फिल्म ‘तमंचे’

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Tamanchey-poster

दो मेल फीमेल अपराधियों की कहानी इससे पहले कितनी ही फिल्मों में दिखाई जा चुकी हैं। इसी तर्ज पर निर्देशक नवनीत बहल की फिल्म ‘तमंचे’ को भी कह सकते हैं। इस तरह की फिल्मों में पहले दोनों अपने आपको दूसरे से श्रेष्ठ बताने की चेष्टा करते हैं उसके बाद उनके बीच प्यार होता है।

निखिल द्विवेदी और रिचा चड्डा अपराधी है। और दोनो ही पुलिस से बचने के लिये भाग रहे हैं। रिचा दिल्ली के आसपास अफीम और हीरोइन आदि की सप्लाई करती है और निखिल एक छोटे से क्षेत्र का किडनेपर है। रिचा पहले तो निखिल को एक जेबकतरा टाइप अपराधी समझती हैं लेकिन फिर वो उससे प्रभावित होने लगती है। लेकिन एक दिन जब रिचा गायब हो जाती है तो निखिल उसे ढूंढने निकलता है। उसके पता चलता है कि रिचा एक गैंगस्टर दमनदीप सिद्धू की रखैल हैं तब वो किसी तरह उसके गैंग में शामिल हो जाता है। और जब एक दिन सिद्धू को ये बात पता चलती है तो आगे क्या होता है ?

जैसा कि पहले बताया है कि इस कहनी पर पहले भी कुछ फिल्म बन चुकी है। जहां तक इस फिल्म की बात की जाये तो इसके बारे में बस यही कहा जा सकता है कि बस संतोषजनक मसाला मूवी है। क्योंकि फिल्म शुरू से अंत तक न जाने कितनी बार टूटती है जुड़ती है। निखिल द्विवेदी एक ऐसा कलाकार है जिसकी किस्मत उसका साथ नही दे रही। लिहाजा वो एक बार फिर फेल साबित होता है। रिचा चड्डा इससे पहले की फिल्मों अभिनय के साथ अंग प्रर्दशन के जोहर भी दिखा चुकी हैं। इस फिल्म में भी उसने उदारता से अंग प्रर्दशन किया है। नया अभिनेता दमनदीप कुछ नहीं कर पाया। हालांकि फिल्म ऐसा कुछ भी नहीं जिसके बारे में कुछ कहा जा सके। फिर भी अगर वक्त है तो टाइम पास के लिए फिल्म देखी जा सकती है।


Mayapuri