मैं बोर होने वालों में से नही हूं – सिम्पल कपाड़िया

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(इशू न.20)75

उस दिन राजेश खन्ना की सालगिरह थी हम उन्हें बधाई ‘आशीर्वाद’ देने गए। वह बधाई लेकर फिर व्यस्त हो गयें। हम उनके पास से हटे तो सिम्पल कपाड़िया हमसे टकरा गईं या यूं कहिए कि हम उनसे टकरा गए। वह बोलने लगीं“आपने मायापुरी में मुझ पर बड़ा अच्छा लेख लिखा था। मुझें ही नही, सबको बड़ा पसंद आया। और कवर पर जो आपने ट्रांसपेरेंसी छापी थी वह भी बड़ी प्यारी छपी थी।।“

वह लेख आपको ही नही पाठकों ने भी बहुत पसन्द किया है। उसके संबंध में आपको पत्र भी आये होंगे मेरे ख्याल से आप अकेली हीरोइन हैं जिसकी फिल्म रिलीज तो दूर की बात है अभी सैट पर भी नही गई। और आप पापुलर हो गयी हैं ? हम ने कहा,

“क्या सच्ची ?” सिम्पल ने आश्चर्य और खुशी के मिले-जुले स्वर मे कहा, मेरे पास मायापुरी के हवाले से अनगिनत पत्र आये हैं जिन्होंने हस्ताक्षर युक्त चित्र की मांग की है और आने वाली फिल्मों के नाम जानने चाहे हैं। अभी किसी फिल्म का नाम ही नही रखा गया तो लिखूं क्या ? जरा फिल्में सैट पर तो चली जाएं तो सबको जवाब लिखूंगी इतने आप आपने पाठकों तक पहुंचादें तो आभारी रहूंगी” सिम्पल ने बड़े ही सिम्पल लहजे में कहा।

“आपकी ये फिल्में सैट पर कब तक जाएंगी? हर कोई यह जानने के लिए उत्सुक है। मेरे ख्याल से आप इस सवाल को सुन सुनकर बोर हो गई होंगी? हमने कहा।

नही, मैं बोर होने वालों में से नही हूं फिल्मे बनाना इतना आसान काम नही है जितना कि लोग समझते हैं। वैसे जनवरी में तीन फिल्में सैट पर आने की आशा है जिन में एक शक्ति दा की है, राजखोसला की और तीसरी गुल्लू अंकल (निर्माता गुल्लू कोछड़) की है।” सिम्पल ने फिल्में गिनवाते हुए कहा।

“आप अपना खाली समय किस तरह बिताती हैं? हमने पूछा।

“रियाज आदि से जो समय बचता है उसमें मैं फिल्म स्टारों को इधर उधर के नामों से फोन करके आनंद लेती हूं इस प्रकार के फोन में संजीव कुमार, रंजीत, प्रेम चोपड़ा को कर चुकी हूं। बड़ा ही आनन्द आता है। संजीव तो पहचान गये थे किन्तु और कोई समझ न सका। वैसे मैं डरती भी हूं कि कही कोई गड़बड़ न हो जाए क्यों कि मेरी आवाज डिम्पी (डिम्पल) से बहुत मिलती है। बाजीदफा लोग यही समझते हैं कि मैं डिम्पी ही बोल रही हूं। उन्हें लाख मना करो तो भी उन्हें यकीन नहीं आता।“ सिम्पल ने कहा।

और तभी किसी का फोन आ गया जो हिम्पल को पूछ रहा था। सिम्पल ने फोन पर कहा “डिम्पल जी अभी नही आई हैं बाद में फोन कीजिए।“

उधर से कहा गया “आप झूठ क्यों बोल रही हैं। आप खुद ही मना कर रही हैं आप डिम्पल नही तो कौन हैं।“

“जी मैं ट्विंकल (डिम्पल की लड़की) की आया मैरी बोल रही हूं।“ सिम्पल ने कहा और फोन रख दिया।

फिर ‘नागिन’ के सेट पर फिरोज खान से मुलाकात हुई हमने उनसे कहा। “फिरोज साहब। सैंसर बोर्ड सैक्स और हिंसा के खिलाफ है किंतु आप जिन फिल्मों में काम कर रहे हैं उनमें सैक्स और हिंसा की भरमार है क्या आप समझते हैं, वे फिल्में सैंसर हो जाएगीं?”

