बायोसेक्सुअल सोनाली बोस की फिल्म ‘मार्गरीटा विद ए स्ट्रा’ को लेकर मचा है हगामाः

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‘‘मैं चाहती हूं कि आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की मेरी फिल्म को देखे..’’ – सोनाली बोस

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‘‘गे विरोधी तबका फिल्म का विरोध कर सकता है..’’ – कल्कि कोचलीन

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‘‘मैं जूता खाने को तैयार हॅूं..’’
-सोनाली बोस
‘‘मैं कुछ चिंतित हूं..’’ – रेवती

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‘‘जब वेद लिखे गए, तब से हमारे देश में होमोसेक्सुआलिटी का अस्तित्व रहा है.’’
-शयोनी गुप्ता लगभग दस साल पहले फिल्म ‘‘अमू’’के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी बायसेक्सुअल सोनाली बोस की फुफेरी बहन मालिनी ‘सेरेब्रा पाल्सी’से ग्रसित यानी कि विकलांग हैं. वह हमेशा व्हील चेअर पर रहती हैं.यह एक अलग बात है कि वह काफी वैभावषाली जिंदगी जीती है.उनकी व्हील चेअर मैं बैटरी लगी हुई है.पर मालिनी के चालिसवें जन्म दिन पर सोनाली बोस ने उनसे पूछा था कि उन्हें उपहार में क्या चाहिए? तब मालिनी ने अपनी बड़ी बहन सोनाली बोस से कहा था कि वह सेक्स करना चाहती हैं?उस वक्त मालिनी के मुंह से वह यह जवाब सुनकर चैंक गयी थी.पर अब वह बतौर लेखक,निर्माता व निर्देशक फिल्म ‘‘मार्गरीटा विद ए स्ट्रा’ ’लेकर आयी हैं,जो कि सत्रह अप्रैल को रिलीज होे रही है. जिस दिन से इस फिल्म का ट्रेलर लांच हुआ है, उसी दिन से इस फिल्म ने कई तरह के विवाद खड़ा कर दिए हैं.

क्या है फिल्म‘‘मार्गरीटा विद ए स्ट्रा’’..?
फिल्म‘मार्गरीटा विद ए स्ट्रा’ की कहानी अपाहिज/सेरेब्रा पाल्सी ग्रसित लड़की लैला के ही इर्द गिर्द घूमती है. लैला हमेशा व्हील चेयर पर रहती है. वह ठीक से बोल भी नहीं पाती. उसके हाथ भी ठीक से काम नहीं करते हैं. पर उसे भी सेक्स की इच्छा सताती है. वह एक अपाहिज लड़के से प्यार करती है, पर वह लड़का उससे प्यार नहीं करता. अंततः वह अंधी लड़की खानुम के साथ समलैंगिक संबंध बनाती है.खानुम गे है.यानी कि इस फिल्म की नायिका शारीरिक अपंगता के बावजूद ‘बायसेक्सुअल’ है और काकटेल पीने में उसे आनंद मिलता है.अब इस तरह के कंटेंट वाली फिल्म को ‘यू’या ‘यूए’ सर्टीफिकेट नहीं दिया जा सकता.क्योंकि एक अध्ययन में यह बात साफ हो चुकी है कि फिल्मों के दृष्य बच्चों के दिमाग पर जल्दी प्रभाव डालते हैं.बहरहाल,केंद्रीय फिल्म प्रामणन बोर्ड’’ने फिल्म‘‘मार्गरीटा विथ ए स्ट्रा’ ’को ‘ए’ प्रामण पत्र जारी किया है.
जबकि आमीर खान के हाथों अपनी फिल्म‘‘मार्गरीटा विथ ए स्ट्रा’’ फिल्म का ट्रेलर लांच करवाते हुए फिल्म की लेखक, निर्माता व निर्देषक सोनाली बोस ने कहा था कि उनकी फिल्म को तो ‘यू ए’ प्रमाणपत्र मिलना चाहिए.जिससे यह फिल्म आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की भी देख सके.पर अफसोस सोनाली बोस को अपनी इस फिल्म के लिए ‘ए’ यानी कि वयस्क प्रमाण पत्र से ही समझौता करना पड़ा.इस पर सोनाली बोस कहती हैं-‘‘मैंने पहले ही कहा कि मैने भारतीय मानसिकता को ध्यान मैं रखते हुए खुद ही कुछ दृष्यों को काटकर सैंसर बोर्ड के पास प्रमाणपत्र के लिए भेजा था.पर मुझे रिवाइजिंग कमेटी ने ‘ए’प्रामणपत्र के साथ पास किया.लेकिन एक सीन को थोड़ा सा कट करना पड़ा.यदि हमारे पास समय होता,तो हम ट्ब्यिूनल में जाते और वह सीन कट न करना पड़ता.’’
आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़कियो को फिल्म‘‘मार्गरीटा विथ ए स्ट्रा’’ को दिखाने की सोनाली बोस की चाहत पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या सोनाली बोस चाहती हैं कि आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़कियां फिल्म देखने के बाद अपनी हम उम्र सहेलियों के साथ सेक्स करना शुरू करें? इस पर सोनाली बोस कहती हैं-‘‘हमारे यहाॅं लोग पाखंड करने से बाज नहीं आते.यहां लोग बात का बतंगड़ बनाने में देरी नहीं करते हैं.मेरी राय में तो छठी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को सेक्स एज्यूकेशन दी जानी चाहिए.मैं तो चाहती हूं कि हर बच्चे को स्कूल में 12 साल की उम्र से ही शिक्षा दी जानी चाहिए.’’

