INTERVIEW!! ‘‘जिन मूल्यों को हम भूलते जा रहे हैं वे इस फिल्म में दिखाई देंगे’’ – सलमान खान

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एक वक्त था जब प्राण और प्रेम नाम फिल्म इन्डस्ट्री में बदनाम हुआ करते थे उन दिनों कोई भी अपनी फिल्म के हीरो का नाम प्राण या प्रेम नहीं रखता था। उसकी वजह यह थी कि उन दिनों खलनायक के रूप में प्राण और प्रेम चोपड़ा की इस कदर तूती बोलती थी कि दर्शक अपने बच्चों का नाम प्राण या प्रेम नही रखते थे। लेकिन उन्हीं दिनों निर्देशक सूरज बड़जात्या ने अपनी फिल्म ‘मैने प्यार किया’ में अपने हीरो का नाम प्रेम रखा। इसके बाद भी वे अपनी फिल्मों में इस नाम को दोहराते रहे। अब करीब पंद्रह साल बाद उनकी फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ में एक बार फिर प्रेम की वापसी हो रही हे और प्रेम बने हैं उनके फेवरेट सलमान खान फिल्म को लेकर सलमान का कहना हैं कि…….

इसे अमेजिंग ही कहा जायेगा कि उन दिनों प्राण साहब और प्रेम चोपड़ा पर्दे पर अवतरित होते थे तो उनके नेगेटिव भूमिका के अभिनय का इतना कमाल था कि लोग बाग अपने बच्चों का नाम प्रेम या प्राण नहीं रखते थे। उस वक्त सूरज बड़जात्या ने अपने हीरो का नाम फिल्म ‘मैने प्यार किया’ में प्रेम रखा। उनके फैसले को लेकर टीम के सभी सदस्य हैरान थे कि भला हीरो का नाम नेगेटिव कैसे हो सकता है। लेकिन उन्होंने कहा, हीरो का नाम प्रेम ही होगा। वहां से प्रेम की जर्नी स्टार्ट हुई। परन्तु अगर प्रेम की जगह कोई और नाम भी होता तो भी आप आज मुझसे यही सवाल कर रहे होते कि ये नाम क्यों। वो कहते है न कि आदमी नाम से नहीं काम से पहचाना जाता है तो फिल्म प्रेम रतन धन पायो का प्रेम भी अपने काम से ही अपनी पहचान रखता है ।

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मैंने प्यार किया के बाद भी आपने कई फिल्मों में प्रेम को जीया। आप उनमें से किस प्रेम के साथ जुड़े हैं ?

मेरी पहली फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ का प्रेम, जिसने मेरी लाइफ बनाई और अब जो इस फिल्म का प्रेम हैं वो पता नहीं मुझे कहां लेकर जायेगा।

सुना है कि इस फिल्म में आपको पहले प्रेम नाम पंसद नहीं था ?

ऐसा नहीं था दरअसल पहले मैं समझ नही पाया था कि राम रतन धन पायो का प्रेम रतन धन पायो कैसे हो गया। मुझे ये टाइटल पंसद था लेकिन बाद में राम रतन को प्रेम रतन बहुत सभंल कर बोलना पड़ता था दूसरे मुझे थोड़ा शक ये भी था कि आज की आधुनिक जनरेशन इसे कैसे बोल पायेगी लेकिन सूरज ने कहा टाइटल तो यही रहेगा। आज कल तो प्रमोशन का जमाना हैं हम इस टाइटल को इतना हैमर कर देगें कि ये हर किसी की जुबान पर चढ़ा होगा। वैसे भी आजकल पढ़े लिखे लोग बडे टाइटल्स को शार्ट फॉर्म बनाकर बोलने लगते हैं।

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प्रेम की जर्नी क्या है ?

यही कि उसका काम है सबको हंसाना रूलाना, सबको सांस्कारिक बनाना, उन्हें एन्टरटेन करना और उन्हें बताना कि वे हमारे सस्कारों की या हिन्दुस्तानी सभ्यता की जो लाइन हैं उसे पार न करें। प्रेम वो किरदार हैं जो बताता है कि बेशक तुम्हें कोई न देखे लेकिन तुम्हारा जमीर तो तुम्हें देख रहा है इसलिये अकेले रहकर भी कोई गलत काम ये सोच कर न करें कि तुम्हें कोई नहीं देख रहा है। ये एक लव स्टोरी है लेकिन इसके साथ भाई बहन का प्यार भी जुड़ा हुआ है। इससे ज्यादा और क्या हो सकता है। राजा रजवाड़ों में एक लव स्टोरी, ऊपर से उनकी फैमिली के भीतर भाई बहनों के झगड़े, जो शख्स आकर उनके झगड़े सॉल्व करता है। वो प्रेम है ।

राजश्री ने हमेशा सीधी सादी फिल्में बनाई लेकिन इस बार उन्होंने बहुत भव्य फिल्म का निर्माण किया है ?

लेकिन मेरी तो सारी फिल्में बहुत भव्य रही हैं। मैने प्यार किया में आलोक नाथ एक गरीब मैकेनिक थे फिर भी उनका घर देख लीजीये, हम आपके हैं कौन में सब टीचर्स थे आप उनके घर देख लीजिये या हम साथ साथ हैं के घर देख लीजिये। इन फिल्मों के बड़े बड़े सेट्स थे। यहां तो मैं प्रिंस हूं और सोनम प्रिंसेस हैं तो सोचिये कि जब मिडिल क्लास लोगों के घर ऐसे थे तो प्रिंस का घर कैसा होगा। कर्जत में इस फिल्म का इतना बड़ा शीश महल का सेट बनाया हैं कि उसे देख कर असली शीश महल शरमा जाये। उसके लिये राजस्थान से कारीगर आये थे। इससे पहले हमने उदयपुर और गुजरात में शूट किया था लेकिन जब सूरज ने देखा कि दर्शकों की वजह से शूटिंग करने में दिक्कत आ रही हैं तो उन्होंने एन डी स्टूडियो में खुद का महल बनवा लिया, उस महल की लंबाई चौड़ाई देखकर हैरत होती है। उसके बाद स्टूडियो में सेट पर बाकी शूटिंग हुई ।

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आपके करियर में सूरज बड़जात्या का क्या महत्व है ?  

सूरज जब भी मेरी लाइफ में आये उन्होंने मेरे कद को एक स्टेप ऊंचा ही किया। जंहा तक उनके डायरेक्शन की बात की जाये तो वे डायरेक्शन करते ही कहां है उन्हें न तो डायरेक्शन में या तकनीक में कोई दिलचस्पी नहीं। वे सिर्फ एक्टर को कहते हैं ये लाइन हैं ये फील हैं बस आप इन्हें बोल दीजिये। मेरे घर में ऐसा हुआ था तो उसका रिजल्ट ये आया था आप इसे वैसा बोल दीजिये। फिल्म उन छोटी छोटी और प्यारी चीजों के ऊपर हैं जिन्हें हम अक्सर नजर अंदाज कर देते हैं लेकिन सूरज ऐसा नहीं करते, उनके लिये वही चीजें बहुत महत्व रखती हैं। जिन मूल्यों को हम भूलते जा रहे हैं वे इस फिल्म में दिखाई देंगे।

 


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