अगर अभिनेत्री नही होती तो एयर होस्टेस जरूर बनती – योगिता बाली

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मायापुरी अंक 16.1975

दिन शनिवार दिनांक 7 दिसम्बर 1974

समय 8 बजकर 30 मिनट प्रात: के. मैं नहा धोकर घर से निकला रास्ते में टेलिफोन 24 नजर आया। मैंने फोन नम्बर 535706 घुमाया। घंटी बजनी शुरू हुई। उधर किसी ने रिसीवर उठाया। मैंने पूछा, योगिता जी हैं हॉ, लेकिन आप कौन बोल रहे है? उधर से आवाज आयी। ‘मैं अनुराग शर्मा’ मेरी बात पूरी होने से पहले उधर से आवाज आयी। यार मैं दीप सागर हूं कहां से बोल रहे हो ?

‘बस उधर से ही यह बताओ योगिता का इंटरव्यू करना है, बोलो कब आऊं ?‘अभी चले आओ, एक घंटे का समय काफी रहेगा? दीप सागर ने पूछा। ‘ठीक है, मैं पहुंच रहा हूं।

यह दीप सागर मेरे पुराने यार हैं। अब योगिता का सारा ‘काम’ देखते हैं। मैनें बांद्रा के लिए ट्रेंन पकड़ी बांद्रा पहुंचा, यहां से में टैक्सी से कोजी होम पहुंचा। यहां कई सितारे रहते हैं, और यही योगिता भी रहती हैं। लिफ्ट से मैं योगिता के फ्लैट तक पहुंचा कॉल बेल पर उंगली रखी। द्वार दीप सागर ने ही खोला।

वह मुझे अन्दर ड्राइंग रूम में ले गये। जहां योगिता बाली अपने भाई योगेश बाली के साथ बैठी थी। योगिता से यह मेरी पहली मुलाकात थी।

मैंने ‘मायापुरी’का अंक योगिता बाली के सामने रख दिया। ‘मायापुरी’ देख कर योगिता प्रसन्नता से बोलीं, वाह बहुत खूब सूरत है, बिल्कुल मेरी तरह जी हां, और आपकी तरह चंचल और जवान भी है। इसके अलावा निडर भी है। आप भूल-चूक से नही डरती है न, यह भी नही डरती है।

‘अरे वाह यह तो बड़ी अच्छी बात है। योगिता ने प्रसन्नता पूर्वक कहा। सुना है आपने एक बार बी.आर. इशारा की किसी फिल्म में काम करने से इंकार कर दिया था? मैनें अपना पहला प्रश्न पूछा।

‘जी हां, लेकिन वह बहुत पुरानी बात है। ‘लेकिन आपको इशारा की फिल्मों में काम करने से भला क्या ऐतराज था।

‘कोई खास नही, बस यूं ही इशारा साहब की फिल्में कुछ खास टाइप की होती हैं, और मुझे यह स्टाइल पसन्द नही।

यह तो ठीक है, लेकिन आपकी कई फिल्मों में इशारा टाइप दृश्य थे?‘हां पर्दे के पीछे। गंगा तेरा पानी अमृत’ के अलावा दो एक और फिल्में ऐसी थी। जिनके बारे में मुझे बाद में पता लगा कि निर्माता की इच्छा क्या है। मैं नयी-नयी आई थी। मुझे यहां के चक्कर के बारे में कुछ मालूम नही था। इसलिए ‘गंगा तेरा पानी अमृत’ पोस्टरों मे मेरा एक गलत पोज दे दिया गया था। इस पोज़ के लिए मैंने और मेरे परिवार ने आपत्ति भी की थी।

मान लीजिए एक दिन सेंसर सेक्सी दृश्यों और चुंबन को हमारी फिल्मों में मान्यता दे दो तो आप क्या करेंगी?

