फ्लैश बैक – mayapuri https://mayapuri.com Latest Bollywood Hindi News Mon, 25 Nov 2019 09:54:24 +0530 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.3 https://i0.wp.com/mayapuri.com/wp-content/uploads/2018/02/mayapuri-favicon.png?fit=32%2C32&ssl=1 फ्लैश बैक – mayapuri https://mayapuri.com 32 32 142476063 उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी मर्दों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर बिताई – असल योद्धा शौकत कैफ़ी  https://mayapuri.com/shaukat-kaifi-turns-left-and-then-leavesshe-walked-shoulder-to-shoulder-with-man-all-her-life-a-true-fighter-with-a-free-spirit/ https://mayapuri.com/shaukat-kaifi-turns-left-and-then-leavesshe-walked-shoulder-to-shoulder-with-man-all-her-life-a-true-fighter-with-a-free-spirit/#respond Mon, 25 Nov 2019 09:28:23 +0000 https://mayapuri.com/?p=216681 शौकत कैफ़ी 

अली पीटर जॉन शौकत कैफी की 22 नवंबर को 91 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो गई । वो लंबे समय से बीमार चल रही थी। शौकत प्रतिष्ठित कवि कैफी आज़मी की पत्नी,शबाना आजमी और बाबा आजमी की मां, जावेद अख्तर और तनवी आज़मी की सास,फरहान अख्तर और जोया अख्तर की नानी और तब्बू की […]

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शौकत कैफ़ी 

अली पीटर जॉन

शौकत कैफी की 22 नवंबर को 91 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो गई । वो लंबे समय से बीमार चल रही थी। शौकत प्रतिष्ठित कवि कैफी आज़मी की पत्नी,शबाना आजमी और बाबा आजमी की मां, जावेद अख्तर और तनवी आज़मी की सास,फरहान अख्तर और जोया अख्तर की नानी और तब्बू की दादी थी. मेरी शौकत कैफ़ी और अब्बास साहब से काफी अच्छे रिश्ते थे। वो अब्बास साहब को भाईजान कह कर बुलाती थी और मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे अब्बास साहब, कैफी आजमी और शौकत कैफ़ी के लिए काम करने का मौका मिला जहां मैं इन लोगों के घर किताबें और आर्टिकल्स पहुंचाया करता था।

इन्हीं कामों के चक्कर में मुझे इतने महान लोगों से मिलने का मौका मिला। मेरी मुलाकात कैफी आजमी से हुई और तब मैं इस जोड़े के बारे में और अच्छे तरीके से जान पाया। कैफी से मिलने की वजह से मुझे भारत में लेफ़्टिस्ट मूवमेंट के बारे में भी काफी कुछ पता चला। मुझे यह समझ में आया कि थिएटर और साहित्य का  लेफ़्टिस्ट मूवमेंट में क्या योगदान है। मुझे इस जोड़े के के साथ उनके जानकी कुटीर के छोटे से घर में समय बिताने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस घर का समुद्र की तरफ रुख था। इस घर में कोई महंगे  नहीं बल्कि जीवन जीने के लिए जरूरतों के  सामान थे और साथ-साथ अच्छी कविताएं और अच्छा माहौल था ।  इसी घर में  मैं पहली बार उस कॉलेज गर्ल से मिला था जो ‘फासला’ फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली थी। यह फिल्म अब्बास साहब इसलिए बना रहे थे क्योंकि उन्होंने 12 साल की शबाना को यह वादा किया था कि वो उन्हें अभिनेत्री के तौर पर बॉलीवुड में लॉन्च करेंगे।

शौकत कैफ़ी 

शौकत और कैफी की कहानी एक काल्पनिक कहानी जैसी है। शौकत एक युवा लड़की थी जो  कैफी आज़मी द्वारा लिखी गई गई रोमांटिक और क्रांतिकारी कविताओं के प्यार में पड़ गई थी। कविताओं  के प्रति उनका प्यार इतना बढ़ता चला गया कि वो इन कविताओं के कवि के ही प्यार में पड़ गई और नतीजतन दोनों की शादी हो गई। शौकत ये जानती थी कि लेफ़्टिस्ट और क्रांतिकारी विचार के कवि से से से से शादी करना आसान नहीं होगा पर फिर भी उन्होंने शादी की। यह नवविवाहित जोड़ी जोड़ी सेंट्रल बॉम्बे के मदनपुरा के छोटे से रूम में रहा करती थी। यह जगह हाउसिंग सोसाइटी की तरह थी जहां पर कम्युनिस्ट विचारधारा के लेखक, कवि, अभिनेता और यहां तक कि कि नेता तक रहते थे। यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि ऐसी स्थिति में जहां सिर्फ एक शौचालय और एक नल हो वहां इस जोड़े ने कैसे गुजारा किया होगा।

कैफी के अंदर जो कवि थे उन्होंने शौकत को इंस्पायर किया कि वो समाज और देश के बदलाव के लिए अपने नाटकों के द्वारा कुछ संदेश दे पाएं। उन्होंने अपने नाटकों में बहुत ही महत्वपूर्ण और मजबूत किरदार निभाया हैं। कैफी ने शौकत के लिए एक कविता लिखी थी ‘उठ मेरी जान’ वो कविता ना सिर्फ शौकत को बल्कि सभी औरतों को जगाने की कविता थी कि वो सिर्फ घर पर सजावट के लिए नहीं है बल्कि उन्हें घर से निकलना चाहिए, मर्दों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर चलना चाहिए अगर उन्हें अपना लक्ष्य पाना है तो। इस कविता ने शौकत की जिंदगी बदल दी और शौकत ने जिंदगी बदल दी और शौकत ने शौकत की जिंदगी बदल दी और शौकत ने और शौकत ने कई और औरतों की जिंदगी बदल दी। शौकत ने सभी महिलाओं को यह संदेश दिया कि उन्हें उन मर्दों के चंगुल से निकलना है जो उन्हें उनकी इज्जत नहीं दे सकते जिसकी वो योग्य हैं। वह एक कविता आज भी औरतों के हक और लड़ाई के लिए एंथम (गान) माना जाता है।

