पचास साल पूरे और फिर भी वही बीवी?

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अन्य कई हैंगर की तरह, मुझे भी अपने सारे वैभव में सितारों को देखने के लिए होटलों और बंगलों के बाहर खड़े होने का अवसर मिला। और एक ऐसा अवसर जहां मैं कई घंटों तक बाहर खड़ा रहा, जब राकेश रोशन नामक एक नए स्टार का विवाह समारोह था, जिन्होंने जाने-माने फिल्म निर्माता जे.ओम प्रकाश की बेटी (गोद ली हुई बेटी) पिंकी से शादी की थी। मुझे नहीं पता था कि जिस युवक ने दूल्हे के कपड़े पहने हुए थे वह एक दिन मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त होगा।

अली पीटर जॉन

मुझे राकेश रोशन से मिलने और उनका इंटरव्यू लेने के लिए कहा गया था। मुझे अपने वरिष्ठ फोटोग्राफर श्री के.जी.सैमेल के साथ जाना था, जो अपनी प्रतिभा के लिए जाने जाते थे, लेकिन अपने इडीअसिंगक्रसी (पागल व्यवहार) के लिए अधिक जाने जाते थे। मुझे दिया गया पता जुहू में ‘लोटस’ बिल्डिंग था जिसे एयर इंडिया बिल्डिंग भी कहा जाता था क्योंकि इसमें एयरलाइन्स के कई पायलट और अधिकारी भी रहते थे। इसमें जो अन्य सितारे थे, वे थे महेंद्र संधू, जिनके बारे में गॉसिप प्रेस ने कहा था कि, वह धर्मेंद्र और एफटीआईआई की एक नई अभिनेत्री रंजीता कौर के लिए एकमात्र विकल्प थे!

राकेश रोशन 14वीं मंजिल पर रहते थे। मेरी अपॉइंटमेंट सुबह 11ः30 बजे थी और लिफ्ट आउट ऑफ ऑर्डर थी। मैं अभिनेता से मिलने के लिए दृढ़ था और मुझे आश्चर्य हुआ जब श्री सामेल जो मुझसे कम से कम 30 साल छोटे थे, उन्होंने मुझे 14वीं मंजिल तक पहुँचने के लिए अपने ट्रेक पर शामिल होने के लिए सहमत कर लिया। हम शोर्ट ब्रेक लेते रहे, मैंने कभी-कभी मिस्टर समेल के कैमरा बैग को चलाया और हमें अपनी मंजिल तक पहुंचने में 45 मिनट का समय लगा और जब राकेश रोशन ने हमें देखा, तो वह भड़क गए और हमसे पूछा कि क्या हम पूरे रास्ते चलते हुए आए हैं। एक तरह से वह सही थे क्योंकि हम दोनों ही बहुत बड़े पागल थे। राकेश (गुड्डू) के साथ यह मेरी पहली और अविस्मरणीय मुलाकात थी।

वह अभी भी सफलता की बुलंदियों पर थे और उन्होंने छोटी फिल्मों में दूसरी लीड और खलनायक की भूमिका निभाई। उन्होंने लोटस से अपने निवास को कविता नामक एक लगभग तुच्छ इमारत में बदल दिया था। और यह वही जगह थी जिसने उनके जीवन को बदल दिया था।

जिस तरह से उनका करियर आकार ले रहा था, उससे वह नाखुश थे और उन्होंने जो पहला कदम उठाया, वह था उनके महंगे विग्स और उनका नया ऑल बल्ड (गंजा) लुक न केवल उनके व्यक्तित्व के अनुकूल था, बल्कि उन्हें अपने खुद के बैनर, ‘फिल्मक्राफ्ट’ (उनके ससुर का बैनर ‘फिल्मीयुग’ था और जैसा कि उनके ससुर ने अपनी फिल्मों के सभी टाइटल अल्फाबेट ‘ए’ से शुरू किए थे, राकेश ने अपने सभी टाइटल अल्फाबेट ‘के’ से शुरू करने का फैसला किया) के मंचन जैसे साहसिक कदम भी उठाने पड़े।

उन्होंने एक निर्माता के रूप में शुरुआत की और कुछ ऐसी फिल्में बनाईं, जो बहुत अच्छी नहीं चल पाईं, लेकिन कुछ ही समय में, वह फिल्मों के निर्माता और निर्देशक थे, जिन्होंने बहुत अच्छा काम किया। यह इस स्तर पर था कि दक्षिण के एक संत और प्रतिभाशाली निर्देशक, के.विश्वनाथ उनके जीवन में आए और उन्होंने ‘कामचोर’ और ‘जाग उठा इंसान’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया (एकमात्र ऐसी फिल्म जिसका टाइटल ‘के से स्टार्ट नहीं था)। विश्वनाथ के साथ उनके नायक के रूप में काम करते समय राकेश ने उन्हें पहचान लिया और निर्देशक बनने की अपनी क्षमता पर कड़ी मेहनत की। और वह न केवल एक सफल निर्देशक बन गए, बल्कि दस सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों में भी पहचाने गए। खलनायक बने छोटे नायक ने आखिरकार बहुत लंबा सफर तय किया, खासकर जब उन्होंने ‘खून भरी मांग’,‘करण अर्जुन’,‘किंग अंकल’ और ‘कोयला’ जैसी फिल्में बनाईं।

