इज्जत के चक्कर में डूबी – विम्मी

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vimi2-sep16

मायापुरी अंक 54,1975
बी.आर. चोपड़ा की खोज विम्मी से उसके बांद्रा स्थित निवास पर भेंट हुई। मैंने कहा, आप जिस शान से फिल्मों में आई थी, वो क्रेज बरकरार नहीं रह सका। इसका क्या कारण है?
कोई नया कलाकार जब फिल्मों में प्रवेश करता है तो उसे सही मार्ग दर्शन की आवश्यकता होता है। मुझे उस समय अच्छे सलाहकार नही मिले जिसकी वजह से बहुत-सी फिल्में मुझे नही करने दीं और बिग ऑफर प्रतीक्षा करने को कहा। और बी.आर. चोपड़ा तथा बच्चन को छोड़कर शेष कोई फिल्म न थी। फिल्में ठुकराने के कारण दूसरे कैम्प के लोगों ने बदनाम करना शुरू कर दिया। और जब मैंने यह बात अनुभव की तब तक अधिक समय निकल चुका था। विम्मी ने कहा।
जो फिल्में आप कर रही थी, उनका क्या रहा? मैंने पूछा।
उन में सिवाय ‘हमराज’ से बाकी फिल्में रो धो कर बनी। और ‘आबरू’ दीपक कुमार को जिस तरह पेश किया गया, जनता ने स्वीकार नही किया ‘कहीं आर कही पार’ सी ग्रेड फिल्म सिद्ध हुई ‘पतंगा’ निर्माता ने बाहर तो रिलीज कर दी परंतु बॉम्बे में आज तक नही की। जबूकि वह बाहर अच्छी सिद्ध हुई। निर्माता किसी कारण बॉम्बे में वह फिल्म रिलीज़ ही नही कर पा रहा है।
आश्चर्य इस बात का है कि आपका नाम राज कुमार, सुनील दत्त, मनू नारंग आदि कई लोगों से जोड़ गया और इसके बावजूद हीरोइनों का अकाल होने पर भी पुन: व्यस्त क्यों नही हो सकी? मैंने पूछा।
मैं नही जानती कि यह अफवाहें क्यों उड़ रही है? जब मुझे घर पर प्यार मिलता है तो मुझे बाहर भटकने की क्या जरूरत है? मेरा विवाहित जीवन सुखी है। फिल्म में काम करना चाहती हूं परंतु इज्जत के साथ नानक नाम जहाज है करने के बाद लोगों ने पंजाबी फिल्मों की लाइन तो लगानी चाही परंतु मेरी पसंद की हिंदी फिल्में न मिल सकी, खैर इसका मुझे अफसोस नहीं है। मैं सुखी, मेरा परिवार सुखी।


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Mayapuri

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