शौकत कैफ़ी 

शौकत ने अभिनय को करियर चुना और और पृथ्वीराज कपूर और आईपीटीए के नाटकों में मुख्य और  मजबूत किरदार निभाया। शौकत  वो अभिनेत्री थी जिन्होंने ‘गर्म हवा’, ‘उमराव जान’ सहित  अपनी कई और फिल्मों के द्वारा समाज बदलाव लाया। इन फिल्मों में उन्होंने एक मजबूत महिला का किरदार निभाया था। जब शबाना को लगा कि उन्हें एक ही तरह के किरदार करने को मिल रहे हैं तो उन्होंने उन्होंने यहां से कदम पीछे कर लिया और अपने पति और अपनी बेटी पर ध्यान केंद्रित कर लिया। शबाना आज जो कुछ भी हैं वो अपनी मां के मजबूत  मार्गदर्शन की वजह से हैं। शबाना के पिता एक महान लेखक थे पर फिर भी उन्होंने अभिनय को अपना करियर चुना यह उनकी मां के बदौलत ही हैं।

ये 2000 की बात है, जब उनमें उम्र से जुड़ी  बीमारियों के पहले लक्षण दिखने लग गए थे। मैं उनसे  जानकी कुटीर में डॉ आर.के.अग्रवाल की क्लीनिक में  नियमित रूप से मिलता था जहां वो बड़े ही सभ्य तरीके के परिधान में आया करती थी जो उनके उम्र के साथ काफी जंचता था।

शौकत कैफ़ी 

कुछ बहुत अच्छा तब हुआ, जब उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी ‘कैफी और मैं’ यह बेस्टसेलर किताबों में से एक रही है, जिसका जावेद अख्तर ने बाद में नाट्य  रूपांतरन भी किया था। इसमें शबाना ने अपनी मां का और जावेद अख्तर ने कैफी का किरदार निभाया था। ‘कैफी और मैं’ नाटक को मेरे दोस्त रमेश तलवार ने निर्देशित किया था और यह नाटक भारतीय थियेटर की दुनिया में ब्लॉकबस्टर की दुनिया में ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। दुनिया के प्रमुख देशों में इसका मंचन भी किया गया था। इस नाटक के प्रस्तुतियों के दौरान ही शौकत को अंतिम बार  स्वस्थ और अपने सुसज्जित वेशभूषा,में देखा गया था।

उसके बाद वो काफी बीमार पड़ गई थी। पिछले 5 सालों से वह बिस्तर पर ही थी। शौकत कैफ़ी ने मौत से काफी लड़ाइयां लड़ी पर वो  कहते हैं न कि इंसान छोटा या बड़ा, मौत के सामने सब हार मान जाते हैं। अगर जीवन है तो मृत्यु भी अटल है. उन्होंने 22 नवंबर को शाम 5:00 बजे अंतिम सांस ली और अपने पति की तरह उन्होंने यह पहले ही कह दिया था कि उनकी  मृत्यु के बाद कोई रस्मो रिवाज ना किए जाएं और उनको वहीं पर दफनाया जाए जहां पर आम लोगों को दफनाया जाता है.  कैफी साहब को भी सांताक्रुज के एक  बहुत ही साधारण से कब्रिस्तान में दफनाया गया था और शौकत को भी उसी कब्रिस्तान में दफनाया गया है। पर मुझे यह नहीं पता कि दोनों के कब्र आसपास है या नहीं क्योंकि है या नहीं क्योंकि कब्रिस्तानों में जगह की बहुत कमी होती है।’

शौकत कैफ़ी 

मेरे दूसरे गुरु देव आनंद मुझसे हमेशा पूछते थे कि मौत के बाद भी एक और जिंदगी क्यों नहीं मिलती और मैं यह सोच लगता था कि सारे  लेफ़्टिस्ट्स जिन्हें अलग-अलग कब्रिस्तान में दफनाया गया है, उनको दूसरी जिंदगी क्यों नहीं मिल सकती जहां वो मरने के बाद भी समानता, भाईचारा और  स्वतंत्रता के लिए अपनी लड़ाई जारी रख सकें।

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क्या इम्तियाज अली मधुबाला को फिर से ‘जिंदा’ करने के अपने मिशन में कामयाब हो पाएंगे?  https://mayapuri.com/will-imtiaz-ali-succeed-in-his-mission-to-bring-back-madhubala-alive-%e0%a4%87%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%80/ https://mayapuri.com/will-imtiaz-ali-succeed-in-his-mission-to-bring-back-madhubala-alive-%e0%a4%87%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%80/#respond Fri, 22 Nov 2019 11:25:11 +0000 https://mayapuri.com/?p=216077 इम्तियाज अली

अली पीटर जॉन बायोपिक के इस दौर में मधुबाला के ऊपर बायोपिक के बारे में हर कोई सोच रहा है और यहां तक कि बहुत से बड़े बड़े  फिल्ममेकर्स भी इस पर लंबे समय से काम कर रहे हैं और अब लगता है कि यह असंभव काम शायद इम्तियाज अली संभव करने वाले हैं। इम्तियाज […]

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इम्तियाज अली

अली पीटर जॉन

बायोपिक के इस दौर में मधुबाला के ऊपर बायोपिक के बारे में हर कोई सोच रहा है और यहां तक कि बहुत से बड़े बड़े  फिल्ममेकर्स भी इस पर लंबे समय से काम कर रहे हैं और अब लगता है कि यह असंभव काम शायद इम्तियाज अली संभव करने वाले हैं। इम्तियाज अली ने  पिछले एक दशक में काफी अच्छी अच्छी फिल्में बनाई है

 इम्तियाज अली

हालांकि इम्तियाज ने अभी तक मधुबाला की बायोपिक के बारे में कोई घोषणा नहीं की है। इम्तियाज ने हाल ही में अपनी नई फिल्म की शूटिंग खत्म की है और मधुबाला के जीवन पर बनने वाली बायोपिक पर काम करना शुरू कर दिया है। इम्तियाज ने इस फिल्म के लिए मधुबाला के  रिश्तेदारों से इसकी अनुमति लेना जरूरी नहीं समझा और ऐसा लग रहा है कि अब आगे उनके लिए  इस पर काम करना थोड़ा मुश्किल हो जाएगा। मधुबाला की एक बहन ने पहले ही ऑब्जेक्शन कर दिया है इस फिल्म पर। मधुबाला की और भी तीन बहनों ने कहा कि उनसे अनुमति के लिए किसी ने भी बात नहीं की है। इम्तियाज अली को इस बारे में सोचना चाहिए क्योंकि आगे चल के मधुबाला के रिश्तेदार या दोस्त अगर कुछ ऑब्जेक्शन करते हैं तो इससे फिल्म पर, फिल्म के प्रोड्यूसर पर और उनके जैसे सेंसिटिव डायरेक्टर पर बुरा असर पड़ेगा।

 इम्तियाज अली

और भी दिक्कतें आ सकती हैं इस विषय पर फिल्म बनाने में। मधुबाला से जुड़ी कौन सी पहलु वो फिल्म में दिखाएंगे और कौन सी नहीं दिखाएंगे? कैसे वो मधुबाला के पिता अत्ताउल्लाह खान के कैरेक्टर को फिल्म में नहीं दिखाएंगे जिन्होंने मधुबाला के जीवन में और करियर में बहुत महत्वपूर्ण किरदार निभाया है? कैसे अत्ताउल्लाह खान को भूल सकते हैं इस फिल्म में जो दिलीप कुमार और मधुबाला की लव स्टोरी के बीच आ गये थे? कैसे उनकी वजह से मधुबाला ने बी.आर.चोपड़ा की रोमांटिक फिल्म ‘नया दौर’ में काम करने से मना कर दिया था।  इसके बाद खान और चोपड़ा के बीच कोर्ट केस भी हो गया था।  इम्तियाज मधुबाला के पति किशोर कुमार और भी बहुत से मर्द और औरत  जिन्होंने मधुबाला के जीवन में महत्वपूर्ण  योगदान दिया है, उनके बिना  फिल्म कैसे  बना सकते हैं?

