हम टीआरपी की बात सोचते नहीं…’’ जावेद अख्तर

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‘जी क्लासिक’ चैनल पर 18 नवंबर से ‘क्लासिक लीजेंड’ नामक शो के सेकंड सीजन का प्रसारण शुरू हुआ है, जिसका संचालन मशहूर गीतकार व पटकथा लेखक जावेद अख्तर कर रहे हैं। पिछले सीजन में प्रसारित तेरह एपीसोड में कई कलाकारों पर बेहतरीन जानकारी दी गयी। अभिनेत्री मधुबाला पर प्रसारित एपीसोड देखकर मधुबाला की बहन ने तो जावेद अख्तर को फोन कर बधाई दी थी। प्रस्तुत है जावेद अख्तर से हुई बातचीत के अंश..
॰ आपको लगता है कि आपके कार्यक्रम ‘क्लासिक लीजेंड’ को सही टीआरपी मिल रही है ?
– हम टीआरपी की बात सोचते नहीं. हमारा मानना है कि जो बात दिल को लगती है, उसके लिए टीआरपी की जरूरत नहीं होती।
॰ ‘क्लासिक लीजेंड’ के दूसरे सीजन में क्या क्या होगा?
– क्लासिक लीजेंड के दूसरे सीजन में भी 12 एपीसोड प्रसारित होंगे। इस बार दो जीवित लीजेंड यानि कि प्राण व दिलीप कुमार की भी बात की जाएगी। इसमें से 2 एपीसोड दिलीप कुमार पर होंगे। बाकी एपीसोड अन्य लीजेंड पर होंगे। मीना कुमारी, देव आनंद, राजेश खन्ना, मो.रफी,नासिर हुसैन, हृषिकेश मुखर्जी, शैलेंद्र, आनंद बख्शी व एस डी बर्मन पर एपीसोड होंगे।
॰ दिलीप कुमार को लेकर आप किस तरह की बातें करने वाले हैं?
– दिलीप कुमार तो हमारी जिंदगी का हिस्सा रहे हैं। जब मैंने पहली फिल्म देखी, तो वह दिलीप कुमार की थी.मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ। छः साल की उम्र में लखनऊ के सेंट मेरी स्कूल में पहली कक्षा में जब मेरा एडमिशन हुआ, तो जष्न मनाने के लिए मुझसे पूछा गया था कि मैं फिल्म देखूंगा या चिडि़याघर देखने जाऊंगा। मैंने फिल्म देखने की इच्छा जाहिर की थी. तब मैंने पहली फिल्म ‘आन’ देखी थी, जिसमें दिलीप कुमार थे। तो दिलीप कुमार के साथ यह मेरा पहला परिचय था। फिर मैंने उनकी फिल्म ‘मधुमति’ देखी. कॉलेज में पहुंचने के बाद मैंने उनकी फिल्में देखते हुए उनके काम का विश्लेषण करना शुरू किया। दिलीप कुमार ऐसे लीजेंड हैं, जो आज भी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। कई पीढि़यां आयी व गयीं. पर हर कलाकार को दिलीप कुमार की अभिनय शैली और मैनेरिजम ने प्रभावित किया। यहाँ तक कि अमिताभ बच्चन भी दिलीप कुमार को गुरू मानते हैं।
॰ सुना है मधुबाला की बहन ने आपको फोनकर बधाई दी थी. आखिर मधुबाला के एपीसोड में आपने किस बात की सबसे ज्यादा चर्चा की थी?
– देखिए, हमने मधुबाला के एपीसोड में उनके अफेयर की चर्चा नहीं की थी। क्योंकि हमें पता है कि लोग कलाकार के अफेयर के अलावा भी बहुत कुछ जानना चाहते हैं. हमने सिर्फ उनकी खूबसूरती की बातें नहीं की. हमने इस बात की चर्चा, की कि फिल्म ‘मुगल ए आजम’ में लोगों को उनका काम अच्छा क्यों लगा था? जो बात डिसेंट नहीं हैं, जो बात सम्मान जनक नहीं है, उसे मैं अपने कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनाना चाहता। मैंने तो कैफी आजमी पर एक नाटक भी किया है।
॰ आपको लगता हैं कि क्लासिक फिल्मों के टीवी पर बार-बार दिखाए जाने से इतना महत्व कम होता जा रहा हैं?
– किसने कहा?‘मुगल ए आजम’ जैसी क्लासिक फिल्में यदि टीवी पर नहीं आती, तो इन फिल्मों के बारे में आज 16 से 30 साल की उम्र के करोड़ों दर्शक कैसे जान पाते। आप यह क्यों भूल जाते हैं कि शम्मी कपूर के बारे में युवा पीढ़ी सिर्फ टीवी की वजह से जानती है। मुझे अच्छी तरह से याद है कि मेरे पिता जी ने मुझसे एक बार कहा था कि दिलीप कुमार ने ‘देवदास’ में काम नहीं किया हैं। बल्कि सहगल ने भी देवदास में बेहतरीन काम किया था।
॰ लोग ‘शोले’ को भी क्लासिक फिल्म मानते हैं?
– लोग कहते हैं, तो होगी। पर मैं अपनी लिखी हुई फिल्मों के बारे में बात नहीं करता। अपनी प्रशंसा करना मुझे नहीं पसंद।
॰ यदि आपको मौका मिले तो पुरानी क्लासिकल फिल्मों में से किन फिल्मों का हिस्सा बनना चाहेंगे?
– यदि मुझे मौका मिले तो मैं ‘मधुमति’, ‘मदर इंडिया’, ‘मुगल ए आजम’, ‘गाइड’, ‘आनंद’, ‘श्री 420’, ‘प्यासा’ फिल्मों का हिस्सा बनना चाहूंगा।
॰ यष चोपड़ा के निधन से आप कितना दुखी हुए?
– देखिए, मैं बहुत सच बात करता हूं। समाज ही नहीं लोग भी बदल गए हैं। अब हम लोग इमोशनली रिच नहीं रहें। इसलिए हम किसी के लिए भी ज्यादा गम नहीं कर पाते हैं। कभी क्या होता है कि किसी नजदीकी के निधन पर हमारा दिल रो पड़ता है. मुझे भी यश चोपड़ा की मौत का दुख है. हमारे बीच तो लम्बा रिश्ता रहा है। मेरे दिल में उनके प्रति हमेशा इज्जत रही है. वह बुद्धिमान निर्देशक थे।
॰ आपको लगता हैं कि आज की तारीख में स्क्रिप्ट लेखन सही हो रहा हैं?
– स्क्रिप्ट लेखन कोई एक इंसान नहीं करता हैं.काफी लोग करते हैं। हमारे देश में हर तरह का काम हो रहा है। कुछ स्क्रीन प्ले देखकर मुझे लगता है कि काश मैंने यह किया होता।‘कहानी’, ‘उड़ान’, ‘जिंदगी मिलेगी ना दोबारा ’जैसी पटकथाएं देखकर मुझे लगता है कि काश मैंने भी इस तरह का काम किया होता. नई पीढ़ी के कुछ लोग अच्छा काम कर रहे हैं. कहानी की स्क्रिप्ट भी कमाल की है. 26 साल के लड़के ने ना सिर्फ स्क्रिप्ट लिखी, बल्कि फिल्म बनायी। उड़ान’ फिल्म की जितनी तारीफ की जाए, उतनी कम है।


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Mayapuri

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