फिरोज खां की नयी आदत      

1 min


firoz

 

मायापुरी अंक 48,1975

‘धर्मात्मा’ थोड़ी बहुत चल क्या गई है। फिरोज खान का दिमाग सातवें आसमान पर है। निर्माताओं को अपने पीछे-पीछे चक्कर लगवाते हैं। सैट पर लेट आना उनकी आदत सी हो गयी है।

हाल ही में एक फिल्म की (जिसके निर्देशक ब्रिज हैं और फिरोज लीना चंदावरकर के साथ हीरो हैं) शूटिंग सुबह नौ बजकर तीस मिनट पर थी लेकिन फिरोज़ का कहीं पता नहीं था। कई बार उनके घर पर टेलीफोन किया गया, लेकिन कोई भी ढंग से उत्तर नहीं मिला। दोपहर के दो बजे गये तो तंग आकर ब्रिज ने शूटिंग पैकअप कर दी और निर्माता को बोला कि फिरोज को साफ-साफ बोल दें, काम करना है तो ठीक ढंग से करे, नहीं तो दूध से मक्खी की तरह फिल्म से निकाल बाहर कर दिया जायेगा अखिरकार ब्रिज किसी से कम तो नहीं, उसने भी विक्टोरिया न.203 और ‘चोरी मेरा काम’ जैसी फिल्में निर्मित की हैं। फिरोज शायद यह भूल गये थे कि अगर वह निकाल दिये गये तो कोई भी हीरो ब्रिज के लिए काम करने को तैयार हो जायेगा।

SHARE

Mayapuri