अमिया चक्रवर्ती की खोज – दिलीप कुमार

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मायापुरी अंक, 57, 1975

पहले जमाने में अभिनेता निर्देशक का कितना आदर करते थे, इसकी एक मिसाल आपको दिलीप कुमार और स्वं. अमिया चक्रवर्ती की एक घटना से भलीभांति मालूम हो जाएगी। जब कि आज तो निर्देशकों की गिनती भी स्टार्स के चमचों में होती है।

दिलीप कुमार स्व. अमिया चक्रवर्ती की खोज है। उन्हें अभिनय का शौक था। इसलिए वह बॉम्बे टॉकीज (मालाड) में देविका रानी से मिलने आया करते थे। आखिर एक दिन देविका रानी ने अमियाजी को बुलाया और कहा, इस लड़के को अगर आप काम दे सकते हो तो दे दे।
अमिया चक्रवर्ती दिलीप कुमार को अपनी कैबिन में लेकर आए दिलीप कुमार से कुछ देर बातें कीं और कह दिया अब तुम जा सकते हो।
दिलीप कुमार ने उनके मूड को देखकर समझा कि उसकी छुट्टी हो गई। अब बॉम्बे टॉकीज के दरवाजे उस पर नही खुलेंगे। लेकिन अभी उन्हें एक पत्र मिला और दिलीप कुमार को ज्वार भाटा में हीरो बना दिया गया जिसके लिए दिलीप कुमार उन के इतने आभारी हुए कि जब कभी मौका मिलता तो यही कहते मैं आज जो कुछ हूं, अमिया जी की वजह से हूं उऩ्होंने ही मुझे स्टारडम दिलवाया है।

Amiya Chakravarty
Amiya Chakravarty

दिलीप कुमार अपने उस गुरू को कभी भूल न सके और जब दिलीप कुमार का समय आया तो उन्होंने अमिया चक्रवर्ती की अपनी फिल्म ‘दाग’ में फ्री काम करके अहसान का बदला चुकाया इसके बावजूद दिलीप कुमार अमिया चक्रवर्ती के सामने कभी सिगरेट नही पीते थे। अमिया जी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने स्वयं दिलीप कुमार को सिगरेट दी और कहा शर्म करने की जरूरत नही है। तुम मेरे सामने सिगरेट पियो मुझे कोई आपत्ति नही है।

इसके बाद दिलीप कुमार ने अमिया जी के सामने सिगरेट पीनी शुरू की। लेकिन आज न ऐसे गुरू रहे हैं और न दिलीप कुमार जैसे शिष्य वक्त ने इस इंडस्ट्री को इस कदर कमर्शियल कर दिया है कि लोग अपनी औकात ही भूल गए है।


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Mayapuri

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