फिल्म ‘स्पार्क’

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निर्माता आर एस यादव और नरेश गुप्ता तथा निर्देशक वी के सिंह की फिल्म ‘स्पार्क’ क्रिमिन्ल्स मे फंसे एक ऐसे शख्स की कहानी है जो इनके बीच रहते हुए अपनी पहचान तलाश रहा है। लेकिन अच्छे कलाकारों के होते हुए भी ये तलाश कमजोर साबित होती है।
रजनीश दुग्गल एक ऐसा अनाथ लड़का है जिसके माता पिता को बचपन में ही किसी बड़े आदमी आशुतोष राणा ने अपने आदमी गोविंदनाम देव के हाथों मरवा दिया था। लेकिन रजनीश को उन्हीं के साथी संजय मिश्रा ने बचाकर किसी को दिया था। बाद में उसे रणजीत पालते हैं। हांलाकि रणजीत ने रजनीश को बाप से बढ़कर प्यार दिया लेकिन आज भी उसके सामने उस आदमी की तस्वीर है जिसने उसे एक ओरत को दिया था। एक दिन रजनीश शहर के बड़े डॉन हिटलर आशुतोष के भान्जे से पंगा ले लेता है। इसलिए रणजीत उसे जर्मनी भेज देता हैं वहां उसे वो लड़की शुभाश्री गांगुली मिल जाती है जिसे वो प्यार करता था। शुभा भी उसे प्यार करने लगती है। एक दिन उसे पता चलता है कि उसके पिता बीमार है तो वो वापस इंडिया आता है। तब उसे एक दिन वो आदमी संजय मिश्रा दिखाई देता है। उससे उसे सारी बातें पता चलती है। सजंय और गोविंद उसे हिटलर के खिलाफ यूज करना चाहते हैं। दरअसल जिला परिषद के चुनाव में इस बार गोविंद भी खड़ा है उधर हिटलर ने भी अपने किसी आदमी को खड़ा किया हुआ है। तब गोविंद हिटलर के पिता राजमणी के सामने शर्त रखता है कि बरसो पहले उनके कहने पर उसने जिस परिवार को खत्म किया था उसका एक बच्चा बच गया था जो आज अपने मां बाप के हत्यारों के खून का प्यासा है। वो उसके पास है। इसलिए वे अपने बेटे हिटर को कहे कि वो चुनाव में अपने आदमी को हटा ले। चुनाव जीतने के बाद वो रजनीश को उनके हवाले कर देगा। लेकिन अंत में बुराई की हार और अच्छी की जीत होती है।

फिल्म को देखते हुए शिद्दत से एहसास होता है कि जो दिखाने की कोशिश की जा रही है वो डायरेक्टर दिखा नहीं पा रहा है। लिहाजा कमजोर निर्देशन फिल्म का माइनस प्वाइंट साबित हुआ। जहां तक कलाकारों की बात की जाये ता जहां रजनीश दुग्गल और शुभाश्री गांगुली पूरी तरह से बेअसर रहे वहीं गोविंद नामदेव और आशुतोष, संजय मिश्रा और रणजीत अपने तर्जुबे से फिल्म को संभालते दिखाई दिये। मनोज जोशी तथा रति अग्निहोत्री आदि कलाकारों का बुरी तरह वेस्ट किया गया। फिल्म में इतनी त्रुटियां हैं कि जर्मनी जैसी विदेशी लोकेशन्स भी प्रभावित नही कर पाती। लिहाजा ये कहने में जरा भी संकोच नहीं हो रहा कि स्पार्क, फ्यूज साबित हुई।


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Mayapuri

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