डब्बू मेरा भाई कम दोस्त ज्यादा है – रणधीर कपूर

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randhir-kapoor

 

मायापुरी अंक 18.1975

वैसा मेरा भाई रणधीर कपूर उर्फ डब्बू मेरा भाई है। पर मैं उन्हें अपना दोस्त ही समझता हूं। दोस्त से भी आगे हम दोनों का रिश्ता ‘यारी’ का रिश्ता है। मैं कई बातें अपने मां बाप से छुपा लेता हूं पर डब्बू से नही छुपा सकता। कई बार हम दोस्तों की तरह नोंक-झोंक भी कर लेते हैं।

मेरी सारी आदतों का पता उन्हें है और मैं भी उनकी कमजोरियों को जानता हूं। वह डरपोक भी कम नही है चूहे और काकोरच तक से डरते है। अन्धेरे में उन्हें नींद नही आती। जब हम दोनों साथ-साथ रहते थे तो में अक्सर बिजली बन्द कर उन्हें डराया करता था। कभी-कभी बिगड़ कर वे मेरा कान ऐंठ देते थे। जब हम दोनों छोटे थे तो अक्सर छीना झपट्टी किया करते थे। कभी मै पिता जी के पास शिकायत लेकर पहुंचता तो वे सीधे मॉ के पास जाकर नमक मिर्च लगाकर मेरी शिकायत करते।

मेरे भाई गम्भीर केवल उस समय रहते हैं जब वे अपनी फिल्म का निर्देशन करते हैं। फिल्म का निर्देशन करते समय वे खाना पीना तक भूल जाते हैं। शेव तक नही कर पाते। यह आदत उन्हें पिता जी से मिली है। वैसे वे खूब खुश मिजाज रहते हैं। अपनी किसी भी फिल्म की शूटिंग के वक्त, चाहे उनका रोल गम्भीर ही क्यों न हो। वे खुद कभी गम्भीर नही रह सकते। सैट पर अक्सर साथी कलाकारों को छेड़ते रहते हैं और चुटकियां लेते रहते हैं। यदि किसी से वे छेड़छाड़ न करे तो उनका पेट फूल जाता है। मैं सैट पर जितना खामोश रहता हूं। वे उतने ही तेज तर्रार रहते हैं। लड़कियों से छेड़छाड़ करने में भी खूब मजा लेते हैं। यहां तक कि भाभी को भी खूब छकाते हैं। लड़कियों के छेड़ने के लिए वे खास किस्म के चुटकुले तैयार कर लेते हैं। रहस्य रोमांच की किताबें पढ़ते हैं और उन की खास दिलचस्प घटनाओं को अपने जीवन में डालने की कोशिश करते हैं। हां, तुनक-मिजाजी भी खूब है। यदि कोई सीन या शॉट उन्हें पसंद नही आयेगा तो वे उसे बदलवा कर ही चैन लेगें

भाई के रूप में रणधीर कपूर जैसा भाई मिलना मुश्किल है। जब मेरी ‘बॉबी’ कामयाब हुई। मेरी सफलता की खुशी से उनकी आंखे छलछला आई थी। उनका यह प्रेम देखकर मैं गर्व से फूल उठा।


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Mayapuri

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