उनके इकलौते बेटे, ऋतिक ने फिल्मों में काम करने में अपनी रुचि तब दिखाई जब वह सिर्फ 10 या 12 साल के थे, जब उन्होंने ‘भगवान दादा’ के निर्माण के दौरान अपने दादा, जे.ओम प्रकाश को असिस्ट किया। और रजनीकांत, जो फिल्म के हीरो थे, ने राकेश से कहा था कि ऋतिक एक दिन बहुत बड़े स्टार के रूप में काम करेंगे और रजनी ने जो भी कहा वह राकेश के दिमाग में रहा और वह उन विषयों की तलाश में रहे, जिनके साथ वह ऋतिक को लॉन्च कर सके और ‘कहो ना प्यार है’ के निर्माण के साथ उनकी भावुक खोज समाप्त हुई। राकेश फिल्म बनाने के दौरान आश्वस्त और घबराए हुए थे, लेकिन आखिरकार वह एक अच्छी फिल्म बनाने में सफल रहे, लेकिन उन्होंने महसूस किया कि अगर ऋतिक के करियर पर कोई फर्क पड़ा तो फिल्म को एक बड़ी हिट बनाना होगा।

मुझे वह शाम याद है जब राकेश के पास फिल्म का एक विशेष शो था और उन्होंने मुझे सन सिटी मल्टीप्लेक्स में देखने के लिए आमंत्रित किया था। मैंने इंटरवल तक फिल्म देखी और फिर मल्टीप्लेक्स से निकल कर एक टेलीफोन बूथ पर पहुंचा और राकेश को फोन किया और उनसे कहा, “आपके घर में सुपरस्टार पैदा हुआ है” और वह कहते रहे, “अली सच बोल रहा है न, देख मेरे खुशी के आंसू बह रहे है, प्लीज मुझे शो के बाद वापिस फोन करना।” मैंने राकेश को बताया, “अभी तू आराम कर, अब से ऋतिक राज करेगा।”

फिल्म की सफलता ने सुनिश्चित किया कि पिता और पुत्र दोनों के पास आराम करने का समय नहीं था। उन्होंने एक के बाद एक सफल फिल्मों में काम किया, जैसे ‘कोई मिल गया’ और ‘कृष’ फ्रैंचाइजी जो अभी भी अपने चर्म पर है।

राकेश बहुत सफल रहे हैं लेकिन उन्हें गंभीर समस्याओं का भी सामना करना पड़ा है। वह अंडरवल्र्ड द्वारा अपने जीवन पर किए गए एक हिंसक हमले का शिकार थे, लेकिन ‘मेरे परिवार और मेरे सभी शुभचिंतकों की प्रार्थनाओं के कारण बच गए’! फिर सिर्फ दो साल पहले, उन्हें कैंसर का पता चला था, जिस पर उन्होंने भी विजय प्राप्त की और उन्हें उद्योग के भीतर से कड़ी प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता का सामना करना पड़ा, जिसे उन्होंने भी दूर कर दिया, जिससे साबित होता है कि एक ईश्वर है और वह हमेशा अच्छे के साथ है।

राकेश के लिए सबसे बड़ी आशंका तब थी जब ऋतिक को ‘कहो ना प्यार है’ के निर्माण के दौरान अपने कैंसर के बढ़ने का पता चला था। ऐसा कहा जाता है कि जॉनी लीवर की प्रार्थनाओं ने ऋतिक को बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और ऋतिक उसके बाद किसी भी खतरे में नहीं पड़े।

राकेश जो अब लगभग 80 वर्ष के हैं, अभी भी बहुत फिट हैं और अपनी अगली फिल्म शुरू करने के लिए उत्सुक हैं, जो उनकी ‘कृष’ फ्रेंचाइजी की अगली कड़ी होगी।

राकेश इस उद्योग के जाने माने नाम हैं। वह बहुत कम बोलते है और किसी भी तरह के विवादों में शामिल नहीं होते है (एक समय को छोड़कर जब कंगना रनौत ने उन्हें ऋतिक के साथ अपनी लड़ाई में खींच लिया था)। राकेश के बहुत कम दोस्त हैं और उनके सबसे अच्छे दोस्त हैं जीतेंद्र, स्वर्गीय ऋषि कपूर, सुजीत कुमार और प्रेम चोपड़ा और अब जिंदगी उस तरह से नहीं बीत रही है, जब से पिछले साल ऋषि कपूर का निधन हुआ है और उनके बाकी सभी दोस्त बूढ़े हो गए हैं और अपना सारा समय घर पर बिता रहे हैं। रेखा, राकेश की सबसे अच्छी शुभचिंतकों में से एक रही है, जिसे वह गुड्डू कहती है और जब भी उन्हें उनकी आवश्यकता होती है, उनके साथ काम करती है और वह एकमात्र निर्देशक है जिसके लिए वह बिना किसी सवाल के माँ की भूमिका निभाने के लिए सहमत हो जाती है।

राकेश रोशन अपने पिता और महान संगीत निर्देशक रोशन की वजह से अपने और अपने परिवार के बारे में जानते हैं। उन्होंने अपने छोटे भाई राजेश रोशन की संगीत के बिना कोई फिल्म नहीं बनाई है।

वह ऋतिक और अपने जीवन और अपने करियर के साथ काम करने के लिए बहुत चिंतित हैं। वह एक स्ट्रिक्ट फॅमिली मैन है और अपने जीवन अपने तरह से जीना पसंद करते है, बिना इस बात की परवाह किए कि उन्हें किस बारे में चिंतित नहीं होना चाहिए। वह अब भी पिंकी के साथ बहुत शांतिपूर्ण जीवन जी रहे है और कहते है कि अगर कोई और जीवन होता, तो भी वह पिंकी और उनके बच्चों के साथ ईस जीवन को जीना पसंद करते।

जिन्दगी हो तो ऐसी हो, ना कोई ज्यादा खुशी, ना कोई ज्यादा गम, बस चलते रहो और रोशनी फैलाते रहो क्योंकि इसी को जीना कहते है, इसी का नाम जिन्दगी है।

अनु-छवि शर्मा


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