मूवी रिव्यू: एक प्रशंसक के पागलपन को दिलचस्प तरीके से दर्शाती है – फैन

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रेटिंग****

फिल्मी स्टार के प्रशंसक यानि फैन का उस स्टार के लिये इस कदर भावुक होना कि स्टार द्वारा कही कड़वी बातों से ठेस लगने पर वो अपनी भावुकता को लेकर उसी स्टार से भिड़ जाता है जिसका वो फैन है। निर्देशक मनीश शर्मा की फिल्म ‘फैन’ एक ऐसे फैन के पागलपन को दर्शाती दिलचस्प फिल्म है।

कहानी

दिल्ली का रहने वाला एक आम सा लड़का गौरव चांदना (शाहरुख खान) सुपर स्टार आर्यन खन्ना (शाहरुख खान डबल रोल) का जबरदस्त फैन है। लोग उसे जूनियर आर्यन खन्ना कहते हैं। वह अपने इलाके में होने वाले स्टार कंपीटिशन में हर बार ट्रॉफी जीतता है। साइबर कैफे चलाने वाला गौरव आर्यन के जन्मदिन पर मुबंई जाकर उससे पांच मिनट के लिये मिलना चाहता है। मुबंई पहुंच कर वो उसी लॉंज में ठहरता है जहां कभी आर्यन आकर ठहरा था। आर्यन के जन्मदिन पर वह उसे देख तो लेता है लेकिन उससे मिल नहीं पाता। एक न्यूज में जब उसे पता चलता है कि एक नये स्टार सिड को आर्यन ने तमाचा मार दिया था इसलिये वो अब टीवी पर उसके बारे में न जाने क्या कुछ कह रहा है। गौरव जुगाड़ भिड़ाकर सिड तक पहुंच उसे पीट देता है और वो वीडियो फेसबुक पर शेयर कर देता है। आर्यन को जब इस बात का पता चलता हैं तो वो गौरव को पुलिस में पकड़वा कर उसकी पिटाई करवा देता है। बाद में वो गौरव को देखने पुलिस स्टेशन में आता है और जब खुद उसे बताता है कि उसने उसे बंद करवाया है। दूसरे वो है कौन जो उससे मिलने के लिये पांच मिनट मांग रहा है। मैं तो अपने उसे पांच सेकंड न दूं। ये बात गौरव को लग जाती है कि जिसे वो पिछले बीस सालों से पागलपन की हद तक चाहता आया है उसी ने उसके साथ ऐसा किया। आगे गौरव ऐसा कुछ करता है कि आर्यन की स्टारडम खतरे में पड़ जाती है।

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निर्देशन

‘बैंड बाजा बारात’ और ‘शुद्ध देसी रोमांस’ जैसी फिल्में बनाने वाले मनीश शर्मा बहुत अच्छे टेक्निीशियन हैं। उन्होंने अपनी पिछली फिल्में अपेक्षाकृत नये कलाकारों के साथ बनाई लेकिन इस बार उनके साथ बॉलीवुड के बेहतरीन परफॉर्मर स्टार शाहरुख खान हैं। जिन्हें लेकर उन्होंने एक क्रम तक शाहरूख की जर्नी के कुछ वरखे फाड़कर दिखाते हुये उन्हीं के सामने गौरव चानना के रूप में एक दूसरा किरदार खड़ा कर दिया और वह रोल भी उन्हीं से करवाया। बेशक मनीश दोनों भूमिकाओं में शाहरुख की अभिनय क्षमता का बढ़िया इस्तेमाल करने में पूरी तरह कामयाब रहे। हालांकि मध्यांतर के बाद उन्होंने गौरव के किरदार के लिये जरूरत से ज्यादा फिल्मी लिबर्टी ले ली क्योंकि उसके द्वारा अविस्मरणीय कारनामे देखकर शाहरूख की फिल्म ‘डर’ की याद आने लगती है। बावजूद इसके दर्शक उन्हें नजरअंदाज कर फिल्म के साथ लगा रहता है। दिल्ली, मुबंई, क्रोएशिया, लंदन और फिर दिल्ली की मन मोह लेने वाली लोकेशंस रही। खासकर क्रोएशिया का बहुत ही खूबसूरती से इस्तेमाल किया है। अगर गौरव और आर्यन की बात की जाये तो शुरु से ही दोनों किरदार नाटकीय लगने लगते हैं लेकिन शाहरुख ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से उन सारी खामियों को खूबसूरती से दूर दिया। सबसे बड़ी बात की मनीश शाहरुख की अदाकारी के साथ उनका अक्खड़पन दिखाना नहीं भूले। फिल्म का कलाईमेक्स उस वक्त अखरने लगता हैं जब गौरव आर्यन के समझाने के बाद भी आत्महत्या कर लेता है।

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अभिनय

हमेशा शाहरुख पर इल्जाम लगता रहता है कि वे हर फिल्म में शाहरुख ही लगते हैं लेकिन इस बार सुपर स्टार आर्यन खन्ना और बिलकुल विपरीत गौरव चानना दोनों में वे किरदार ही लगे हैं। उनके लिये आर्यन से कहीं ज्यादा मुश्किल भूमिका थी गौरव की, लेकिन उन्होंने पूरी मेहनत लगाकर उसे दिल्ली वाली बोलचाल तथा अन्य एक्टिीविटीज से असली किरदार बना दिया। कहीं कहीं फिल्म शाहरूख की बायोपिक लगने लगती है लेकिन शाहरुख ने इस बात का भी पूरा ध्यान रखा और अपनी जर्नी की कुछ ही बातें फिल्म में शामिल की। उनके अलावा वलूशा डिसूजा, श्रेया पिलगांवकर, दीपिका अमीन, योगेन्द्र टीकू तथा सयानी गुप्ता भी सटीक किरदार साबित हुये।

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संगीत

फिल्म का प्रमोशनल गीत जबरा फैन बाहर ही सुनाई देता रहा लेकिन उसे फिल्म में जगह नहीं दी गई। वैसे भी फिल्म में कोई गाना नहीं है।

क्यों देखें

शाहरुख खान की जबरदस्त अदाकारी के लिये ये फिल्म उनके प्रशंसकों के लिये एक तोहफे की तरह है।

 


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Mayapuri

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