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जबकि लैला का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री कल्कि कहती हैं-‘‘लैला एक लड़की ,एक इंसान है.उसके अंदर भी हमारी जैसी भावनाएं है. अहसास हैं. टीनएजर है. उसके हारमोंस भी विकसित हो रहे हैं.वह भी किसी लड़के को ‘किस’ करना चाहती है.वह भी एक लड़के से मिलती है, उससे उसे प्यार हो जाता है.यह उसकी जिंदगी की यात्रा है. एक दिन लैला को अंधी लड़की खानुम मिल जाती है,जिससे वह शारीरिक संबंध बनाती है.मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता. मैं बता दूं कि अब तक विष्य के कई फिल्म फेस्टिवल के अलावा भारत में भी कुछ लोगों को फिल्म दिखायी गयी और जो ‘गे’समुदाय के विरोधी हैं, उन्हें भी यह फिल्म अच्छी लगी.’’

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‘‘ताशेर देश’’ जैसी बंगला फिल्म में अभिनय करने वाली तथा मूलतः कलकत्ता की रहने वाली शयोनी गुप्ता एक तरफ मानती हैं कि बंगाल में हिंदी फिल्मों देखने को पॉर्न फिल्म देखने जैसा माना जाता रहा है. तो दूसरी तरफ शयोनी गुप्ता ने फिल्म‘‘मार्गरीटा विद ए स्ट्रा’’ में अंधी और गे लड़की खानुम का किरदार निभाया है.शयोनी गुप्ता मानती हैं कि कई अभिनेत्रियों ने इस फिल्म के खानुम के किरदार को करने से मना किया था.वह कहती हैं-‘‘यह फिल्म सेलेब्रेशन आफ लाइफ है. यह फिल्म इस बात को रेखांकित करती है कि कुदरत ने जो कुछ जिंदगी में दिया है, उसे सेलीब्रेट करें.यह फिल्म तीन सशक्त नारीयों की कहानी है. फिल्म में विकलांग लड़की के नजरिए से टीनएजर लड़की की जिंदगी, उसकी भावनाओं की बात की गयी है. खानुम काफी हद तक सोनाली बोस जैसी है. निजी स्तर पर परदे पर किसी लड़की से रोमांस करने में मुझे कुछ भी गलत नहीं लगा. पर हर रिश्ता और इंटीमसी परदे पर नेच्युरल नजर आना चाहिए.पर इंटीमसी के सीन करते समय बहुत नर्वस थी.’’

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रेवती कहती हैं-‘‘हमारे यहां सेक्स को हौव्वा बना दिया गया है. हमारे यहां यह सब इस कदर छिपाकर रखा जाता है कि वह एक दिन बड़े अपराध के रूप में सामने आता है. अब इंटरनेट पर बच्चे सब कुछ देखते हैं, तो फिर हम क्यों पाख्ंडी बनकर बैठे हुए हैं. नेता तो लोकसभा व राज्यसभा मे बैठकर पाॅर्न फिल्में देखते हैं. हमारे देश में कामसूत्र को ‘कला’ मानते हैं.’’

