सन्त बन कर मैंने क्या पा लिया ? – विनोद खन्ना

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हमारे रिपोर्टर ने बैंगलौर से हमें एक जबरदस्त खबर भेजी, विनोद खन्ना ने एक होटल में दो लड़कियों से दुर्व्यवहार किया। मैनेजर और फिल्म के निर्माता ने कठिनाई से मामले को सुलझाया। मामला पुलिस तक पहुंच गया था।

हमने इस खबर को नही छापा क्योंकि इसकी सत्यता पर मुझे सन्देह था। विनोद खन्ना एक ऐसे कलाकार हैं जो अब तक किसी भी किस्म के छोटे-बड़े स्कैंडल में नही फंसे थे। इंडस्ट्री में उनकी इस बात के लिए ऐसी साख जमी हुई थी कि खबर सच नही लगी। मगर अगले महीनें तमाम फिल्मी पत्रकार उस खबर को ले उड़ें।

दूसरी बार रिपोर्टर ने मुम्बई से खबर भेजी। इस बार विनोद खन्ना ने एक फाइव स्टार होटल में तीन लड़कियों से छेड़खानी की थी। इस खबर को लेकर हम सोच में पड़ गये। बहरहाल हमने इसे भी रोक लिया केवल इस नाते के विनोद खन्ना की सज्जनता के प्रभाव से हम अपने आपको जल्दी-जल्दी मुक्त नही कर पार रहे थे। यदि यही खबरें हमें रणजीत या प्रेमनाथ के बारे में मिली होती तो हमने इन्हें फौरन बोल्ड टाइप में छाप दिया होता मगर विनोद खन्ना पर विश्वास नही हो पा रहा था।

हमने तो खबरें रोक लीं मगर ऐसी खबरों को लेकर जनता में जो वायु पुराण बहती है, उसे कौन रोक सकता है। रातों रात मुंबई से लेकर दिल्ली तक विनोद खन्ना के बारें में तरह-तरह की खबरें उड़ने लगी बड़ा संत बना फिरता था। नंबर दस निकला आखिर कोई कब तक अपनी असलियत छिपाए रख सकता है समझ में नही आता कि घर में गीतांजलि जैसी सुन्दर पत्नी होने के बावजूद वह ऐसा क्यों करते हैं गरज यह कि जितने मुंह उतनी बातें
दिल्ली क्रिकेट मैच में भी विनोद खन्ना को लेकर तरह-तरह की खबरें उड़ीं। सितारों ने क्रिकेट मैच खेलने के बाद फरीदाबाद में कोई प्रोग्राम देना था। मगर विनोद खन्ना ने वहां जाने की बजाय शबाना आज़मी पर डोरे डालने अधिक अच्छे समझे। शबाना भी होटल में ही ठहरी हुई थी। इस बार विनोद के बारे में ऐसी खबरें सुनकर न हमें हैरानी हुई, न हमारी पुतलियां जरूरत से अधिक फैली। ऐसी खबरें न मिलती, तभी हमें हैरानी होती। हम तो यहां तक तैयार थे कि कोई सुन्दर सी कन्या जरा अकेले में विनोद खन्ना से आटोग्राफ मांगे और हम अपनी आंखो से देख लें कि विनोद उस सुमुखी को आटोग्राफ के अतिरिक्त और क्या-क्या तोहफे देते हैं?

हमने विनोद खन्ना से इस बारे में बातचीत चलाने की कोशिश की तो उन्होंने चिढ़कर उत्तर दिया मुझे बताइए सज्जनता का मुखौटा ओढ़ कर इस इंडस्ट्री में मैनें क्या पा लिया आज तक किसी भी बड़े बैनर ने मुझे हीरो के रोल की ऑफर नही दिये।

अब हम विनोद खन्ना के विचित्र व्यवहार का राज पा गये थे। विनोद खन्ना ने अपने फिल्मी जीवन का आरम्भ विलेन के रोल से किया था। ‘मन का मीत’ ने जहां सुनील दत्त को ढेर सारी बदनामी दी। वहां इंडस्ट्री को दो प्रतिभाएं भी दी लीना चन्दावरकर और विनोद खन्ना फिल्म में दोनों ने ऐसा अभिनय किया था कि उनके भविष्य के बारे में दो राय नही हो सकती थी।

विनोद खन्ना को विलेन के रोल के लिए धड़ाधड ऑफर मिलनी शुरू हो गई। ‘मेरा गांव’ मेरा देश में विनोद खन्ना का अभिनय उस सीमा को छू गया था कि फिल्म का गायक धर्मेन्द्र भी उनके सामने फीके पड़ गया थे। मगर मानवीय स्वभाव है कि वह एक जगह पर निश्चित मन से नही बैठ सकते। वह हमेशा ऊपर और ऊपर उठना चाहते हैं। दुर्भाग्य से हमारी इंडस्ट्री में हीरो के सामने चरित्र-अभिनेता और विलेन को कोई महत्व नही दिया जाता हालांकि अशोक कुमार, प्राण और प्रेमनाथ ने सिद्ध कर दिया है कि फिल्म के चलने में चरित्र अभिनेता का भी पूरा सहयोग होता है। बहरहाल विनोद खन्ना ने हीरो बनने की ठान ली मगर विलेन को आनन-फानन में तो हीरो के रोल मिल नही जाते। विनोद खन्ना हीरो बने तो सहीं पर छोटी-मोटी फिल्मों में। ‘अचानक’ पर उन्होंने बड़ी-बड़ी आशाएं बांध रखी थी मगर ‘अचानक’ अच्छी फिल्म होने के बावजूद खास चली नही।

यहां पर हमारे ख्याल में विनोद खन्ना ने अपना आदर्श शत्रुघ्न सिन्हा को मान लिया। आखिर शत्रुघ्न भी तो उनका हमजोली थे और विलेन से हीरो बने थे। विनोद ने क्या देखा कि शत्रुघ्न अपनी बदतमीजी और आशिकाना हरकतों से हमेशा न्यूज में बना रहते हैं, मौका आने पर अपने दोस्तों की बीबी तक पर हाथ साफ कर सकते हैं, शायद इसीलिए उन्हें हीरो के रोल मिलते हैं। और एक मैं हूं जो सज्जनता का मुखौटा ओढ़ कर अंधेरे में बैठा हूं। बस विनोद खन्न ने रातों-रात अपना मुखौटा उतार फेंका और वही हरकतें जो अभी तक विनोद पर्दे पर करते थे, अपने वास्तविक जीवन में करने लगे।

सभी कहते हैं कि विनोद के मन में यौन विकार पैदा हो गये हैं। वह कुंठा से ग्रस्त हैं। मगर मैं सोचता हूं कि विनोद अपने आपको न्यूज में रखने के लिए यह हरकतें कर रहे हैं। इंडस्ट्री का यही लेटेस्ट फैशन में शामिल हो गया है। काश कि वह जान सकता कि जब वह संत थे तब उनकी सफलता के चांस अधिक थे क्योंकि वह तमाम भीड़ से अलग थे। मगर भीड़ में शामिल होकर तो उन्होंने अपना व्यक्तित्व ही खो दिया।


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Mayapuri

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