फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ता दलदल

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मायापुरी अंक 12.1974

जुहू के खान भाई परवीन बॉबी को बहन कहते है और उसके साथ हर किस्म के उत्पातत मचाते है मगर अपनी सगी बहन दिलशाद को सात तालों में छिपा कर रखते है। उन्होनें दिलशाद की शादी बम्बई से दूर करी आप यकीन कीजिये, सुंदरता में दिलशाद परवीन बॉबी से कई दर्जे ऊपर है। पिछले वर्ष फिरोज के घर एक पार्टी हुई। फिरोज के परिचित एक पत्रकार ने फिरोज से इतना ही पूछा था- दिलशाद कैसी है ? कि फिरोज ने उसकी पिटाई कर दी। अपने ही घर में बुलाए गये मेहमान के साथ ऐसा व्यवहार है न शर्मनाक काम (यूं बाद में फिरोज ने इसके लिए मांफी भी मांगी थी।

अब लाख टके का सवाल उठता है कि आखिर फिल्मी लोग अपनी बहन-बेटियों को फिल्मी हंगामों से दूर क्यों रखना चाहते है? इसलिए कि इस इंडस्ट्री में किसी लड़की (और विशेष तौर पर सुंदर लड़की) का अकेले घूमना सुरक्षित नही है। यहां ऐसे-ऐसे भेड़िये है जो ऐन आपकी नाक तले से आपकी बहन-बेटी को फुसला कर अलग ले जाते है। इस इंडस्ट्री के बारे में श्रीमान मुमताज यानी मयूर माधवानी के कमेंट और फरमाइये It is a lousy Industry full of people. ऐसी हालत में हीरोइनें क्या यहां दिल से काम करना चाहेंगी ? जी नही कुल मिला कर हमारी फिल्म इंडस्ट्री एक दलदल है जिसकी तह में सोना बिछा है। इस दलदल में घुस कर हीरोइन सोना तो इकट्ठा करती है मगर उनकी नजर उस राजकुमार पर रहती है जो उन्हें इस दलदल से बाहर निकाल ले जाएगा।

 

इंडस्ट्री की हालत इतनी बदनाम हो चुकी है कि हीरोइन के भावी पति शादी की अपनी पहली शर्त ही यही रखता है- शादी के बाद तुम फिल्मों में काम नही करोगी, हीरोइन भी इस शर्त को सहर्ष स्वीकार कर लेती है।

हमारी इंडस्ट्री में बहुत कुछ भेड़-चाल भी चलती है। यदि डिम्पल ने शादी कर ली तो लगे हाथों राखी, जया, रेखा (अब तलाक शुदा) भी शादी कर लेगी। मुमताज की शादी के बाद वहीदा। सिम्मी भी मंडप में जा बैठी। इतना ही नही, भेड़-चाल की हालत यह है कि यदि राखी ने कन्या को जन्म दे दिया तो जया और डिम्पल भी मुन्नियां ही बनायेंगी मुन्ने नही आजकल शादी के बाद फिल्मों से सन्यास लेने की भेड़-चाल फैशन चला हुआ है। डेढ़ वर्ष के अन्दर इंडस्ट्री एक दर्जन के लगभग टाप-क्लास हीरोइनें खो बैठी डिम्पल, जया, लीना (अंतिम दोनों केवल निर्माणधीन फिल्में पूरी कर रही है) सुना है राखी अपनी फिल्म छोड़ने की घोषणा पर राख डाल कर फिल्मों में आ गई है. इस समय हेमा, जीनत शबाना और परवीन के बल पर इंडस्ट्री टिकी है। इनमें से दो हीरोइन शादी करके फिल्म-जगत छोड़ जायें तो जाने कितनी फिल्मों का बंटाधार हो जाएगा

यूं देखा जाए तो उभरती हीरोइनों के लिए यह स्थिति स्वर्णिम है। आज किसी हीरोइन में अभिनय-क्षमता हो तो कॉन्ट्रैक्ट मिलते देर नही लगेगी शबाना आज़मी ने एक ‘अंकुर’ के बल पर पंद्रह दिन में पंद्रह फिल्में साइन की। क्या दो वर्ष पहले यह संभव था ?

डारविन ने कहा था। विनाश दो प्रकार से होता है; बाहरी संकट, अंदरूनी संकट। ऐसा लगता है, फिल्म इंडस्ट्री को हानि बाहर से नही, अपने अंदरूनी सेट-अप से पहुंचेगी। इंडस्ट्री विनाश की स्थिति तक न पहुंच जाये इसके लिए कुछ कदम उठाना जरूरी है।


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Mayapuri

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