कल्कि आगे कहती हैं- ‘‘मेरी राय में यह फिल्म सेक्सुआलिटी के बारे में नहीं है. फिल्म तो इंसानी अहसास व भावनाओं की बात करती है.इस फिल्म में एक भी हॉट सेक्सी सीन नहीं है.यह तो एक टीनएजर लड़की के अपने अंदर की खोज है.’’
बालीवुड में इस बात को लेकर हंगामा मचा हुआ है कि सोनाली बोस ने ‘सेरेब्रा पाल्सी’ पर केंद्रित फिल्म ‘‘मार्गरीटा विद ए स्ट्रा’’ में ‘गे’ पात्र क्यो पिरोया. इस पर वह लोगो की सोच पर सवाल उठाते हुए सोनाली बोस कहती हैं-‘‘मैं यह मानती हूं कि 14 साल के बच्चे को सेक्स सीन नहीं दिखाए जाने चाहिए. पर 14 साल के बच्चे के सामने ‘गे’ मुद्दे पर चर्चा करना गलत नही है. मैं फिल्म में ‘गे’की बजाय आम लड़के को भी पेश कर सकती थी. पर हम‘गे’ क्यों नहीं रख सकते?

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हम होमो सेक्सुआलिटी को फिल्मों में क्यों नहीं दिखा सकते.मैंने सोच समझकर अंधी लड़की खानुम का पात्र रखा है,जो कि ‘गे’है.मैंने एक आसामी लड़के का पात्र भी रखा है.लैला महसूस करती है कि वह अंधी लड़की उसके मुकाबले ज्यादा सषक्त है.उसे अंधे होने का कोई मलाल नहीं है.मेरी सोच यह है कि ‘गे’ इंसान भी अपने आपको सहज महसूस करता है.उसकी मां पाकिस्तान और पिता बांगलादेश से है.फिर भी उसने 14 साल की उम्र में अपने माता पिता से कह दिया था कि वह ‘गे’है.मैं लैला के सामने उसे एक स्ट्रीम किरदार बनाना चाहती थी.खानुम का मानना है कि ‘गे’होने के बावजूद हर इंसान के समान है.मैंने खानुम को एक एक्टीविस्ट के रूप में पेष किया है.निजी जिंदगी में मैं खुद एक एक्टीविस्ट हूं.लेकिन मेरी जो पहली स्क्रिप्ट थी,उसमें लैला और खानूम के बीच प्यार नहीं था.लैला सिर्फ खानुम के व्यक्तित्व से प्रभावित होती है.लैला,खानूम से साफ साफ कहती है कि मैं ‘गे’नहीं हूं.इस ‘गे’किरदार को रखने के पीछे वजह यह है कि लोग आसामी,मणिपुरी की तरह ‘गे’लोगांे से भी भेदभाव करते हैं.मैं हर तरह के भेदभाव के खिलाफ हूं.’’

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शयोनी गुप्ता कहती हैं- ‘‘फिल्म के ‘गे’पात्र का विरोध क्यो? क्या भगवान ने सपने में आकर कहा है कि ‘गे’गलत हैं. कहां लिखा है कि एक लड़की का एक लड़की से प्यार करना या इंटीमेट होना गलत है? हमारा देश कामसूत्र, खजुराहो और वेदों का देष है.जब वेद लिखे गए, तब से हमारे देश में होमोसेक्सुआलिटी का अस्तित्व रहा है.जो विरोध कर रहे हैं, उन्हें विरोध करने का कोई हक नहीं.’’

सोनाली बोस एक तरफ ‘गे’समुदाय और सेक्सुआलिटी की वकालत करती हैं, तो दूसरी तरफ वह अपनी फिल्म को ‘सेरेब्रा पाल्सी’ को रेखांकित करने वाली फिल्म नही मानती हैं. वह कहती हैं-‘‘मैं स्पष्ट करना चाहुंगी कि मेरी यह फिल्म किसी अपाहिज इंसान के बारे में नहीं है. यह महज एक संयोग है कि हमारी फिल्म की नायिका लैला व्हील चेअर पर मौजूद रहती हैं. हमारी फिल्म की कहानी किसी भी टीनएजर की कहानी हो सकती है. यह 19 साल के युवक युवतियों की सेक्स की इच्छाओं, उनकी सोच की बात करती है. मेरा दावा है कि फिल्म शुरू होने के दस मिनट बाद दर्शक भूल जाएंगे कि फिल्म की नायिका अपाहिज या व्हील चेअर पर है. लैला बेचारी नही है.वह बहुत चालू चीज है.उसके सामने तो आम इंसान बेचारे नजर आएंगे. लैला जो चाहती है, करती रहती है. हमारी फिल्म इंसानों के साथ जो भेदभाव होता है, उसकी तरफ भी इशारा करती है.’’