 इम्तियाज अली

मुझे याद है कि कैसे दो पत्रकारों ने मधुबाला पर बायोग्राफी लिखने की कोशिश की थी और कैसे उन्हें इसकी वजह से कोर्ट का सामना करना पड़ा था। यही नहीं उनको धमकियां भी मिली थी। यह सारी चीजें मैं  इतने रिस्पेक्ट डायरेक्टर के साथ होता नहीं देख सकता। और कास्टिंग का क्या होगा इम्तियाज? मधुबाला के रूप में आप किस को अपने फिल्म में कास्ट करेंगे? माधुरी दिक्षित?

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रविवार की एक शाम धर्मेंद्र और उनकी कविताओं के साथ https://mayapuri.com/a-sunday-evening-with-dharmendra-and-his-passion-poetry-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0/ https://mayapuri.com/a-sunday-evening-with-dharmendra-and-his-passion-poetry-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0/#respond Thu, 21 Nov 2019 12:59:46 +0000 https://mayapuri.com/?p=213703 धर्मेंद्र

अली पीटर जॉन पहली बार मैं इस शर्मीले शायर से मिला था जिसने बहुत अच्छी कविताएं लिखी थी और मुझसे कहा कि मैंने लिखने की कोशिश की और बस ये लिख दिया। ये उन्हें भी पता था कि  कविताएं लिखना सबके बस की बात नहीं है और यह शर्मीले शायर थे सुपरस्टार धर्मेंद्र। मुझे उनकी […]

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धर्मेंद्र

अली पीटर जॉन

पहली बार मैं इस शर्मीले शायर से मिला था जिसने बहुत अच्छी कविताएं लिखी थी और मुझसे कहा कि मैंने लिखने की कोशिश की और बस ये लिख दिया। ये उन्हें भी पता था कि  कविताएं लिखना सबके बस की बात नहीं है और यह शर्मीले शायर थे सुपरस्टार धर्मेंद्र। मुझे उनकी कविताएं इतनी पसंद आई कि मैंने उनसे लिखते रहने को कहा। अगली बार मैं उनसे उनके बंगले पर  मिला और  शायद उन्होंने मेरे सुझाव को सीरियस ले लिया था। उन्होंने मुझे अपनी बहुत सी लेखनी दिखाई.

उन्हें उनके छोटे भाई अजीत सिंह  देओल जो अभय देओल के पिता है उनकी बहुत अच्छी कंपनी मिली हुई थी ।  अजीत सिंह देवल भी बहुत अच्छी कविताएं लिखा करते थे और अपने भाई से एक्सचेंज भी करते थे। अजीत सिंह सफल अभिनेता नहीं थे और कुछ समय पहले उनका निधन हो गया।

धर्मेंद्र

धरम जी ऐसा मानते हैं कि उर्दू  सबसे सर्वश्रेष्ठ भाषा है दुख और खुशी दोनों ही भावनाओं को दर्शाने के लिए। उन्होंने अपनी सारी कविताएं उर्दू में ही लिखी है उर्दू भाषा उनके दिल के बहुत करीब है।

दो घंटे मैं और मेरे कुछ मित्र जो गायक और कंपोजर है  राजा का शेफ और रुबायत जहां, हम लोग धर्मेंद्र जी के आवाज में एक के बाद एक कविताएं सुनते रहे। सारी कविताएं एक से बढ़कर एक थी और मैं यह सोच रहा था कि क्या यह वही इंसान है जिसे हम लोग गरम धरम कहते हैं। धर्मेंद्र जी ने अपने जीवन से जुड़ी हर घटना के ऊपर कविताएं लिखी हैं ।उन्होंने एक कविता लिखी थी जब वो दिलीप कुमार से बहुत प्रभावित हुए थे और हर सुबह यही सोचते थे कि क्या वो दिलीप कुमार की तरह बन पाएंगे। उन्होंने  मुंबई में अपने स्ट्रगल के दिनों पर भी कविता लिखी है। प्यार पर,एक सामान्य इंसान पर ,किसान पर, अमीर गरीब के बीच झगड़े पर और अपने मातृभूमि पर, इन हर विषयों पर धरम जी ने कविताएं लिखी हैं।
मुझे उनके द्वारा लिखी कविता में सबसे अच्छी कविता लगी जो उन्होंने चर्चगेट स्टेशन पर लिखी थी। कविता  उन्होंने चर्चगेट स्टेशन से आने के बाद लिखी थी जब वहां उनका ऐसा स्वागत किया गया जैसे कोई बिछड़ा हुआ यार वापस आ गया हो। अब वो बहुत अच्छी कविता लिखने की क्षमता रखते हैं और एक अच्छे कवि को कोई रोक नहीं सकता।

धर्मेंद्र

सूर्य डूबने वाला था और अब उनके प्यार में डूबने का समय आ चुका था और यह प्यार है शराब जो वो हर शाम पीते हैं अपने पुराने दोस्तों के साथ कार्ड खेलते हुए। साथ में कुछ न्यूज़ और पुराने गाने भी सुना करते हैं। इसके बाद सोने चले जाते हैं और सुबह जल्दी उठते हैं और फिर जिम में व्यायाम करते हैं।

और जब यह महान धरम कविता सम्मेलन खत्म होने वाला था कि तभी एक सेवक ने हाथ में गुलाब लाकर धर्मेंद्र जी को दिया। यह गुलाब एक महिला है जो हर रविवार धर्मेंद्र जी के लिए लाती है चाहे वो कहीं भी क्यों ना हो। उस गुलाब को चूमते हुए धरम जी की आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने बताया कि यह करोड़ों लोगों का प्यार है जिनकी वजह से आज  वह सबके प्यारे धरम हैं।


