INTERVIEW!! ‘‘हमारे यहां स्टार महान एक्टर नहीं बल्कि उन्हीं में महान स्टार एक्टर भी हैं’’ – रणवीर शौरी

1 min


ये साल रणवीर शौरी के लिये काफी तकलीफ भरा रहा। उसका कोकंणा सेन शर्मा से तलाक हुआ। इस साल उसकी कोई विशेष फिल्म भी रिलीज नहीं हुई और न ही शायद उसने कोई फिल्म साइन की। पचास से ज्यादा फिल्में करने वाले इस बेहतरीन अदाकार की अदायगी जल्द ही दिबाकर बनर्जी द्वारा निर्मित तथा कन्नू द्वारा निर्देशित फिल्म ‘ तितली’ में दिखाई देने वाली है। फिल्म और उनके निजी जीवन को लेकर कुछ सवाल।

दिबाकर बनर्जी के साथ ये आपकी दूसरी फिल्म है ?

दिबाकर से इस बार दूसरे रूप मे मिलना हुआ क्योंकि इस बार वे डायरेक्टर नहीं इस फिल्म के प्रोड्यूसर हैं। लिहाजा उनसे फिल्म के दौरान ज्यादा कुछ सामना नहीं हो पाया जो अच्छा ही हुआ। वरना खोसला का घोसला के संस्मरण मुझे अच्छी तरह याद हैं कि वे आर्टिस्ट की किस तरह रेल बनाकर रखते हैं। ये फिल्म उनके ए डी कन्नू ने निर्देशित की है।

Dibakar-Banerjee-and-Ranveer-Shorey-at-the-Opening-Ceremony-of-the-6th-Jagran-Film-Festival-2015

फिर भी दिबाकर फिल्म से तो जुड़े ही हैं ?

प्रोड्यूसर के नाते ये उनकी फिल्म है लेकिन डायरेक्शन में उन्होंने कभी कोई दख्ल नहीं दिया। मैंने तो पूरी फिल्म के दौरान उन्हें सेट पर भी नहीं देखा। इसलिये ये पूरी तरह से कन्नू की फिल्म है।

फिल्म में आपकी भूमिका क्या हैं ?

मेरा फिल्म में सर्पोटिंग रोल है। दरअसल ये एक लोअर मिडिल क्लास परिवार की कहानी हैं जिसमें मेरे पिता है, मैं सबसे बड़ा हूं बेटा हूं। मेरे बाद अमित सियाल और सबसे छोटा शशांक है जो टाइटल रोल कर रहा है और उसी की यह कहानी है।

इसे किस तरह की फिल्म कहा जाये ?

यह एक ऑनेस्ट फिल्म है क्योंकि इसमें कहीं भी कहानी और किरदारों को उलझाने की कोशिश न करते हुये सीधे और सरल तरीके से दिखाया गया है ।

titli-ranvir-shorey_dd867004-7eb2-11e5-8319-3d66022f9dc4

एक्टर और स्टार को लेकर आप क्या सोचते हैं ?

मैने सुना है कि यहां एक्टर और स्टार में फर्क माना जाता है लेकिन आज तो कितने ही स्टार एक्टर भी यहां हैं। मेरे हिसाब से एक्टर वो होता है जिसकी अपनी एक अलग पहचान और जगह होती है। ऐसा नहीं हैं कि हमारे यहां स्टार महान एक्टर नहीं बल्कि उन्हीं में कुछ महान स्टार एक्टर भी हैं।

आज बहुत सारे ऐसे अदाकार आ गये हैं, जिनकी वजह से आज फिल्मों को एक नई पहचान हासिल हुई है ?

ये कोई नई बात तो है नहीं। जिस प्रकार आज कमर्शियल फिल्मों के साथ एक्सपेरीमेन्टल या छोटे बजट की फिल्में बन रही हैं। ऐसा पहले भी होता रहा है। अगर आपको याद हैं जब कमर्शियल फिल्मों का दबदबा हुआ करता था उन दिनों भी श्याम बेनेगल, एस एम मैथ्यू, ऋषिकेश मुखर्जी, बासू चटर्जी आदि कितने ही डायरेक्टर्स थे जिन्होंने अलग टाइप की फिल्में जिन्हें आर्ट फिल्म भी कहा जाता था बनाई और उन्हें एक तबका पसंद भी करता था। उन आर्ट फिल्मों के कलाकारों नसीरूद्दीन शाह, औमपुरी तथा रजत कपूर आदि ने बाद में मेन स्ट्रीम सिनेमा भी खूब किया। दरअसल आज आर्ट कहलाने वाली फिल्मों में कुछ बदलाव किये गये हैं उनमें गाने होते हैं मनोरजंन होता है लिहाजा वे भी मेन स्ट्रीम की फिल्में हो गई, और दर्शक भी खूब पसंद कर रहा है।

ranvir-shorey_640x480_51443599396

आज भी कुछ ऐसे स्टार भी है जो महज अपने कंधों पर फिल्म लेकर चलते हैं और हिट करवा देते हैं?

मुझे तो नहीं लगता कि आज कोई ऐसा स्टार हैं लेकिन अगर कोई ऐसा स्टार है भी तो उसे बाद में बहुत बुरे दिन देखने पड़ेंगे क्योंकि ये बात सभी जानते हैं कि आज स्टार नहीं चलता, एक अच्छी स्क्रिप्ट चलती है।

तितली क्या है ?

जिस तरह हम प्यार से अपने बच्चों के निक नेम रख देते हैं इसी तरह परिवार का छोटा बेटा जो हमेशा तितली की तरह उच्छल हैं इसलिये उसका नाम तितली पड़ जाता है। वैसे इस फिल्म की कहानी दिल्ली के एक लोअर मिडिल क्लास फैमिली की है, जिसमें तीन भाई हैं एक बाप है। उनकी मां नहीं हैं। दरअसल हम मिडिल मैन जब फैमिली के बारे में बात करते हैं जैसे माता पिता, बाप बेटा, भाई बहन यहां सभी अदर्स जुड़े हुये हैं लेकिन होता क्या हैं कि हमारी सोसाईटी स्ट्रीम में एग्जिस्ट करती है। आज सर्वाइवल करना मुश्किल है लिहाजा हमें पता ही नहीं रहता कि अब हमारी एक दूसरे के प्रति आत्मीयता हमारे आदर्श बच पाये हैं या नहीं। अब ये सब किताबों में सिमट कर रह गया है, तितली यही बताती है।

ranvir-shorey-fatso


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये