मुझे बचपन से ही झूला झूलने का बहुत शौक है – पद्माखन्ना

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padma-khanna

 

मायापुरी अंक 16.1975

गया में जन्मी, बनारस में पली, बचपन में मुट्टली और कुछ बड़ी हुई तो दुबली-पतली हो गयी। न ज्यादा लम्बी, न ज्यादा खूबसूरत। फिर भी आज की सर्वाधिक लोकप्रिय कैबरे नर्तकियों में पद्मा खन्ना का नाम जरूर शामिल किया जाता है।

घर पर किसी को विश्वास ही नही थाकि यह कुछ कर पायेगी ! तो मां ने अपने विश्वास के बल पर अपनी लाडली को कत्थक नृत्य का अभ्यास करवाना आरम्भ किया।

नृत्य-शिक्षा के बाद पद्मा मुम्बई आयी। यहां गोपी कृष्ण की शिष्या बनी। काफी कुछ सीखा भी और यही से फिल्मी जीवन की शुरूआत भी हुई। पद्मा की पहली फिल्म थी गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो’ इस फिल्म के बाद पद्मा को फिल्में मिलती गयी। ‘जांहगीर’ की छोटी सी भूमिका में पद्मा ने सबको बहुत प्रभावित किया। ‘साज और आवाज’ का छोटा रोल भी ठीक ही था, लेकिन जब ‘जॉनी मेरा नाम’ प्रदर्शित हुई तो तहलका मच गया,

पद्मा के नाम को लेकर काफी शोरगुल मचा। बाद में सैंसरवालों ने पद्मा का पूरा नृत्य ही काट दिया, लेकिन इस फिल्म से पद्मा के सामने फिल्मों की लाईन लग गयी। और आज पद्मा ढेर सारी फिल्मों में अभिनय कर रही हैं

पद्मा बहुत हंसमुख स्वभाव की लड़की है। नृत्य-निर्देशक गोपीकृष्ण की पत्नी सावित्री पद्मा को ‘मच्छर’ कहती हैं। उनका कहना है पद्मा बहुत बोलती है। वह पलभर के लिए एक जगह टिक नही सकती। दिन भर कांव-कांव करती है। नाच का बहुत शौक है उसे।

पद्मा को खाना बनाने, सब्जी काटने, झाड़ू-बुहारने करने यानी कि घर भर के कामों से गहरा लगाव है, कभी कृष्ण जी के घर पहुंच जाती है, क्या भाभी तुम्हें रोटी बेलनी भी नही आती।

पद्मा ने अब फिल्मी कैबरे डांसों से तौबा कर ली है, मगर वह भी क्या करे, निर्माता मानते ही नही। तभी तो अब वह भूमिकाएं करने लगी।

‘सौदागर’ में अमिताभ के साथ नायिका की भूमिका सरलता पूर्वक निभाने के बाद सबको विश्वास था कि अब उन्हें ढेर सारी नायिका वाली फिल्में मिलेंगी, लेकिन ऐसा नही हुआ।

एक मुलाकात में पद्मा ने बताया, ‘कलाकारों की जिंदगी बहुत ज्यादा उलझी हुई होती है। बस, ऐसा लगता है। जैसे उम्रकैद की सजा भुगत रहे हो। हम चाह कर भी कुछ नही कर सकते। न घूम सकते हैं, न शॉपिंग कर सकते हैं। चाहने वालों की भीड़ की कल्पना कर मेरे तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लेकिन पिछले दिनों मुझे इस भीड़ भरी दुनिया से दूर एक अलग वातावरण में रहने का सौभाग्य मिला। हम ‘सौदागर’ की शूटिंग में कलकत्ता गये थे। कुछ दूर हमने कश्तियों में भी यात्रा की, उस वक्त ऐसा लग रहा था जैसे हम पिकनिक पर आये हो। और सबसे ज्यादा खुशी की बात तो यह थी कि वहां मुझे कोई पहचानता नही था, क्योंकि दर्शकों ने अक्सर मुझे कैबरे नर्तकी के रूप में देखा है। जबकी ‘सौदागर’ में मैंने एक सीधी-सादी ग्रामीण बाला की भूमिका अदा की है। इसलिए वहां के लोगों ने मुझे अभिनेत्री नही समझा मुझे ऐसा लग रहा था मानो मुझे मुफ्त में मिली उम्रकैद से छुट्टी मिल गयी है। मेरी खुशी अपनी चरम सीमा पर थी। शोरोगुल से कोसों दूर, बहुत से शांत माहौल, जिसका पूरा-पूरा लुत्फ मैंने उठाया।

अगली मुलाकात में पद्मा किस्सा सुनाने के मूड में थी। बोली, ‘आपको एक घटना सुनाती हूं मजेदार। मैंने कहा सुनाइये।

बात ‘आज की ताजा खबर’ के दौरान की है। इस फिल्म के एक दृश्य में हम एक झूले मे झूल रहे थे। जिसे अंग्रेजी में ‘जाइंटवील’ या ‘मेरी गो राउंड’ कहते हैं। मुझे बचपन से ही झूला झूलने का बहुत शौक है मगर अब कहां मिलता है मौका। बरसों बाद जब इस आउटडोर शूटिंग में झूलने का मौका मिला तो बहुत खुशी हुई। शूटिंग होते-होते काफी रात हो गई। लेकिन शूटिंग चल रही थी। मेरे साथ कॉमेडियन पैंटल बैठे थे। वह बेचारे पहली बार झूले में बैठा थे। सो उन्हें बड़ी घबराहट हो रही थी। झूले के हर झटके पर उनका रोयां-रोयां कांप जाता था, लेकिन मुझे मजा आ रहा था।

तभी अचानक जाने क्यों झूला एक दम रुक गया। हम सबसे ऊपर थे। चारों और अंधेरा था। लगभग डेढ़-दो घंटे तक हम ऊपर-जमीन और आसमान के बीच लटके रहे। पेंटल बुरी तरह घबरा गये थे। उनकी यह घबराहट देखकर मैं बेहेंत्या हंसती रही मुझे याद है पैंटल ने तब कहा था, कहा लाके पटका है। इस झूले से जितनी ज्यादा तकलीफ पेंटल को हुई उससे भी ज्यादा मजा मुजे आया, और मैं खूब हंसती रही है और आज भी यह किस्सा जब याद आता है, मुझे हंसी आ ही जाती है। कहकर पद्मा हंसने लगी।

पद्मा हंसती बहुत हैं। गोपी कृष्ण ने एक और किस्सा सुनाया था, पद्मा की हंसी का। उन्होनें बताया, एक दिन जब पद्मा शूटिंग से घर लौटी तो बहुत हंस रही थी। हमने कारण पूछा तो पद्मा ने बताया, आज एक बहुत मजेदार बात हुई, मैं मेकअप रूम में बैठी अपना मेकअप ठीक कर रही थी। शॉट टुनटुन पर लिया जा रहा था। तभी एक महापुरुष मेकअप रूम में आ घुसे और मुझे देखते ही ‘हैलो’ कहकर गायब हो गये। मैं भी बाहर निकली तो देखा वे महाशय टुनटुन के पास खड़े हैं, ‘अच्छा तो टुनटुन जी। आपकी छोटी बहन ने भी फिल्मों में काम शुरू कर दिया, बड़ी अच्छी शुरुआत है यह जब आप दोनों एक साथ पर्दे पर आयेंगी तो दर्शकों को बड़ा मजा अयेगा। यह सुनकर टुनटुन हैरान हो गयी, ‘मेरी बहन? कहां है वह ? और अब वही पद्मा न मोटी हैं न दुबली। आदतें वही है, शौक भी वहीपुराने हैं पहले जैसी. लेकिन अभिनय के मामले में पद्मा अब बहुत आगे बढ़ चुकी हैं।

एक और मजे की बात यह है कि पद्मा का नाम अफवाहों में अभी तक शामिल नही किया गया है, जबकि आम अभिनेत्री के साथ लगभग सभी कैबरे नर्तकियों का नाम खूब उछाला गया है। इसकी एक वजह यह समझ में आती है कि उनका स्वभाव आम अभिनेत्रियों से हट कर है और वह एक पारिवारिक लड़की अधिक लगती हैं।


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Mayapuri

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