लग गई आग दीवाली में…जब घर मे नही हो राशन तो कैसे जलेंगे पटाखन?

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लग गई आग दीवाली में

हिंदी सिनेमा का दीवाली से बड़ा पुराना रिश्ता रहा है। एक समय था जब दीवाली नाम से फिल्मों का शीर्षक तक रखा गया था ( ‘घर घर मे दीवाली- और ‘दीवाली की रात’)। आज आलम यह है कि पिछले पांच दिन में हमने पंद्रह फिल्म वालों से फोन पर जानना चाहा है कि क्या वे दीवाली की तैयारी कर रहे हैं? जवाब सबका रूखा सा ही रहा। एक संगीतकार ने तो गाना गाकर कहा- ‘घर मे नही दाने बीवी चली भुनाने…।

एक निर्माता ने कहा ‘यूनिट के सब लोग हमसे उम्मीद करते हैं कि मैं कुछ शुरू करने वाला हूं। लोगों की उम्मीद है हमसे। लेकिन, मैं किसे अपनी फटी चड्ढी दिखाऊँ!’ उनका तात्पर्य यह था कि 8 महीने से वो भी सबकी तरह ही बेरोजगार हैं। ‘इस कोरोना ने कहीं का नहीं छोड़ा है। स्पॉटबॉय और प्रोड्यूसर सबकी हालात एक जैसी है। हमारे दूसरे कारबार भी बंद हैं। फैक्ट्री में कमाता था, फिल्मों में लगाता था।वो काम भी बंद पड़ा है। किसको कहूं?…. आप भी मेरा नाम नहीं छापना प्लीज। इज्जत ढकी रहने दीजिए।

लग गई आग दीवाली में

बीते साल दीपावली की भविष्यवाणी करते हुए एक ज्योतिषी सुब्रत बनर्जी ने कहा था कि फिल्म इंडस्ट्री में लक्ष्मी वाहन की चाल वक्री हो गई है। सचमुच फिल्मो में पैसा लगाने वालों की तुलना लक्ष्मी-वाहन (यानी-उल्लू से की जाती रही है। मेहनतकस और ईमानदारी का पैसा लगाकर फिल्में नहीं बनाई जाती। यहां शौकीन और क्रेजी लोग ही फिल्म ‘मेकिंग का जुआ’ खेला करते थे। तब, सबको सबका ख्याल था। अब, जबसे इंडस्ट्री में कारपोरेट जगत आगया है, कोई किसी को जानता तक नहीं है। मदद की तो बात ही बेमानी है।

पटाखों से भी बॉलीवुड का गहरा रिश्ता है। अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, हृतिक रोशन जैसे सितारे शूटिंग पर आतिशबाजी करते जल चुके हैं। तमाम सितारे निजी जिंदगी में पटाखे बाजी (गॉसिप) में बने रहना बहुत पसंद करते हैं। लेकिन, इस साल दोनों तरह की आतिस बाजी करने वालों के घरों में निराशा छाई हुई है। सबके बंगले पर कोरोना रूपी मनहूसियत का साया है।

लग गई आग दीवाली में

बच्चन परिवार ने पहले ही इस साल में कोई त्योहार न मानाने का फैसला किया हुआ है। शाहरुख के घर मे पत्नी गौरी खान को खुश करने के लिए जो फुलझड़ियां जलती थी, वो अब इस साल नही जलेंगी। उनके बच्चे पिछले साल ही पटाखों से दूर रहे थे। वे अब बड़े हो गए हैं। सिर्फ अवराम के लिए अगर करण जौहर कुछ छुरछुरी लेकर आजाएं तो पता नहीं। इनकी दीवाली त्योहारी नहीं, व्योहारी होती है। बड़े सितारे धंधेबाज होते हैं। वे अपने धर्म की मान्यताएं तोड़कर दूसरे के बच्चों को मिठाई खिलाने पहुंच जाते हैं।

लोगों का कहना है -त्योहार है घर मे दिए जलाएंगे। महंगाई की मार ने सबकी कमर तोड़ दिया है। इतना पैसा नही है कि पटाखों पर खर्च किया जाए। सचमुच जब घरों से दीवाली के दिये गायब होते लग रहे हैं तो पर्दे से भी गायब ही समझिए पहले पटाखों को आग लगती थी इस साल तो दीवाली में ही आग लग गई है।


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Mayapuri

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