INTERVIEW: ‘‘आज भी हम काले रंग को लेकर अपने आपको हीन महसूस करते हैं ’’ – ऋचा चड्ढा

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ओये लकी लकी ओये, गैग्स ऑफ वासेपुर, रामलीला तथा मसान जैसी फिल्मों में अपने उच्च स्तरीय अभिनय को लेकर बॉलीवुड में अपना अलग स्थान बना चुकी अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने एक शॉर्ट फिल्म ‘खून आली चिट्टी’ के माध्यम से फिल्म निर्माण में भी कदम रख दिये हैं। ये फिल्म पंजाब के आतंक वाले दौर की है जिसमें एक किशोर किस प्रकार आतंकवाद का शिकार बनता है। फिल्म की ढेर सारी फिल्मी हस्तियों ने खुल कर तारीफ की है।

फिल्म के राइटर डायरेक्टर रूपेन्द्र इन्द्रजीत सिंह मेरे काफी क्लोज फ्रेंड हैं एक दिन उन्होंने कहा कि मैं कुछ शूट करके लाना चाहता हूं। इस पर मैने कहा कि ठीक है। उन्होंने वापस आने के बाद अपना शूट दिखाया तो वो मेरे अलावा कई लोगों को अच्छा लगा। मैने उनसे कहा कि ठीक है अब मैं तुम्हारे साथ जुड़ती हूं। इसके बाद हमने फिल्म का टेक्निक्ल काम निपटाया और जब फिल्म अच्छी बन गई तो सामने से ऑफर आने लगे,  इसके बाद हमने उसे बेच दिया, उसे रॉयल्स टेग ने उसे खरीद लिया, उन्होंने वाकई मेरी बहुत मदद की। दरअसल वे अब शॉर्टस फिल्मों में भी दिलचस्पी ले रहे हैं।

Richa Chadha and Rupinder Inderji
Richa Chadha and Rupinder Inderji

फिल्म का नाम ‘खून आली चिट्ठी’ है, जिसकी अवधी तेरह मिनट कुछ सेकेंड है। फिल्म के कटैंट या अन्य चीजों की बात की जाये तो सभी कुछ रूपेन्द्र का ही था।  उसे खुली छूट थी बस मुझे एक दो चीजें कहनी थी जिस पर उसने अमल किया। वरना मैं सिर्फ इसकी प्रोड्यूसर हूं। हां इस फिल्म से मेरे छोटे भाई प्रणव चड्डा ने भी म्यूजिक में कदम रखा है। फिल्म का म्यूजिक उसी का है। दरअसल वो शुरू से ही म्यूजिक का शौक रखता आया है। वो गिटार बजाता है, थोड़ी बहुत बांसुरी बजा लेता है तथा क्लासिक गाने के साथ पियानो भी बजाता है और आपेरा गाता है।Khoon-Aali-Chithi

ऋचा का कहना है आगे आने वाला समय शॉर्ट फिल्मों और वेब सीरीज का है लेकिन सिनेमा की जगह भी बनी रहेगी क्योंकि आज भी हमारे देश में कितनी ही जगाहों पर बिजली तक नहीं है इसलिये वहां इन्टरनेट की सुविधा नहीं है। ये सब चीजें आ रही हैं तो सिनेमा को भी अपने पर ध्यान देना होगा जो नहीं दिया जा रहा। आज भी हमारे यहां स्क्रीन कम है, टिकट की कोस्ट ज्यादा है,आइडेंसी ज्यादा है। जब तक ये सारी चीजें करेक्ट नहीं होगीं तब तक ज्यादा लोग सिनेमा से नहीं जुड़ पायेंगे। आप यकीन कीजीये जब मेरी फिल्म मसान रिलीज हुई तो लोगों के लगातार मैसेज आ रहे थे कि हमें वापी से ड्राइव करके अहमदाबाद जाना पड़ रहा है या यहां थियेटर नहीं है। जबकि मुंबई जैसे बड़े शहर में चार चार स्क्रींस हैं लिहाजा आज भी हमें बहुत ज्यादा जरूरत हैं थियेटर्स की।actress-richa-chadda

मैं बचपन मे देखा करती थी कि मेरे पेरेन्ट्स रामायण, महाभारत जैसी सीरीज देखा करते थे। इसके बाद टीवी ने बदलाव भरी करवट ली। उन दिनों काफी अच्छे शोज आते थे जैसे तारा या बनेगी अपनी बात आदि लेकिन अब जो टीवी है वो एक डिफरेन्ट ऑडियेंस के लिये हो चुका है जिससे मैं रिलेट नहीं कर पाती न ही मेरी मां कर पाती हैं। इसलिये मुझे पावर प्ले काफी दिलचस्प लगा और मैने इस वेब साइट में काम करने का मन बना लिया, मैं यहां लीड रोल कर रही हूं। मेरे अलावा विवेक ऑबेराय जैसे एक्टर भी इस वेब सीरीज से जुड़े हैं। इसके अलावा एक इन्टरनैशनल फिल्म ‘लव सुनी’ आने वाली है, उससे मुझे काफी उम्मीदें हैं। दरअसल सिनेमा के ग्लोबलाईजेशन होने के बाद आर्ट को काफी फायदा हुआ मुझे तो ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के एक महीने बाद ही मीरा नायर की एक शॉर्ट फिल्म मिल गई थी जिसका नाम था ‘गॉड्स रूम’जिसका कान्सेप्ट था कि घर में मंदिर कहां बनाये। इसके अलावा भी मैने कई शॉर्ट फिल्में की हैं।richa

मेरी व्यस्तता इन दिनों कुछ और है। दरअसल मैं एक किताब लिखने जा रही हूं जिसमें रंग भेद को लेकर बातें हैं जैसे अभी भी हम सामाजिक तौर पर काले रंग को लेकर हीन महसूस करते हैं। क्यों हम ब्राउन या गोरे होते हुये नाइजीरियन लोगों के साथ भेद भाव करते हैं, धिक्कार है हम पर। पता नहीं, एज एन सोसाईटी हम किस दिशा में जा रहे हैं। ये सारी बातें मेरी किताब का विषय है। इसलिये मैने काम से तीन महीने की छुट्टी ली है। अब लोग तो बोल देते हैं कि यार दो दिन का काम है आ जाओ, लेकिन उस दो दिन के काम के लिये हमें प्रिपेअशन करने के लिये दस दिन चाहिये होते हैं, फिर डायरेक्टर से डिस्कशन, राइटर से मिटिंग ,वर्क शॉप्स, स्क्रीप्ट रीडिंग आदि काफी काम होता है। इसलिये मैं कंप्लीटली तीन महीने की छुट्टी लेकर किताब लिख रही हूं। फिलहाल उसके तीन चेप्टर हो चुके हैं आगे बीस बाइस और लिखने हैं।


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Mayapuri

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