मूवी रिव्यू: प्रेम में धोखा खाई एक अबला का सफर है ‘मुंबई सैंट्रल’

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रेटिंग**

 

गरीबी किसी को किस हद तक नीचे गिरा सकती है अगर देखना हैं तो निर्देशक करण राधेकृष्णा की फिल्म ‘मुंबई सैंट्रल’  देखने के बाद पता चलेगा कि किस प्रकार एक लड़की प्रेम में धोखा खाते हुये किस हद तक नीचे गिर सकती है ।

कहानी

राजश्री देशपांडे पहाड़ की एक लड़की गौरी एक ऐसे गरीब किसान की बेटी है जिसके पिता पर भारी कर्ज है। गौरी को एक दिन एक अजनबी मिलता है जो उसे  अपने प्यार के जाल में फंसाते हुये सुनहरे सपने दिखाकर मुबंई लेजा कर उसे बेच देता है। बाद में अपना तन बेचते बेचते गौरी एड्स का शिकार हो जाती है। अस्पताल में इलाज करवाते हुये उसे पता चलता है कि वो कुछ ही दिनों की मेहमान है तो इसके बाद वो अपने गांव आ जाती है। यहां आकर उसे पता चलता है कि उसकी छोटी बहन से काई लड़का शादी करना चाहता हैं और शादी कर उसे अपने साथ शहर ले जाना चाहता है। गौरी पहले तो अपने बाप का सारा कर्ज चुकाती हैं और जब वो उसे लड़के को देखती हैं जो उसकी बहन से शादी करना चाहता है तो उसे झटका लगता हैं क्योंकि वो वही था जिसने कुछ साल पहले उसकी जिन्दगी खराब की थी। लिहाजा वो अपनी बहन को बचाने के लिये उस शख्स का पीछा कर उसे टैंक से धक्का दे मार डालती है ।

निर्देशन

बार बार दोहराई गई इस कहानी पर निर्देशक करण राधाकृष्णा ने एक साधारण सी फिल्म बनाई है । फिल्म की कथा और पटकथा दोनों ही साधारण है। शुरू से अंत तक फिल्म में न कोई थ्रिल है और न ही ड्रामा, लिहाजा फिल्म शुरू होती है और साधारण तरीके से अपने अंत तक पहुंचती है। फिल्म का संगीत भी औसत दर्जे का साबित होता है ।

अभिनय

राजश्री देशपांडे इससे पहले भी कई फिल्मों में अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन कर चुकी है। फिल्म में उसने अपनी भूमिका के तहत पूरा न्याय किया है। उसके अलावा चैतन्य अदीप, तारिक शाह तथा ब्रिजेश तिवारी आदि कलाकारों ने भी अपन अपनी भूमिकाओं को सही दिशा दी है।

क्यों देखें

इमोशनल फिल्में पसंद करने वाले दर्शकों को फिल्म पंसद आयेगी ।

 


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Mayapuri

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