल्म ‘हंटर’ भी उसके लिये उसकी अन्य फिल्मों की तरह ही रही । फिल्म को लेकर उससे एक बातचीत ।

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फिल्म में आपकी भूमिका क्या है ?

मैं यानि तृप्ति जो पूना के एक मध्यम क्लास परिवार की एक सिंपल सी काम काजी लड़की हैं। जिसका मुबंई आने के बाद मंदार पोंगशे नामक शख्स के साथ प्यार हो जाता है । जबकि वो उसके बारे में कुछ भी नही जानती ।

हंटर जैसी बोल्ड फिल्म करने की कोई खास वजह ?

मुझे सबसे अच्छी बात लगी इस रोल की सिंपलीसिटी । जिसने मुझे काफी प्रभावित किया । हालांकि  इन बातों का आज कोई मूल्य नही, जबकि यही चीजें हमारे लिये सबसे कीमती चीज होती है ।

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क्या यह सेक्स कॉमेडी है ?

बिलकुल नहीं । मुझे लगता है फिल्म के ट्रेलर  में एडल्ट भाषा देखते हुए दर्शकों ने खुद ही अंदाजा लगा लिया कि यह सेक्स कॉमेडी  है । दरअसल फिल्म का हीरो मंदार पोगंशे बेसिकली अमोल पालेकर टाइप आम सा शख्स है जो कमिंग एज में है। दूसरे एक वक्त किशोर अवस्था में हर लड़की और लड़के के हारमोंस चेंज होते हैं इसके  बाद मेल फीमेल में एक दूसरे के प्रति आकर्षण पैदा होता है ,इसके बाद अफेयर  और रिलेशनशिप आदि चीजों का इन्हें मतलब पता चलता है । मंदार की जर्नी इन्हीं सब बातों को लेकर है । उसमें बचपन से ही लड़कियों की तरफ अट्रैक्ट होने का नशा है लेकिन वह किसी भी लड़की से कमिटमेंट नहीं करता । ऐसे ढेर सारे लोग हमारे आस पास होते हैं इनमें से कितनों को हम पर्सनली जानते भी हैं ।

फिल्म के निर्देशक हर्षवर्धन कुलकर्णी के ये पहली फिल्म हैं?

बेशक हर्षवर्धन की यह पहली फिल्म हैं लेकिन उन्हें अपने पर बहुत ही कांफिडेंस था। उन्होंने स्क्रिप्ट के मुताबिक ही कलाकारों को सलीके  से कास्ट किया । जंहा तक फिल्म के जॉनर की बात है तो ये एक फनी फिल्म है। मैं ऐसा इसलिये कह रही हूं क्योंकि यहां पात्र इतने वास्तविक हैं कि उनके जो ड्रॉबेक्स है जो रिजेक्शन हैं  उन्हें भी उतना ही सरल दिखाया गया है।

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फिल्म में वो सब है जो किसी अबनार्मल फिल्म में होता है ?

अबनार्मल फिल्म से अगर आपका तात्पर्य एडल्ट है तो हम तो शुरू से  फिल्म को एडल्ट कहते आ रहे हैं । और ऐसा भी नहीं हुआ कि सेंसर ने फिल्म को जानबूझ कर ‘ए’ सर्टिफिकेट दे दिया हो।  हां अगर सेसंर की बात की जाये तो उसे जिस चीज पर एतराज करना चाहिये था उस पर एतराज न करके उसने उन दृष्यों पर कैंची चलाई जो फिल्म के लिये काफी अहम् थे ।

फिल्म से आपका कैसे जुड़ना हुआ ?

मेरे दोस्त और इस फिल्म के हीरो गुलशन देवईया ने मुझे फिल्म के लेखक निर्देशक से मिलवाया था। उन्होंने मुझे पहले फिल्म की कहानी सनाई, उसके बाद बाउंड स्क्रिप्ट भी दी । मुझे फिल्म के डायरेक्टर की साफगोही बहुत अच्छी लगी क्योंकि उन्होंने शुरू में ही मुझे बता दिया था कि फिल्म डबल मिनिंग नही है, वो जो भी कहती है सीधे कहती है और फिल्म में वो भाषा है उसे वल्गर तरीके से नहीं रखा है ।

आप का किसी फिल्म में काम करने का क्या क्रायटेरिया है ?

अच्छी स्क्रिप्ट, रस्पेक्टिड बैनर तथा अच्छे कोस्टार्स । मुझे बहुत अच्छा लगता है जब मुझे बढि़या एक्टर्स के साथ काम करने का अवसर मिलता है । क्योंकि अपने से बेहतर एक्टर के साथ काम करते हुए ही आपका काम भी बेहतर निकल कर आता है। इस फिल्म में  गुलशन देवईया जैसे बेहतरीन अभिनेता के साथ काम करने के बाद मजा आया गया । वैसे भी गुलशन मेरे रात तीन बजे तक जागने वाले दोस्तों में से एक है ।

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आप स्वंय इतनी आधुनिक हैं या…. ?

मैं एक पढ़े लिखे मां बाप की औलाद हूं । जंहा से मुझे अच्छे संस्कार  मिले  हैं। उन्होंने मेरी लाइफ  को कभी डिस्टर्ब नहीं किया ।  मैं उन दिनों लंदन एक डांस सीखने गई थी वहीं मेरा अफेयर एक ब्रिटिश से  हो गया । बाद में हम कुछ अरसा लिव एन रिलेशनशिप में रहे । इसके बाद हमने शादी कर ली । लेकिन मेरे परिवार ने मेरी खुशी में ही अपनी खुशी जाहिर की ।

आपकी आने वाली फिल्में कौन कौन सी हैं?

एक फिल्म केतन मेहता की ‘माउंटनमैन’ है । दूसरी नीला माथुर की ‘कौन कितने पानी में’ । उस फिल्म में मेरे अलावा कुणाल कपूर और सौरभ शुक्ला हैं । इसके अलावा  लीना यादव की एक  फिल्म है  ।

 


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Mayapuri

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