धरम के अनुसार धरम
महान मां की ममता अजीम बाप की शफकत का अजीमो-शान इक एहसान हूं मैं,
इंसानियत का पुजारी, छोटों का लाड़ प्यार बड़ों का आदर सम्मान हूं मैं,
दुनिया सारा बन जाए एक कुनबा
एकता की हसरतों का अरमान हूं मैं,
मोहब्बत है खुदा और खुदा है मोहब्बत खुदा की मोहब्बत का इक फरमान हूं मैं,
प्यार मोहब्बत दुआएं आपकी
सींचती है जज्बात को मेरे,
इसलिए आज भी जवान हूं मैं,
खता अगर हो जाए बक्श देना यारों गलतियों का पुतला आखिर एक इंसान हूं मैं

मैं 84 साल के मोस्ट हैंडसम एक्टर के चेहरे पर झुर्रियां ढूंढने की कोशिश कर रहा था और उन  झुर्रीयों में मुझे हजारों कहानियां  छुपी दिखी।

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बर्थडे स्पेशल: जीनत अमान कभी वो खुद एक पत्रकार थी बाद में पत्रकारों की ही शिकार बन गईं https://mayapuri.com/she-was-a-journalist-once-she-became-a-victim-of-journalists-later-in-life-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a4%a4-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8/ https://mayapuri.com/she-was-a-journalist-once-she-became-a-victim-of-journalists-later-in-life-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a4%a4-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8/#respond Tue, 19 Nov 2019 07:40:53 +0000 https://mayapuri.com/?p=214966 जीनत अमान 

अली पीटर जॉन वो मुझसे लगातार कहती रही कि मैं उनकी कमबैक फिल्म देखूं और मुझे पता था कि फिल्म बहुत ही बेकार होगी, पर मैं अपनी पुरानी दोस्त ‘जीनी बेबी’ के कहने पर फिल्म देखने गया और जब मैं थिएटर से बाहर आया तो मैं यह सोचा था कि जीनत अमान, वो औरत जिन्होंने […]

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जीनत अमान 

अली पीटर जॉन

वो मुझसे लगातार कहती रही कि मैं उनकी कमबैक फिल्म देखूं और मुझे पता था कि फिल्म बहुत ही बेकार होगी, पर मैं अपनी पुरानी दोस्त ‘जीनी बेबी’ के कहने पर फिल्म देखने गया और जब मैं थिएटर से बाहर आया तो मैं यह सोचा था कि जीनत अमान, वो औरत जिन्होंने एक समय पर सच में दुनिया पर राज किया है उन्होंने इतनी बेकार फिल्म से कमबैक क्यों किया। मैं यही सोच सोच कर परेशान हो रहा था और सोचते-सोचते मैं जीनत अमान से जुड़ी यादों की गलियों में चला गया….

उनके पिता अमानुल्लाह खान के आसिफ की फिल्म ‘मुग़ल-ए-आज़म’ के डायलॉग राइटर थे। इस फिल्म के डायलॉग्स इतने बढ़िया थे जिसे आज तक याद रखा जाता है और जब तक फिल्म है तब तक इसके डायलॉग्स लोगों को याद रहेंगे। उनकी मां जर्मन थी मिसेज हेंज और वो अपने मां-बाप की इकलौती बेटी थी जिनका नाम उन्होंने जीनत अमान रखा था।

जीनत को उनकी माता ने ही पाला क्योंकि जिनत जब बहुत छोटी थी तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। जीनत को उनकी मां ने मुंबई के बढ़िया से बढ़िया स्कूल में डाला और फिर जीनत बोर्डिंग स्कूल चली गई। उनकी मां अपनी बेटी को लेकर काफी एंबिशियस थी और वो मानती थी उनकी बेटी दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की हैं। जीनत ने वापस आकर बहुत सी ब्यूटी पेजेंट में हिस्सा लिया और आखिरकार वो मिस एशिया बनी और लाइमलाइट में आ गई। चारों तरफ लोग उनके प्रशंसक थे पर देवानंद सबसे पहले थे जिन्होंने जीनत की मां से परमिशन लेकर जीनत को फिल्मों में कास्ट किया। देवानंद मानते थे कि जो किरदार वो जीनत को दे रहे हैं वो किरदार सिर्फ और सिर्फ जीनत ही कर सकती हैं और यह किरदार था फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ में एक हिप्पी का किरदार जो उस वक्त पूरे दुनिया में काफी चर्चा में था। देव ने फिल्म में मुख्य किरदार के लिए मुमताज को पहले से साइन कर रखा था और अपनी बहन के किरदार के लिए उन्हें ऐसी लड़की चाहिए थी जो युवा हो, पाश्चात्य संस्कृति से ज्यादा प्रभावित हो, बोल्ड और साहसी हो और सारी रुकावटों और बंदिशों से मुक्त हो। फिल्म में जीनत का किरदार देवानंद की बहन का था जो अपने परिवार से बिछड़ कर गलत रास्ते पर चली जाती है और नेपाल के काठमांडू में हिप्पियों के ग्रुप में शामिल होकर ड्रग्स की दुनिया में चली जाती है। मिसेज हेंज बहुत इंटरेस्टेड थी खासकर इसलिए क्योंकि उनकी बेटी की पहली फिल्म उनके पसंदीदा एक्टर देवानंद बना रहे थे। जिनत भी अभिनेत्री के रूप में अपना कैरियर बनाने में काफी इंटरेस्ट थी। उन्हें एक्टिंग के बारे में कुछ नहीं पता था पर डायरेक्टर के रूप में देव ने ये जिम्मेवारी ली कि ववो जीनत को एक अभिनेत्री के रूप में अच्छे से ट्रेनिंग देंगे।

देव ने नेपाल की अलग-अलग जगहों पर शूटिंग शुरू कर दी। देव जीनत के किरदार पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे और जीनत भी बहुत जल्दी सब कुछ सीख रही थी। वह जल्दी ही हिप्पी (जैनीस) के किरदार में ढल गई जो देव उन्हें बनाना चाहते थे। जीनत इस कदर हिप्पी के किरदार में ढल गई थी कि कई बार उनके दोस्त और रिश्तेदार उनको सच में हिप्पी समझ बैठे थे। फिल्म का गाना ‘दम मारो दम’ जिसका म्यूजिक आर. डी.बर्मन ने दिय था, उस गाने से जीनत अमान रातों-रात स्टार बन गई। जब ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ रिलीज हुआ तो पूरे देश में जीनत चर्चा का विषय बन गई थी। उनका किरदार जो था वो आज तक हिंदी सिनेमा में नहीं दिखाया गया था।

