‘‘मैच्यौरिटी और इगो में बहुत फर्क होता है’’- सुगंधा गर्ग

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करीब आधा दर्जन फिल्में कर चुकी सुगंधा गर्ग हर उस काम को नजर अंदाज करना पसंद करती है , जो सब करते हैं । जैसे उसने जब टीवी करने का मन बनाया तो सास बहू वाले शोज पूरी तरह नजर अंदाज कर ट्रेवल्स शो और ज्योग्राफी चैनल के कुछ शोज किये । जंहा तक फिल्मों की बात है तो जब उसे लगा कि उसे सिर्फ बहन तथा कुछ ऐसे वैसे रोल्स के आॅफर्स आ रहे हैं तो वो दो साल एक्टिंग से ब्रेक ले पहाड़ों पर निकल गई फोटोग्राफी करने। दरअसल सुंगधा एक टेलेंटेड फोटोग्राफर है और वह उसमें एक अच्छी सिंगर के भी तमाम गुण मोंजूद हैं । वापस आने के बाद वह एकाएक वह आधा दर्जन से ज्यादा फिल्मों की अभिनेत्री बन गई, जिनमें अधिकांश लीड रोल थे लेकिन कैसे ? अपनी इसी सप्ताह रिलीज फिल्म ‘ कॉफी ब्लूम’ के बारे हुई मुलाकात में सुगंधा ने अपने फिल्मी करियर को लेकर ढेर सारी बातें की ।

film cofi bloom

अपने बारे में क्या कुछ बताना पसंद करेंगी ?

मेरा शुरू से सोचना रहा है कि जो करना है, अलग करना है, चुनिंदा करना है। जब फिल्मों में बहन और उसी तरह के रोल मिलने लगे तो मैने सोचा कि ऐसे किरदार निभाने से कहीं अच्छा कुछ दिन फोटोग्राफी क्यों न की जायें । सॉरी मैने नहीं बताया कि मैं एक टेलेंटेड फोटोग्राफर भी हूं। तो मैने दो साल ब्रेक लेने का मन बना लिया । और मैं पहाड़ों में चली गई वहां टेकिंग के अलावा खूब फोटोग्राफी की । जब मैं वापस आर्द तो ऐसा लगा जैसे लोग मेरे आने कर इंतजार कर रहे थे । क्योंकि मेरे घर आते ही मेरे पास फिल्मों के एक से एक शानदार आफर्स आने शुरू हो गये । मेरी पहली फिल्म थी‘ जाने तू या जाने ना’। इसके बाद तेरे बिन लादेन, माई नेम इज खान, संतोश सीवन की फिल्म इनम तथा तेरे बिन लादेन टू आदि । पिछले साल मैने सबसे ज्यादा चार फिल्मों की शूटिंग की ।

कॉफी ब्लूम किस तरह की फिल्म है ?

यह एक त्रिकोणीय लव स्टोरी है। आप इसे रिलेशनशिप ड्रामा भी कह सकते हैं । कहानी की बात की जाये तो मेरे पति का नाम मोहन कपूर है। उनका बंगलौर में कॉफी प्लांट है । मेरी जिन्दगी में इससे पहले एक लड़का अर्जुन माथुर भी आ चुका है लेकिन मुझे जो चाहिये था वो उसके पास नहीं था इसलिये उसे छौड़ मैने मोहन कपूर जैसे धनाड्य शख्स का हाथ पकड़ लिया । आप कह सकते हैं यह नार्मल लोगों की जिन्दगी में घटने वाली घटनाओं की तरह ऐसी कहानी है जंहा काफी तनाव है ।

sugandha garg 2

अपनी भूमिका के बारे में क्या कहेगीं है ?

मेरी भूमिका को पूरी तरह ग्रे शेड कहा जा सकता है । मैं यानि अनिका ऐसी लड़की है जो गलतियां करती है माफी भी मांगती है । वह न तो आम लड़की बन कर रहना चाहती है न ही मॉडर्न । न ही वह सिपंल है न ही वह परफेक्ट। हमेशा कन्फयूज रहती है । रोती है तो खुश भी होती है। हालांकि वह दूसरी लड़कियों की तरह एक नार्मल लड़की ही है । यह एक रोमांटिक स्टोरी है लेकिन काफी अलग ।

आपके मुताबिक अहम् और मैच्योरिटी में क्या फर्क है ?

मैच्यौरिटी और इगो में बहुत फर्क है । सेट पर आते ही ऐसा बिहेव किया जाये जैसे आपको सब पता है । शायद आप ये नहीं जानते कि जो भी फीलिंग है वह आपके चेहरे पर दिखाई दे जाती है । लिहाजा कोई ऐसी गलती न करें जो आपके चेहरे पर नजर आये ।

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आपने ज्यादातर नये डायरेक्टर्स के साथ काम किया है ?

जी हां इसे आप इत्तफाक कह सकते हैं कि मेरी करीब छह फिल्मो से मेरे डायरेक्टर्स नये हैं यानि उनकी वह पहली फिल्में हैं । जैसे अब्बास, अभिशेक, मनु, ईशान भार्गव तथा शेफाली घोष आदि । आप चाहे हैं तो मुझे डेब्यु डायरेक्टर्स की हीरोइन कह सकते हैं ।

पिछले कुछ सालों से हिन्दी फिल्मों में एनआरआईज या विदेशी लड़कियों के आगमन को आप कैसे लेती हैं ?

मुझे लगता है कि आज फिल्में इन्टरनेट पर आॅन लाइन देखी जा रही है वह इतना ओपन हो गया है कि इंडियन लड़कियां कन्फयूज हैं कि वह आज भी अपने संस्कारों को पकड़ के बैठी रहे या उन्हें भी वह सब करना चाहिये जो बाहर से आई लड़कियां बिंदास हो कर रही हैं।

आने वाली फिल्में ?

तेरे बिन लादेन पार्ट टू, शेफाली घोष की ‘जुगनी’ तथा संतोश सीवन की ‘इवन’ ।


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Mayapuri

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