बालीवुड में चर्चाएं है कि सोनाली बोस खुद बायसेक्सुअल हैं,इसलिए उन्होने अपनी फिल्म में वही पेश किया है.इस पर सोनाली कहती हैं-‘‘माना कि मैं बायोसेक्सुअल हूं.पर यह न भूले कि उसके बाद मैंने शादी की.मेरे दो बेटे हैं.आज भले मेरा तलाक हो चुका है.पर मैंने 20 साल तक वैवाहिक जिंदगी जी है.इसके अलावा मैं एक बहुत बड़ी एक्टीविस्ट हूं.मैंने हमेशा‘गे’ समुदाय के लोगों का समर्थन किया है.मैं सिर्फ गे कम्यूनिटी का ही नहीं, किसी भी समुदाय का समर्थन करना चाहूंगी.मैं हमेशा एक्टीविस्ट रहूगी.यदि कोई ‘गे’है,तो उसके साथ भेदभाव क्यों किया जाए? मैंने फिल्म में ‘गे’पात्र रखा है,तो कुछ भी गलत नहीं किया है.’’
कलकी का मानना है कि ‘‘मार्गरीटा विथ ए स्ट्रा’’ का लोग विरोध कर सकते हैं.वह कहती हैं-‘‘समाज के कुछ लोगों को फिल्म से तकलीफ हो सकती.मसलन ‘गे’ विरोधी तबके को यह फिल्म पसंद नहीं आ सकती.वह इसका विरोध भी कर सकते हैं.अन्यथा यह एक भावना प्रधान फिल्म है.सेंसर बोर्ड के कुछ सदस्यों ने कहा कि यह मैच्योर फिल्म है.’’

फिल्म के रिलीज के बाद फिल्म के विरोध को सहने के लिए सोनाली तैयार हैं.वह कहती हैं-‘‘फिल्म देखकर लोग मुझ पर चप्पल फेंकेगे,तो भी मैं उसे झेलने को तैयार हूं.मुझे पता है कि विष्व हिंदू परिषद हमारी फिल्म के साथ क्या कर सकता है? फिल्म‘फायर’के साथ विष्व हिंदू परिषद ने जो कुछ किया था,वह हमें आज भी याद है.

‘सेरेब्रा पाल्सी’से पीडि़त बच्चों के स्कूल में पिछले बीस साल से वालींटियर के रूप में काम करती आ रही अभिनेत्री,लेखक व निर्देषक रेवती 1991 में मणि रत्न्म निर्देषित और सेरेब्रा पाल्सी पर आधारित फिल्म ‘‘अंजली’’में अंजली की माॅं का किरदार निभा चुकी हैं.अब फिल्म ‘‘मार्गरीटा विथ ए स्ट्ा’’में सारेब्रा पाल्सी पीडि़त लैला की मां का किरदार निभाया है.रेवती कहती हैं-‘‘यह रीयल समस्या पर बनी रीयल फिल्म है.मैं इस फिल्म को एक मूवमेंट की तरह देखती हूं.इसे सकारात्मक दृष्टिकोण से लेना चाहिए.मुझे तो विवाद की कोई बात नजर नहीं आती.मुझे लगता है कि लोग बेवजह ‘सेक्सुआलिटी’और ‘गे’मुद्दे को लेकर हंगामा मचाते हुए फिल्म को उसके मुख्य मकसद से भटकाना चाहते हैं.यह सब इंसान की अपनी सोच की बात है.इसलिए मैं कुछ चिंतिंत हूंू.लोगो को यह फिल्म एक टीनएजर लड़की के अहसासांे का ख्याल करते हुए देखना चाहिए.’’

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Mayapuri