‘‘ मैं ऐसी फिल्मों के लिये भी तैयार हूं’’ – सुशांत सिंह राजपूत

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अपनी प्रतिभा के सदके टीवी से फिल्मों में छलांग लगाने वाले प्रतिभाशाली अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को वहां भी अच्छा वेलकम मिला । उसकी पहली फिल्म ‘काई पो चे’ अभिषेक कपूर द्धारा निर्देशित एक हिट फिल्म थी । इसके बाद उसे यश कैंप की तीन फिल्मों का कान्ट्रैक्ट मिल गया । उसमें से तीसरी फिल्म है ‘ ब्योमकेश बख्शी’ जिसके डायरेक्टर है दिवाकर बनर्जी । इस फिल्म को लेकर क्या कहना है सुशांत सिंह का ।

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आप किस तरह की फिल्में पसंद करते हैं ?

ऐसी फिल्में जो दिल से फील की जाये । लेकिन आज जो फिल्म बनाते हैं वे सिर्फ फिल्म बनाने के लिये फिल्म बनाते हैं । मुझे वो फिल्में पसंद हैं जो कुछ कहने के लिये बनाई जाती है ।

ब्योमकेश बख्शी के तहत क्या कुछ कहना चाहते हैं ?

ब्योमकेश में बहुत सारी चीजें कहने की कोशिश की गई है। दरअसल दिवाकर बचपन से ही ब्योमकेश से प्रभावित थे और सबसे अहम् बात कि जिस चीज को आप बचपन से देखते आ रहे हैं और उस चीज को किसी दूसरे नजरिये से देखें तो कैसी फिलिंग होगी । जैसे मैं बचपन से ब्योमकेश को देखते आ रहा हूं और पिछले छे सात महीने में बहुत बारीकी से देख रहा हूं और फील कर रहा हूं। तो अब उसे करते हुये उसकी तरफ मेरा नजरिया कैसा है। क्योंकि अभी तक करीब सतरह दफा इस विषय पर फिल्म,धारावाहिक तथा नाटक बन चुके हैं ।

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सो डेढसाल पहले के समय की कहानी को लोग आज कैसे रिलेट करेंगे?

मुझे नहीं लगता कि यहां कोई परेशानी होगी क्योंकि हम ब्लैक एंड व्हाइट में फर्क महसूस नहीं करते । हम इमोशन में बिलीव करते हैं । दूसरे मैने अभी तक जितने भी ब्योमकेश देखे, उनमें एक बात कॉमन थी कि हर किसी में ब्योमकेश केस सॉल्व करता है लेकिन यहां ऐसा नहीं है । यहां उसे पता ही नहीं है कि वो ब्योमकेश है । यहां वो कॉलेज से निकला एक ऐसा युवक है वो इन्टेलीजेंट है लेकिन उसे नहीं पता क्योंकि उसके आसपास भी साधारण सोच के लोग हैं । उसी दौरान उसके सामने एक ऐसा केस आता है जिसमें वो सिर्फ एडवैंचर के लिये घुस जाता है और उस केस को सॉल्व करने के बाद वो लड़के से एक मैच्यौर आदमी बनता है। हमारी फिल्म में ये सारी बातें अलग है ।

फिल्म में ब्योमकेश बक्षी को क्या एक केस ही सॉल्व करते दिखाया जायेगा?

नहीं वैसे तो दो तीन केस है । दरअसल वो जब पहला केस सॉल्व करता है लेकिन उसे यकीन नहीं हो पाता । इसीलिये फिर वो दूसरा केस पकड़ता है तीसरा पकड़ता है । इसके बाद उसे विश्वास हो जाता है कि वो इस काम में परर्फेक्ट है ।

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क्या इससे पहले ब्योमकेश बख्शी की फिल्में देखी थी ?

जैसा कि मैने बताया कि बचपन में मैने रजत कपूर का धारावाहिक देखा था लेकिन उस वक्त कहानी मेरी समझ से बाहर थी लेकिन मुझे उसका म्युजिक बहुत अच्छा लगा था । जब बात फिल्म की आई तो दिवाकर ने मुझे पहले कुछ भी देखने से मना कर दिया । लेकिन फिल्म शुरू होने से कुछ दिन पहले उन्होंने मुझ पर से बैन हटाया तो मैने रजत कपूर वाले ब्योमकेश के बीस इक्किस एपिसोड देखे, एक फिल्म देखी तथा कुछ नाटक भी देखे ।

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फिल्म में भाषा कौन सी है ?

भाषा के लिये दिवाकर पहले से स्पष्ट थे कि उन्हें वही भाषा रखनी है जिसे सब लोग जानते हैं। बेशक ब्योमकेश बंगाली है वो हमने भी बताया है कि वो बंगाली है। यहां तक मेरा एक डायलॉग भी है कि बंगाली नहीं बोल सकते क्या? जबकि वो डायलॉग मैं हिन्दी में ही बोल रहा था । इस पर लोग हंसेगें भी ।

अभी तक जितनी भी फिल्में आपने की हैं उनमें आप बता चुके हैं कि आप एक बढि़या एक्टर है । लेकिन वे सारी फिल्में लीक से हटकर थी । लेकिन ज्यादा दर्शकों तक पहुंचने के लिये तो कमर्शियल सिनेमा ही चाहिये होता है ?

पहले ऐसा होता था कि जब तक हीरो दो चार गाने न गाये या दस लोगों को एक साथ न मारे तब तक दर्शक को मजा नहीं आता था लेकिन आज ऐसा नहीं है । आज आर्ट फिल्में कहलाई जाने वाली फिल्मों में भी गाने होते है और भी मनोरजंक होती है । हालांकि मुझे इन्हीं फिल्मों ने यहां आने के लिये प्रेरित किया था । इसीलिये मैने पहले डांस सीखा था,फिर एक्शन के लिये ब्लैक बैल्ट तक हासिल कर ली थी बल्कि मैं तो बाद में डांस सिखाने भी लगा था । इसलिये मैं पूरी तरह ऐसी फिल्मों के भी तैयार हूं ।

दिवाकर बनर्जी के बारे में क्या कहना चाहेंगे ?

दिवाकर बहुत चीजों के बारे में जानते हैं । लेकिन उन्होंने कहा कि सारी चीजें जो आप जानते हैं उन सारी चीजों की तरह कुछ नहीं करना है । ये सिलसिला तीन चार महिनों तक चलता रहा । बाद में मैं समझ गया कि खुद कुछ नहीं करना । बस उन्हें सिर्फ फॉलो करते रहना है । इस तरह आज मैं ब्योमकेश बख्शी को बहुत अच्छी तरह से जानता हूं । जैसे वो अकेले रहना पसंद करता है लेकिन फिर भी वो हर किसी में अपना पार्टनर ढूंढता रहता है । बाद में सत्यवती उसकी वाइफ बनती है ।

आगे कौन कौन सी फिल्में हैं ?

शेखर कूपर की फिल्म ‘ पानी’ नीरज पांडे की ‘ध्वनी तथा होमी अदनान जांबी की इराफ्ता आदि फिल्में हैं ।


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Mayapuri

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