जीनत ने ऐसे किरदार निभाए हैं जो उस वक्त की अभिनेत्रियां निभाने का साहस नहीं करती थी। बहुत से रूढ़ीवादी सोच के लोगों ने उनकी आलोचना की पर नई जनरेशन ने उनका खुले दिल से स्वागत भी किया। उन्होंने अपने किरदार इतने अच्छे तरीके से निभाया है कि ऐसा लगता था कि वो किरदार सिर्फ और सिर्फ जीनत ही निभा सकती थी। जीनत हिंदी फिल्म्स के अभिनेत्रियों का नया चेहरा बन चुकी थी।

जीनत अमान का नाम देव आनंद के साथ भी जोड़ा गया था। दोनों शादी करने के लिए भी तैयार थे पर चीजें तब बदल गई जब जीनत ने राज कपूर की फिल्म ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ में मुख्य किरदार निभाने का फैसला लिया और उसके बाद देव आनंद और जीनत अमान ने कभी साथ काम नहीं किया।

उस वक्त ये खबर जोर शोर से चल रही थी कि जीनत अमान का पाकिस्तान के हैंडसम क्रिकेटर इमरान खान के साथ अफेयर चल रहा है पर यह झूठी खबर थी। उसके बाद कंवलजीत सिंह के साथ उनका नाम जोड़ा गया। जीनत ने फिर संजय खान से शादी की जो पहले से ही शादीशुदा थे पर इसशादी का अंत बहुत ही दुखद हुआ जिससे उनका कैरियर भी खत्म हो गया। जीनत ने फिर असफल अभिनेता मजहर से शादी की जो रमेश सिप्पी की फिल्म ‘शान’ में अपने अब्दुल के किरदार की वजह से जाने जाते हैं। जिनत के दो बेटे हैं अजहर और अयान।

जीनत के पास अब कोई काम नहीं है। उन्हें कैरेक्टर रोल्स भी नहीं मिलते हैं क्योंकि 25 साल बाद भी कई फिल्ममेकर्स ऐसा सोचते हैं कि जीनत आज भी मैच्योर किरदार नहीं निभा सकती हैं। जीनत ने अपना समय अपने बेटों को बड़े करने में व्यतीत किया। उन्होंने फिल्में प्रोड्यूस करने की भी कोशिश की पर उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया। अब जीनत अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह फ्री है। बेटें भी बड़े हो गए हैं जो अभिनेता बनने की राह पर है। जीनत ने पिछले इलेक्शन में कांग्रेस के लिए कैंपेनिंग की पर वो सफल नहीं रही। जीनत अब टीवी के रियलिटी शो में दिखती हैं। जीनत के जीवन पर एक किताब लिखी जा सकती है और क्या पता शायद किसी दिन जीनत खुद ये किताब लिखें।

 जीनत अमान

जीनत अमान के बारे में कुछ और बातें

1.जीनत भारत के साथ-साथ पश्चिमी देशों में भी लीडिंग मॉडल थी और वो वोग की ब्रांड एम्बेसडर भी रह चुकी हैं

2. जीनत का कैरियर उनकी मां ने सुपरवाइजर किया जब तक वो एक बहुत बड़ी स्टार नहीं बन गई थी। जीनत को स्वतंत्र और साहसी महिला का सिंबल माना जाता था। जीनत खुद को ‘दुनिया की नागरिक’ और ‘भविष्य की औरत’ कहा करती थी।

3.जीनत पहली अभिनेत्री थी जिन्होंने फैशन डिजाइनिंग को इंडस्ट्री में लाया.उनके कपड़े दुनिया के जाने-माने डिजाइनर्स डिजाइन करते थे.

4.जीनत स्टाइल आइकन बन गई थी. वो जो भी अपने फिल्मों में पहनती थी वो उस वक्त का फैशन बन जाता था जिसे ‘जीन बेबी स्टाइल’ कहा जाता था।

 जीनत अमान

5.जीनत राज कपूर के साथ काम करने के पीछे इतनी पागल थी कि एक बार राज कपूर का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए वो राज कपूर के केबिन में ट्रांसपेरेंट उजली साड़ी पहन कर चली गई जो उन्हें पता था कि राज कपूर की कमजोरी है। जीनत अपने मकसद में कामयाब हो गई। राज कपूर ने उन्हें अपनी फिल्म ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ में मुख्य किरदार निभाने का मौका दिया।

6.सभी निर्देशकों ने उनकी हिंदी सही करने की कोशिश की पर वो वैसे ही बोलती थी जैसा वो बोलती आ रही थी और आज भी वो वैसे ही बोलती हैं।

7.जीनत ने सभी बड़े हीरो के साथ काम किया है जैसे देवानंद, धर्मेंद्र,शशि कपूर, राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चनजीनत ने विजय अरोरा और कंवलजीत जैसे हीरो के साथ भी काम किया है।

8.हॉलीवुड की जानी मानी अभिनेत्री जीना लोलोब्रिजिडा जिन्होंने जीनत के साथ शालीमार में काम किया था, उन्होंने जीनत को सबसे खूबसूरत महिला कहा था।

9. जीनत किताबी कीड़ा थी। वो हमेशा अपने साथ किताबें लेकर चलती थी और वो आज भी किताबें पढ़ा करती हैं।

 जीनत अमान

10. ‘इंसाफ का तराजू’ में रेप विक्टिम का किरदार निभाने वाली जीनत अपने इस किरदार को एक यादगार किरदार मानती हैं।

11. जिनत एक अच्छी पत्नी भी थी। उन्होंने अपने पति मजहर का बहुत अच्छे से ख्याल रखा। मजहर पैनक्रियाज में कैंसर की वजह से कम उम्र में ही गुजर गए।

12. जीनत कभी-कभी ऐसा मानती हैं कि उन्हें इस वक्त इस इंडस्ट्री का हिस्सा होना चाहिए था जब लड़कियों के पास पूरी आजादी है जो भी हो करना जाती हैं , पर उनके जमाने में ये करने के लिए उन्हें लड़ाइयां लड़नी पड़ी थी पर फिर भी जिनत को इस बात का कोई अफसोस नहीं है। आज भी इंडस्ट्री की बहुत सी अभिनेत्रियां जीनत से फिट रहने की सलाह लेती हैं।

13. जीनत जब सफलता की ऊंचाइयों पर थी तब उनके नाम पर हीरा और परफ्यूम का नाम रखा गया था।

