यहां टैलेन्ट से ज्यादा लक की जरूरत है.. – राम कपूर

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टी.वी. स्टार्स में सबसे ज्यादा पारिश्रमिक पाने वाले एक्टर्स राम कपूर से मुलाकात करते हुए मैंने उनसे पूछा, ‘जब आप पीछे मुड़कर देखते है आप एकता कपूर के सीरियलस में काम करते थे और आज जब आप दिल की बातो के हाइली पेड स्टार है?’

‘मैं तो कहूंगा कि प्रतिभा से ज्यादा इसमें किस्मत का हाथ है सच्चाई तो यह है कि हालाकि मै जानता हूं कि मैं टी. वी. में बहुत पाॅपलुर हूं लेकिन जहां तक फिल्मों का सवाल है मुझे अभी मीलों की दूरी तय करनी है। 1999 से मै टी.वी. सीरियलस में काम करता रहा हूं, मुझे फिल्मों में अच्छे आॅफर्स नहीं मिल रहे थे। मुझे अपने कैरियर के प्रथम पन्द्रह वर्षो में इतने बेकार फिल्मों के आॅॅफर्स मिल रहे थे कि मैंने सिर्फ टी.वी. सीरियल में बने रहना ही मुनासिव समझा।

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‘जरा खुलकर बताइये?’

‘यदि मैं आज बहुत सफल और लोकप्रिय हूं तो यह सिर्फ मेरी प्रतिभा के कारण नहीं हो सकता क्योंकि कोई कुछ भी कहे आज हमारी इंडस्ट्री में ऐसे बहुत से टैलेन्टेड कलाकार है जिन्हें कोई काम नहीं’ मिलता है। मैंने हमेशा अच्छा काम करने की कोशिश की है और हमेशा एक वक्त में एक प्रोजेक्ट करने का लक्ष्य रखा है मैंने बतौर एक्टर सही समय में सही काम करने की कोशिश की है टी.वी. में भी और फिल्मों में भी।

‘कुछ-कुछ लोचा है मैं आपकी क्या भूमिका है?’

‘मैं उसमें एक अमीर व्यवसायी का रोल कर रहा हूं जो मलेशिया में रहता है, इस शख्स को एक बाॅलीवुड स्टार ‘सुनाया’ (सनी लियोन) के प्रति एक अजीबोगरीब पागलपन भरा असेशन है इस फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह वह स्टार इस हैपिली मैरिड बिजनेस मैन, (जिसका एक हैंडसम बेटा भी है) के जीवन में आती है और किस तरह वह आदमी इस खूबसूरत स्टार के चक्कर में आ जाता है।

‘क्या यह सच है कि यह फिल्म साठ के दशक की हिन्दी हिट फिल्म तीन बहुरानियो से प्रेरित है जो दरअसल तमिल फिल्म बामा विजयम का रीमेक था?’

‘जी नही, यह फिल्म साठ के दशक की फिल्म तीन बहुरानियां (जिसमें भी एक पूरे परिवार के शादीशुदा मर्द का एक सुपर स्टार नायिका के प्रति मोह की कहानी थी) से प्रेरित नहीं है।

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‘तो क्या यह फिल्म कुछ-कुछ लोचा है’ कोई सेक्स से भरी स्लीजी फिल्म है?’

‘फिल्म कुछ कुछ लोचा है हरगिज कोई सेक्स से भरी स्लीजी फिल्म नहीं है और इसे छः से साठ साल के बच्चे और एडल्ट देख सकते है। यह फिल्म बलगर फिल्म नही बल्कि क्लीन फैमिली फिल्म है जिसमेें हल्की फुल्की काॅमेडी है। इसमें डबल मीनिंग के डायलाॅग नही है यह स्क्रिप्ट इसके निर्देशक देवांग ढोलकिया के दिल के करीब है।’

‘गुजरात भाषा की ट्रेनिंग वर्कशाप में बोलनी सीखी है।?’

‘यदि शाहरूख खान किसी फिल्म में नार्थ इंडियन का रोल कर रहा है तो क्या उसे पंजाबी टोन में बोलना जरूरी है? इसी तरह मुझे इस फिल्म में मिस्टर पटेल का रोल करते हुए किसी गुजरानी भाषा के वर्कशाॅप में गुजराती सीखने की जरूरत नहीं है क्योंकि मै नार्मल हिन्दी बोलता हूं और इसमें मैने नार्मल हिन्दी ही बोली है।’

 


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Mayapuri

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