‘सफलता और असफलता साथ-साथ चलती है ’- फरहान अख्तर

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फरहान अख्तर बेहद कम मौकों पर ही पर्सनल लाइफ पर बात करते हैं। लेकिन फिल्म ’द स्काई इज़ पिंक’ के प्रमोशन के दौरान फरहान ने अपनी पूर्व पत्नी अधूना भबानी से तलाक होने और अपनी बेटियों को उस बारे में बताने को लेकर भी बातें कहीं। बातचीत के दौरान जब फरहान से पूछा गया कि तलाक की खबर बेटियों को बताना कितना मुश्किल था? तो उन्होंने कहा कि कुछ भी आसान नहीं होता। ऐसा कुछ भी जो आप अपने बच्चों को बताना चाहते हों, लेकिन जानते हों कि वो इस बात को सुनना नहीं चाहेंगे, वो आसान नहीं होता। अगर आप अपने बच्चों के साथ सच्चे हैं, तो वो गूंगे या बेवकूफ नहीं हैं। वो उतना समझते हैं जितना हम और आप सोच भी नहीं सकते। व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी बात कहने के अलावा फरहान ने  फिल्म ‘द स्काई इज पिंक’ कि अलावा कई अन्य विषयों पर  बात की ।

द स्काई इज़ पिंक में प्रियंका चोपड़ा के साथ काम करने का कैसा एक्सपीरियंस रहा ?

प्रियंका और मैं पहले भी काम का चुके हैं और हर बार मज़ा ही आया। यह अलग बात है कि डॉन और दिल धड़कने दो में प्रियंका सिर्फ हीरोइन थी जबकि इस मूवी में प्रोड्यूसर की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। डॉन के समय मैं निर्माता था और अब  वो मेरी निर्माता हैं। साथ ही हम एक्टर के तौर पर भी साथ में काम कर रहे हैं। हमारे बीच का कम्फर्ट लेवर परदे पर भी दिखता है।

इस मूवी से आपने क्या अनुभव लिया?

द स्काई इज़ पिंक ने मुझे काफी हद तक बदलकर रख दिया। मैंने  फिल्म आनंद के उस संवाद को महसूस किया, जिसमें कहा गया था कि ज़िंदगी लंबी नहीं, बड़ी होनी चाहिए।

तूफान में आपका लुक अलग हटकर है। इसके लिये कितनी मेहनत करनी पड़ी?

तूफान में अपने लुक के लिये मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी है। अपनी डाइट को लेकर बहुत ही सावधान रहना पड़ता था। ट्रेनर का इतना कड़ा अनुशासन था कि पूछो मत।

अभिनेता और निर्माता के रूप में अपनी सफलता और असफलता के बीच कैसे संतुलन बनाते हैं?

कोई मूवी जब हिट होती है तो मुझे ही नहीं, पूरी टीम को मज़ा आता है क्योंकि सफलता के पीछे उनकी मेहनत भी छिपी है। असपफल होने पर डिप्रेशन भी सहना पड़ता है लेकिन अगर हम डिप्रेशन में चले जायेगें, तो सब खत्म हो जायेगा। उससे बाहर निकलना जरूरी है। इंडस्ट्री में ऐसा कोई नहीं है जिसकी सभी मूवीज़ चली हों। सफलता असफलता तो साथ साथ चलती है।

डायरेक्शन से दूरी क्यों बना रखी है?

मैंने हर वो काम किया, जो मैंने करना चाहा क्योंकि मुझे उसमें इंट्रस्ट था। एक्टिंग, सिंगिंग और डायरेक्शन सभी में खुद को आजमाया लेकिन हर काम की एक सीमा होती है और मैंने उसी सीमा तक ही काम किया। जब डायरेक्शन का दिल करेगा, तो जरूर करूंगा।

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