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देवानंद और सुरैया की अमर पर अधूरी प्रेम कहानी  https://mayapuri.com/the-divine-but-doomed-love-story-of-dev-anand-and-suraiya-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%82%e0%a4%a6/ https://mayapuri.com/the-divine-but-doomed-love-story-of-dev-anand-and-suraiya-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%82%e0%a4%a6/#respond Mon, 18 Nov 2019 12:46:09 +0000 https://mayapuri.com/?p=210265 देवानंद

अली पीटर जॉन सच्चा प्यार कोई बंदिश,कोई कानून,ऊंच-नीच,जाति, धर्म और यहाँ तक की भगवान को भी नहीं मानता। सच्चा प्यार बस हो जाता है और एक बार यह हो जाए तो फिर दुनिया की कोई ताकत  इसके रास्ते में नहीं आ सकती और यदि आपका सच्चा प्यार कुछ समय का अफेयर है तो फिर यह […]

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देवानंद

अली पीटर जॉन

सच्चा प्यार कोई बंदिश,कोई कानून,ऊंच-नीच,जाति, धर्म और यहाँ तक की भगवान को भी नहीं मानता। सच्चा प्यार बस हो जाता है और एक बार यह हो जाए तो फिर दुनिया की कोई ताकत  इसके रास्ते में नहीं आ सकती और यदि आपका सच्चा प्यार कुछ समय का अफेयर है तो फिर यह सच्चा प्यार नहीं है और यही कारण है कि आज हमारे पास कुछ ही सच्चे प्यार की कहानियां है जो अनंतकालीन है जैसे रोमियो जूलियट, शिरीन फरहाद,लैला मजनू,हीर रांझा की प्रेम कहानी और देव और सुरैया की प्रेम कहानी।

सुरैया 1950 के दशक की प्रमुख महिला गायिका और अभिनेत्री थी और देवानंद उस वक्त स्ट्रगलर थे जो ‘हम एक हैं’ और ‘ज़िद्दी’ जैसी फिल्में करने के बाद इस इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के प्रयास में थे। उस जमाने में सभी अभिनेता,निर्देशक और निर्माता सुरैया के प्यार में थे और सुरैया से शादी करना चाहते थे।

पर सुरैया युवा और हैंडसम देवानंद के प्यार में दीवानी हो गई। यह प्यार दोनों तरफ से था और समय के साथ और  भी गहरा होता चला गया। इस प्यार को और परवान चढ़ाने में उनकी साथ में की गई रोमांटिक फिल्में जीत, नीली आदि ने मदद कर दी।
देव लगातार तरक्की करने लगे और वो बहुत बड़े स्टार बन गए। देव को लगा कि यही सही समय है सुरैया को प्रपोज करने का। उन्होंने सुरैया को प्रपोज किया पर सुरैया थोड़ी घबराई। देव थोड़े शर्मीले इंसान थे पर उन्होंने सोच लिया था कि वह सुरैया को खोएंगे नहीं। अपने प्यार को दर्शाने के लिए देव ने सुरैया को एक डायमंड की अंगूठी दी  जिसकी कीमत उस समय में ₹3000 थी। पर यही अंगूठी आगे चलके उनके प्यार के अंत का प्रतीक बन गई।

देव ने सुरैया को एक और बार प्रपोज किया और वो सुरैया के मना करने के कारण से खुद बहुत अचंभित हो गए क्योंकि सुरैया भी उनसे बहुत प्यार करती थी। कारण यह था कि सुरैया की नानी बादशाह बेगम और उनकी मां इस रिश्ते के बिलकुल खिलाफ थी सिर्फ इसलिए क्योंकि देव हिंदू थे और सुरैया इसी वजह से लगातार देव के प्रपोजल को मना करती रही। ऐसा कहा जाता है कि देव ने उस समय की इतनी बड़ी स्टार को एक थप्पड़ लगा दिया था यह कहते हुए कि वो एक डरपोक प्रेमिका है।  उनकी प्रेम कहानी तब खत्म हुई जब उनके प्यार के दुश्मन सुरैया की नानी ने सुरैया के उंगली से जबरदस्ती डायमंड की अंगूठी निकाल दी जो देव ने सुरैया को दिया था और उसे अपने घर गोविंद महल के बाहर समुद्र में फेंक दिया। और यही इस महान प्रेम कहानी का अंत था  जो प्रेम कहानी शायद बाकि महान  प्रेम कहानियों की तरह पूरी हो सकती थी। यह सच है कि देवानंद और सुरैया की प्रेम कहानी शादी में नहीं बदल पाई पर उनकी प्रेम कहानी तब तक याद रखी जाएगी जब तक इस दुनिया में प्यार है। देव आनंद ने अपनी को-स्टार कल्पना कार्तिक से से शादी कर ली जब वो दोनों महबूब स्टूडियो में शूटिंग कर रहे थे। सुरैया ने आजीवन शादी नहीं की और उन्होंने यह साबित कर दिया कि वो एक सच्ची प्रेमिका थी। देव ने शादी कर ली पर उन्होंने हर अवसर पर सुरैया  के प्रति अपने प्यार के बारे में बातें की और कभी-कभी तो देव बात करते-करते रोने भी लग जाते थे। वो एकमात्र महिला थी जिनके लिए देवानंद रोए थे।

देवनी ने बहुत ही नाजुक और  कठिन परिस्थिति देखी अपने जीवन में जब सुरैया जिसे भारत की सबसे अमीर औरत भी कहा जाता था उनकी अचानक से उनके घर गोविंद महल में मृत्यु हो गई।

देवानंद

अगली सुबह देवानंद अपने ऑफिस ‘आनंद’ बहुत जल्दी पहुंच गये। और उन्होंने अपने स्टाफ से कहा कि ‘आनंद’ के छत पर वो एक छोटा सा टेंट लगा दे और टेंट में देवानंद एक लैंडलाइन फोन और कुछ स्क्रिप्ट के साथ चले गए। इस फोन का नंबर देवानंद ने किसी को नहीं दिया था, पता था कि सुरैया की मृत्यु के बाद मीडिया के लोगों के लगातार फोन आएंगे उनके पास।

मुझे नहीं पता क्यों पर मैं एकमात्र इंसान था जिसे देवानंद ने बुलाया और अपने साथ टेंट में समय बिताने को कहा। देवानंद अपनी पूरी कोशिश कर रहे थे कि वो अपनी  भावनाओं को छुपा  पायें पर आखिरकार उनकी आंखों से आंसू निकल ही आया और वो मेरे कंधे पर सर रखकर रोने लग गये।  मैं  आधी रात तक उनके साथ था और वो लगातार सुरैया के बारे में बात करने से खुद को रोक रहे थे और जितना वो खुद को रोक रहे थे उतना ही सुरैया उनकी हर बातों में आ रही थी।वो बार-बार अपने आंसुओं को रोकना चाह रहे थे श,अपनी आंखों को ढक रहे थे पर एक सच्चे प्रेमी के आंसू रुक ही नहीं रहे थे।