“सैक्स और वायलेन्स को यहां हव्वा बना रखा है। वायलेन्स का अर्थ तोड़ फोड़, असामाजिक कार्य और जोर जुल्म है। किसी जालिम या बदमाश को सजा देना वायलेन्स नही है। मेरी फिल्मों में प्राय: यही कुछ है। इस चीज पर सैंसर या किसी भी समझदार आदमी को आपत्ति नही हो सकती हमारी फिल्मों में यदि ऐसे सीन होते भी हैं तो उनका कारण अवश्य होता है। तर्क के साथ कोई बात कही जाए या दिखाई जाये तो भला वह क्यों आपत्तिजनक हो सकती है। यही हाल सैक्स का है सैक्स भी एक स्वाभाविक काम है। खाना पीना जीने के लिए जितना जरूरी है, सैक्स भी उतनी ही जरूरी है यह क्रिया पूरे स्वरूप में हमारे यहां दिखाई नही जाती और न दिखानी चाहिये। लेकिन चुम्बन जैसी पवित्र चीज पर सैंसर का एतराज समझ में नही आता। कितनी विचित्र बात है यह कि जो चीज हम अजंता एलैरा या किताबों में देख सकते हैं उसे हम पर्दे पर नही दिखा सकते। “फिरोज खान ने मूड में उत्तर देते हुए कहा।

“इसका मतलब है आपकी फिल्मों में या आपकी फिल्म ‘धर्मात्मा’ में चुम्बन के सीन हैं। शायद इसीलिए आप उसकी वकालत कर रहे हैं। क्या वाकई यही बात है? हम ने फिरोज खान की प्रतिक्रिया जानने के लिए पूछा।

मैं अपनी फिल्म या किसी विशेष फिल्म की नही, एक जनरल बात कह रहा हूं हमारी फिल्मों में जो सैक्स और वायलेंस पेश किया जाता है उसका स्वरूप बड़ा भौंडा है। उस पर तुर्रा यह है कि यदि फिल्मों में उसे स्वाभाविक ढंग से पेश किया जाए तो दर्शकों के बिगड़ने की संभावना होती है। जैसा कि सैंसर वालों की नीति है। इतनी बात तो हर हिन्दुस्तानी जानता है और समझता है कि खुले आम एकांत की बातें या चुम्बन हमारे समाज में प्रचलित नही है। इसलिए इन मान मर्यादाओं का आदर करना हमारा कर्तव्य है। किन्तु एकांत में दूर से चुम्बन का दृश्य लेते हैं तो उसमें हर्ज क्या है ? आखिर एलौरा अजंता आदि गुफाओं में यही सब कुछ अंकित है। उसे पर्दे पर पेश करने से आखिर किसी रोग के लगने का डर है ?” फिरोज ने सैंसर की नीतियों पर टिप्पणी करते हुए कहा। “हमने सुना था कि फिल्म ‘मेला’ में आप और संजय में किसी सीन को लेकर झगड़ा हो गया था। आप दोनों ने साथ काम न करने का फैसला किया था। अब आप दोनों ‘नागिन’ में फिर एक बार साथ आ रहे हैं।

“सुनी सुनाई बातों पर यकीन नही करना चाहिए। हम भाईयों में जितना प्रेम पहले था अब उससे कही अधिक ही प्रेम है। हम तो व्यावसायिक कलाकार हैं। कोई साथ काम करवाना चाहे तो क्यों करेंगे।“ फिरोज ने बड़ी सहजता से कहा।

फिल्म ‘आखिरी डाकू’ की शूटिंग नटराज स्टूडियों में चल रही थी। सैट पर हेलन भी थी यह जानकर हम वहां जा पहुंचे। हमें पता चला था कि हेलन नौजवान-निर्देशक के.परवेज से शादी कर रही हैं। हम हेलन के मुंह से उनकी शादी की खबर सुनना चाहते थे। अवसर मिलते ही उनसे कहा “हेलन जी मुबारक हो कि आपकी पसन्द का जीवन साथी मिल गया

