मैं बड़ी फिल्मों को छोटे बड़े बैनर से नही नापता – समीर

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मायापुरी अंक, 55, 1975

जस्सा वाला वाड़ी में फिरोज़ खान के घर पर तीसरे खान भाई अहमद खान उर्फ समीर से भेंट हुई। मैंने पूछा।

आपने अपना करियर सिम्मी और मुमताज जैसी अभिनेत्रियों के साथ शुरू किया था लेकिन अब तक सफलता न मिल सकने का क्या कारण है?

इस लाइन में आदमी तभी चलता है जब उसकी फिल्में चलती है। आज ‘अंधेरा’ चल रहा है तो लोग समीर के पास आ रहे है। पहचान रहे है। और अंधेरा से कामयाबी की किरण फूटने लगी है। बहुत जल्द मैं आपको नई फिल्म के बारे में बताऊंगा समीर ने कहा।

लेकिन ‘कैद’ में छोटी सी भूमिका लेने से क्या इसका आपकी नई साइन होने वाली फिल्मों पर असर पड़ेगा मैंने पूछा।

मुझे मालूम है कि कैद का रोल कोई एक्स्ट्रा भी कर सकता था लेकिन मेरे करने का कारण यह है कि मुझे आत्माराम ने अपनी अगली फिल्म के लिए बतौर हीरो साइन कर रखा है इसी के लिए वो रोल मैंने कर दिया।

हमें ऐसा लगता है। नई कैद बड़े बैनर की फिल्म है और आप छोटे बैनरों की फिल्म में काम करते है। इसलिए वह आपने स्वीकार की होगी मैंने कहा।

मैं बड़ी फिल्मों को छोटे बड़े बैनर से नही नापता कोई फिल्म बड़ी-छोटी नही होती फिल्म केवल अच्छी या बुरी होती है। रामसे ब्रदर्स अपने काम में किसी से कम नहीं है यह उन्होंने दो गज जमीन के नीचे और ‘अंधेरा’ से सिद्ध कर दिखाया है। इसीलिए मैं उनकी एक और फिल्म में काम कर रहा हूं। समीर ने कहा।

 

 


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Mayapuri

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