देवानंद
देव ने बताया कि सुरैया को ना सिर्फ उनसे शादी करने के लिए मना किया गया था बल्कि उनको देवानंद के साथ फिल्म करने की भी अनुमति नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि सुरैया की नानी और मां इतनी ज्यादा क्रूर हो गई थी देवानंद को लेकर कि उन्होंने आदमियों को देवानंद को मारने के लिए बोला था जब सुरैया और देवानंद का प्यार परवान पर था। सुरैया को अपनी नानी और मां के इस बुरे काम के बारे में पता था इसलिए देवानंद की जिंदगी को बचाने के लिए उन्होंने शादी करने से मना कर दिया था।
मैं देवानंद और सुरैया की प्रेम कहानी के बारे में बहुत कुछ लिख सकता हूं पर मैं उनकी पूरी कहानी नहीं लिखूंगा क्योंकि मैंने देवानंद से यह वादा किया है। और मैं उस इंसान से किया हुआ अपना वादा नहीं  तोडूंगा जिस इंसान को मैं भगवान की तरह मानता हूं।

देवानंद

आजकल फिल्मेकर्स लोगों की बायोग्राफी बना रहे हैं और अच्छे विषय की खोज में है, वो क्यों नहीं  देवीना नाम से फिल्म बनाते हैं, वो नाम जो  सुरैया ने देव को दिया था जब दोनों प्यार में थे और देव ने आगे चलकर अपने बेटी का नाम भी देवीना रखा।

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बर्थडे स्पेशल: क्यों स्कूल में माला सिन्हा को डालडा सिन्हा कहकर पुकारते थे उनके दोस्त ? https://mayapuri.com/birthday-special-mala-sinha-interesting-and-unknown-facts-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be/ https://mayapuri.com/birthday-special-mala-sinha-interesting-and-unknown-facts-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be/#respond Mon, 11 Nov 2019 10:30:36 +0000 https://mayapuri.com/?p=212692

50 और 60 के दशक में अपनी खूससूरती और अपने बेहतरीन अभिनय से लोगों के दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री माला सिन्हा ने हिंदी सिनेमा को कई ङिट फिल्में दीं। आज के 11 नवंबर को माला सिन्हा अपना जन्मदिन सेलिब्रेट करती हैं। माला सिन्हा का जन्म नेपाल में हुआ था। करियर के शुरुआती दिनों […]

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50 और 60 के दशक में अपनी खूससूरती और अपने बेहतरीन अभिनय से लोगों के दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री माला सिन्हा ने हिंदी सिनेमा को कई ङिट फिल्में दीं। आज के 11 नवंबर को माला सिन्हा अपना जन्मदिन सेलिब्रेट करती हैं। माला सिन्हा का जन्म नेपाल में हुआ था। करियर के शुरुआती दिनों में बॉलीवुड के एक प्रोड्यूसर ने उनकी बहुत बेइज्जती कर दी थी।

इतना ही नहीं, प्रोड्यूसर ने उन्हें अपना चेहरा शीशे में देखने को कहा और काम देने से इनकार कर दिया। प्रोड्यूसर ने उनसे कहा था कि ऐसी भद्दी नाक लेकर तुम हिरोइन बनने का सपना देखती हो। आगे चलकर इसी लड़की ने एक बेहतरीन अभिनेत्री के तौर पर अपनी एक खास पहचान बनाई। माला सिन्हा के पिता अल्बर्ट सिन्हा बंगाल के थे। इसी वजह से लोग उन्हें नेपाली-भारतीय बाला कहते थे।

माला सिन्हा की मां नेपाल की रहने वाली थीं। माला के स्कूल का नाम आल्डा था, जो सुनने में थोड़ा अजीब था और शायद इसी वजह से माला के स्कूल के दोस्त उन्हें डालडा कहकर पुकारते थे। माला के माता-पिता उन्हें माला कहकर पुकारते थे। वहीं, कुछ दोस्त उन्हें डालडा सिन्हा तो कुछ उन्हें बेबी सिन्हा भी कहकर पुकारते थे। माला को अपने ये दोनों ही नाम पसंद नहीं थे। इसलिए उन्होंने खुद अपना नाम बदलकर माला सिन्हा रख लिया।

पहली बार माला सिन्हा एक बंगाली फिल्म के लिए मुंबई आईं थी। यहां पर उनकी मुलाकात अपने जमाने कि मशहूर एक्ट्रेस गीता बाली से हुई। उन्होंने ही माला की मुलाकात डायरेक्टर केदार शर्मा से करवाई। बस फिर क्या था, केदार शर्मा को माला तुरंत पसंद आ गईं और उन्होंने अपनी फिल्म ‘रंगीन रातों’ में माला को बतौर एक्ट्रेस काम दे दिया।

माला सिन्हा

 

ऐसा कहा जाता है कि माला सिन्हा को बॉलीवुड में खास पहचान दिलाने वाले केदार शर्मा ही थे। माला फिल्मों से पहले रेडियो के लिए गाने भी गाती थीं। बता दें कि 1957 में आई फिल्म प्यासा की स्क्रिप्ट पहले मधुबाला के लिए लिखी गई थी। लेकिन किसी वजह से मधुबाला इस फिल्म को नहीं कर पाईं और ये फिल्म माला सिन्हा की झोली में आ गई।

माला सिन्हा

इस फिल्म के बाद तो जैसे माला की किस्मत ही बदल गई। वहीं, दूसरे तरफ माला सिन्हा के बारे में ये भी कहा जाता है कि उन्होंने जीनत अमान और परवीन बॉबी पर एक बार ऐसा कमेंट कर दिया था, जिससे ये दोनों एक्ट्रेस माला से काफी नाराज़ हो गईं थी। माला ने दोनों एक्ट्रेसेस के बारे में कहा था कि ये दोनों एक्ट्रेस कम और मॉडल ज्यादा लगती हैं, और ऐक्ट्रेसेस के पास दिखाने के लिए सिर्फ शरीर होता है।

माला सिन्हा

माला सिन्हा की खासियत थी कि वो इतनी मशहूर एक्ट्रेस बनने के बाद भी अपने घर में एक सामान्य लड़की की तर ही रहती थीं। माला अपनी पिता से बहुत डरती थीं। उनके घर में कोई नौकर नहीं रखा गया था। इसीलिए शूटिंग से घर लौटने के बाद वो घर में खुद ही खाना बनाया करती थीं। माला घर में बेहद सादगी से रहा करती थीं। माला ने चिंदबर प्रसाद लोहानी से शादी की थी।

माला सिन्हा

माला ने बहूरानी, गुमराह, अपने हुए पराए, जहाँआरा, बहारें फिर भी आएंगी, धूल का फूल, दो कलियां, फिर सुबह होगी, होली आई रे, अनपढ़ और नई रोशनी जैसी बड़ी फिल्मों में काम किया।

और पढ़ें- बर्थडे स्पेशल: क्या अश्लील किरदारों की वजह से कॉमेडी के इस शंहशाह ने छोड़ दी थी फिल्म इंडस्ट्री ?