लगता है आप भी अफवाहें फैलाने वालों की बातों में आ गए हैं। ना जाने यह अखबार वाले मेरी शादी कराने के पीछ क्यों पड़ गए हैं। हालांकि मैं पहले कह चुकी हूं कि मैं किसी फिल्म वाले से शादी नही करूंगी।“ हेलन ने कहा।

“तब आप कब और किससे शादी का इरादा रखती हैं?हमने पूछा।

“ मैं जब भी शादी करूंगी खुले आम करूंगी। शादी करना कोई लज्जाजनक बात नही हैं। फिल्मों में काम करने के बावजूद मैं कभी किसी फिल्म वाले से शादी नही करूंगी। फिल्म वाले अच्छे शौहर सिद्ध नही होते। दूसरे यह कि शादी के बाद मैं फिल्मों में काम करना जारी रखने के पक्ष में नही हूं। मैं जिसके साथ शादी करूंगी, वह कोई अमरीकी होगा या फिर अमरीका में बसने वाला हिन्दुस्तानी होगा। अब वह कौन होगा यह में भी नही जानती इसलिए और कुछ न पूछियेगा।“ हेलन ने अपना पिंड छुड़ाते हुए कहा।

प्रेम जी की फिल्म ‘मजबूर’ अमिताभ की ताजा फिल्म है। अभिनय के हिसाब से वह उनकी सर्वश्रेष्ठ फिल्म है। फिल्म ‘चुपके चुपके’ की शूटिंग के समय उनसे भेंट हुई तो हमने उनसे‘मजबूर’ में उत्तम अभिनय की बधाई देते हुए कहा “जंजीर और ‘मजबूर’ ने सिद्ध कर दिया है कि आप अभिनय में किसी से पीछे नही हैं। मेरे विचार से ‘मजबूर’ आपके अभिनय के हिसाब से आपकी सर्वश्रेष्ठ फिल्म है। ‘जंजीर’ ने आपको जो सफलता प्रदान की है उसे बराबर निभाते आ रहे हैं। इस ऊंचे स्थान पर पहुंचकर आप क्या प्रतीत करते हैं?”

“आनंद और ऊपर वाले की मेहरबानी मेहनत का फल मिलने पर किसे खुशी नही होती किन्तु यह मेरी सीमा नही है। अभी सितारों से आगे जहां और भी है अमिताभ ने कहा।

“आपके विवाहिता जीवन को लेकर आये दिन जो अफवाहें उड़ती रहती हैं। उनके बारे में कुछ कहेगें आखिर बार-बार ऐसा क्यों होता है?” संबंध-विच्छेद आदि समाचारों के विषय में पूछा।

“ऐसा क्यों है, यह मैं नही जानता। लेकिन इतना जरूर है कि जब हमारी शादी नही हुई थी तो लोगों को यह फिक्र थी कि यह रोमांस लड़ा रहे हैं, शादी क्यों नही करते। अब शादी हो गई है हमारी सफल शादी उन को फूटी आंख नही भा रही है। अब उनके पेट में यह दर्द है कि हमारे संबंध खराब क्यों नही हो रहे है। इसलिए लोग इस प्रकार की बातें उड़ाते हैं। वरना और क्या वजह हो सकती है जो वे झूठ को सच बनाना चाहते हैं। हमारे संबंध पहले से अधिक मधुर हैं। श्वेता के आगमन से हमारे संबंधो में और मधुरता है। हम अपनी बच्ची का किसी आया के बिना पालन पोषण कर रहे हैं हमारा छोटा सा परिवार सुखी है। हमें अफवाहें फैलाने वालों की परवाह नही है। कोई कुछ लिखता रहे हमारी सेहत पर असर नही पड़ता।“ अमिताभ ने दृढ़ता पूर्वक अफवाहों का खंडन करते हुए कहा।


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Mayapuri

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