‘तब मैं ऐसी फिल्मों में काम नही करूंगी, मजे की बात तो यह है सब मुझे सेक्स-सिंबल मानते हैं, जबकि ऐसा कुछ नही है, और तो और मुझे फिल्म लाइन की वह गंदी फिल्में बिल्कुल पसन्द नही। नग्नता तो होनी ही नही चाहिए, और सुनिये बहाना करते हैं कि साहब क्या करें कहानी की मांग है। हम लोग जबरदस्ती कहानी जैसी उत्तम वस्तु को बदनाम करते हैं, सब अपना मतलब हल करना चाहते हैं।

‘लेकिन बात पूरी होने से पहले ही योगिता ने बताया ये सभी दृश्य बहुत ही खूबसूरती से फिल्माये गये हैं, इनमें गंदगी नही है, अश्लीलता नही है। ये दृश्य उतने भद्दे नही है, जितने कि कई अन्य फिल्मों में दिखाये जाते हैं।

और ये प्यार-मोहब्बत के किस्से ? क्या ये भी

इस बार तुनक कर योगिता बोली जी हां यह सब बकवास है। अफवाहे हैं और अफवाहें फैलाने वाले यह भूल जाते हैं कि अभिनेत्रियां भी भारतीय है, विदेशी नही।

इधर-उधर की बातें पूछने के बाद मैने योगिता से उनके फिल्मों में प्रवेश की बात पूछी तो योगिता ने बताया। ‘मेरी मौसी स्वर्गीय गीता बाली फिल्म उद्योग मे अभिनय की दृष्टि सेसर्वोत्तम अभिनेत्री मानी जाती थी। हमारा पारिवारिक माहौल भी फिल्मी रहा है। बचपन में मैने शाहिद लतीफ की फिल्म ‘जवाब आएगा’ में बाल अभिनेत्री की भूमिका निभाई थी। इसी फिल्म में मेरे भाई ने भी भूमिका निभाई थी। मेरे भाई योगेश बाली (बाल कलाकार की भूमिका) ने अदा की थी। इसके अलावा मैंने फिल्म ‘छोटी-सी मुलाकात’ में वैजयंती माला के बचपन की भूमिका अभिनीत की थी।

इसके बाद मेरे मन में भी अभिनेत्री बनने का ख्याल आया। मौसी का अभिनय मेरे लिए काफी सहायक सिद्ध हुआ। मैं मौसी की फिल्में बहुत गौर से देखती। सोचती कि अगर मैं बड़ी होकर अपनी मौसी की तरह अभिनय प्रस्तुत करने में सफल रही तो जीवन की सबसे बड़ी सफलता हासिल कर लूंगी दूसरी ओर सोचती अगर अभिनेत्री न बन सकी एयर होस्टेस जरूर बनूंगी, जिसके लिए मैट्रिक पास होना बहुत जरूरी है, अत: में नियमित रूप से स्कूल जाने लगी। हालांकि पढ़ाई में बिल्कुल मन नही लगता था। पढ़ने में रूचि नही थी इसलिए मम्मी भी परेशान थी, क्योंकि हर रोज मैं कुछ न कुछ नुकसान करके ही घर लोटती थी। कभी पुस्तकें गायब है तो कभी पेन, तो कभी और कुछ स्कूल से घर तक शिकायतों का सिलसिल भी लगा रहा, लेकिन इसके बावजूद मैं स्कूल के नाटकों में बड़ी मेहनत और लगन से भाग लेती और सफल अभिनय प्रस्तुत करती।

इसके साथ ही मैं चिल्ड्रन फिल्म सोसायटी की फिल्मों में भी काम करने लगी थी। वहां मैंने काफी नाम कमाया, फिर किसी तरह मैट्रिक पास कर लिया। बड़ी हो गई। खूबसूरत दिखने लगी, साड़ी पहनना शुरू कर दिया था।

‘मेरे परिवार में कई निर्माताओं का आना-जाना लगा रहता था, सबने भविष्यवाणी कर दी थी यह लड़की अपने परिश्रम और लगन के बल पर सफल अभिनेत्री बन सकती है। ये बातें जब मैं सुनती तो मेरा उत्साह बढ़ता। मौसी को गुरु तो माना ही था, सो अब पूरी तरह से अभिनेत्री बनने के लिए जुट गई, लेकिन इसके लिए मुझे कोई खास परिश्रम नही करना पड़ा।

योगिता, फिल्मों में प्रवेश की अपनी कहानी बिना रुके सुना रही थी। मैं भी बगैर एक शब्द बोले सुन रहा था। उन्हौंने आगे बताया, मेरी चर्चा मुम्बई और मद्रास की फिल्म इंडस्ट्री में थी। इस चर्चा का लाभ उठाने के लिए मद्रास के मशहूर निर्माता बी. अनन्तस्वामी दौड़े-दौड़े मुम्बई पहुंचे। अनन्तस्वामी को लगभग सभी जानते हैं। इन्होनें ही हेमामालिनी को ड्रीमगर्ल बनाया है। सो मुझे भी ड्रीमगर्ल नंबर 2 बनाने के विचार से उन्होनें 2000 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से पांच वर्ष का कांट्रैक्ट कर लिया। मैंने भी सोचा चलो इस बहाने फिल्मों में एंट्री तो मिलेगी। लेकिन इसे मेरा सौभाग्य समझिए या दुर्भाग्य बी. अनन्तस्वामी के कांट्रैक्ट के दौरान मुझे एक फिल्म नही मिली बीच में एक फिल्म मिली भी। लेख टंडन की ‘जहां प्यार मिले’ लेकिन किन्ही कारणों से बात जमी नही, और जाने क्या सोच कर अनन्तस्वामी ने मुझे अनुबंध से मुक्त कर दिया।

यह कहकर योगिता ने राहत की एक लंबी सांस ली फिर कहा, और एक मुक्ति मेरे लिये वरदान साबित हुई। मुक्ति के बाद मेरी पहली फिल्म थी पर्दे के पीछे। और इसके बाद तो जाने क्या चमत्कार हुआ कि मेरे पास फिल्मों का ढेर लग गया। और इसके बाद की कहानी तो सब जानते ही है। योगिता के रुकते ही मैनें पूछा। आपको किस तरह की भूमिकाएं पसंद है?

मुझे किसी खास रोल में कोई दिलचस्पी नही। मैं हर तरह का रोल निभाना चाहती हूं मैं वक्त आने पर नायिका से सहनायिका की भूमिकाएं भी करती हूं जैसे झील के उस पार में मैंने साइड रोल अदा किया है। और भी दो एक फिल्में ऐसी है। अभी फिल्म ‘अजनबी’ और ‘कुंवारा बाप’ में मैनें गेस्ट रोल निभाया है?

‘योगिता जी, यह क्या बात हुई कि आप अजनबी और ‘कुंवारा बाप’ की छोटी सी भूमिका में भी दर्शकों का मन मोह लेती हैं और यह सही भी है कि इन दोनों फिल्मों में आपका अभिनय बहुत ही प्रभावशाली है।

‘बात मौके की है, ‘अजनबी’ की छोटी-सी भूमिका का प्रस्तुतीकरण बहुत अच्छा हुआ है और शायद यही वजह है कि इन फिल्मों में मेरा अभिनय दर्शकों को पसन्द आया हो। योगिता में अभिनय प्रतिभा है। इसमें कोई शक नही कि यदि उन्हें कोई योग्य निर्दशक एंव योग्य भूमिका मिले तो वह अपने अभिनय का लोहा जरूर मनवायेगी। ऐसा मुझे उनकी बातों से आभास हुआ।

योगिता बाली को विदेशी अभिनेता क्रिस्टोफर बहुत पसंद हैं। योगिता क्रिस्टोफर की फिल्में बड़े प्यार से देखती हैं। ‘हारर्स आफ ड्रेकूल’ उन्हौंने कई बार देखी है। हिंदी फिल्मों में भी उनके कई चाहेते अभिनेता है, लेकिन किसी दो एक का नाम बताकर वह दूसरों को नाराज नही करना चाहती।

धर्म के बारे में योगिता के यहां विचार हैं। वह अपनी मम्मी की तरह ही सब धर्मो को मानती हैं।उन्हौंने घर में रामायण, कुरान शरीफ और बाईबिल का समान रूप से सम्मान होता है। प्रतिदिन वह पूजा करने के बाद ही घर से निकलती हैं।

कला से भी योगिता को काफी लगाव है और शायद इसीलिए उन्हौंने फ्लैट में विभिन्न कलाकृतियों का अति उत्तम संग्रह है। योगिता का पारिवारिक नाम ‘पिंकी’ है। योगिता बाली की निर्माणधीन प्रमुख फिल्में है ‘मृग’‘तृष्णा’‘चरित्रहीन’‘मेरी किश्ती’‘सौदा’‘चाचा भतीजा’‘रईस’‘जज्बात’‘बादलों के पार’‘हाइवे’‘स्मगलर’‘प्यार का रंग’‘लगाम’‘प्यार करेगें’‘उजाला ही उजाला’‘बातों का सौदागर’‘अंगार’ आदि


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Mayapuri

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