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टकलों की ब्रिगेड https://mayapuri.com/the-brigade-of-the-bald-%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af/ https://mayapuri.com/the-brigade-of-the-bald-%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af/#respond Sun, 10 Nov 2019 05:30:27 +0000 https://mayapuri.com/?p=212129

अली पीटर जॉन पहले जिन विषयों को लोग नजरअंदाज करते थे आज उन्हीं विषयों को  फिल्मों में कंटेंट कहा जाता है। पहले  फिल्ममेकर्स ऐसा मानते थे कि फिल्म बनाने का एक ही फार्मूला है और यही कारण है कि साल में 800 फिल्में बनती थी और  सभी फिल्में एक ही जैसी होती थी।  क्रिटिक्स हर […]

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अली पीटर जॉन

पहले जिन विषयों को लोग नजरअंदाज करते थे आज उन्हीं विषयों को  फिल्मों में कंटेंट कहा जाता है। पहले  फिल्ममेकर्स ऐसा मानते थे कि फिल्म बनाने का एक ही फार्मूला है और यही कारण है कि साल में 800 फिल्में बनती थी और  सभी फिल्में एक ही जैसी होती थी।  क्रिटिक्स हर बार फिल्म पर नकारात्मक टिप्पणी करते थे पर क्रिटिक्स की ओपिनियन की परवाह कौन करता था? फिल्मेकर्स अपने ही फॉर्मूला पर चिपके रहते थे । पर फिर  इंडस्ट्री में रिवॉल्यूशन आया जब पा, पीकू, क्वीन, पिंक, सुपर30 और कई सारी बायोपिक्स बॉक्स ऑफिस पर सफल होने लगी। इन फिल्मों की सफलता ने कई एक्टर्स को भी प्रोत्साहित किया कि वह अपने एक ही किरदार से निकलकर कुछ अलग करने की कोशिश करें जो जीवन की सच्चाई से जुड़ा हुआ किरदार हो, जिसमें एक सामान्य इंसान की कहानी हो।

एक अभिनेता जिसने लगातार अलग-अलग किरदार निभाए है जो ना तो कोई बड़ा या छोटा स्टार हिम्मत भी कर पाता निभाने का तो वो है आयुष्मान खुराना जिसने एक स्पर्म डोनर से लेकर महिलाओं की आवाज निकालने वाले मर्द का किरदार निभाया है। और वह जल्दी अपनी अगली फिल्म में एक युवा इंसान का किरदार निभाने वाले हैं जो समय से पहले ही गंजा हो जाता है। मुझे यह पूरा विश्वास है कि  आयुष्मान की यह फिल्म भी बाकी फिल्मों की तरह एक अवॉर्ड  विनिंग फिल्म होगी।

यह सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा पर यह सच है कि आज के फिल्म इंडस्ट्री के दो सबसे ज्यादा डिमांड में रहने वाले सितारे अपनी फिल्मों में गंजे इंसान का किरदार निभा रहे हैं।

आयुष्मान अपनी आने वाली फिल्म बाला में एक युवा लड़के का किरदार निभा रहे हैं  जिसका समय से पहले बाल झड़ने लगते हैं और वो इस डर में जीने लगता है कि कहीं वह पूरी तरीके से गंजा ना हो जाए। वही फिल्म इंडस्ट्री के नए देशभक्त अक्षय कुमार की  हालिया रिलीज फिल्म हाउसफुल 4 में अक्षय को गंजा देखा गया है।  पर आयुष्मान के असल कंपटीशन उजड़ा चमन के सन्नी सिंह को माना जा रहा है क्योंकि इन दोनों ने न सिर्फ अपनी फिल्मों में एक ही किरदार निभाया है बल्कि यह दोनों फिल्में एक ही  सप्ताह के भीतर रिलीज होने वाली है। उजड़ा चमन पिछले शुक्रवार को रिलीज हुई है और बाला इस शुक्रवार को रिलीज होने वाली है।

पहला किस्सा जो मुझसे गंजेपन से याद आ रहा है वह है बी आर चोपड़ा की फिल्म चाणक्य और चंद्रगुप्त का। बीआर चोपड़ा चाणक्य और चंद्रगुप्त बनाने की योजना बना रहे थे जिसमें वह दिलीप कुमार को चाणक्य और धर्मेंद्र को चंद्रगुप्त के किरदार में देखना चाहते थे। चाणक्य के किरदार के लिए दिलीप कुमार  को गंजा होना पड़ता और दिलीप कुमार ऐसा करने में बिल्कुल भी इंटरेस्टेड नहीं थे जबकि दिलीप कुमार कुमार अपने हर किरदार के लिए पूरी जी जान लगा देते थे पर वह इसके लिए गंजा होना नहीं चाहते थे। बी आर चोपड़ा इसके लिए उस वक्त के बेस्ट मेकअप मैन सरोश मोदी को लंदन भेजने वाले थे एक स्पेशल विग लेकर आने के लिए,जिसका उस समय में 100000 दाम था पर दुर्भाग्यवश यह फिल्म बन नहीं पाई।

कुछ पुराने एक्टर्स जो असल में गंजे थे और उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं थी वो थे मोतीलाल जिन्होंने अपने अंतिम दो फिल्मों में एक गंजे इंसान का किरदार भी निभाया है, छोटी-छोटी बातें और वक्त जिसके डायरेक्टर थे यश चोपड़ा। डेविड अब्राहम और कन्हैयालाल भी असल जीवन में गंजे थे।

इंडस्ट्री में रिवॉल्यूशन

राजकुमार अपने स्टाइलिश एक्टिंग की वजह से जाने जाते थे पर बहुत कम लोगों को पता है कि वह असल ज़िंदगी में बिल्कुल टकले थे पर उन्होंने कभी कोई गंजे इंसान का किरदार नहीं निभाया। हर फिल्म में वो दुनिया भर के महंगे महंगे विग्स पहनते थे। उनके विग के बारे में एक बहुत ही इंटरेस्टिंग कहानी भी है। एक बार फिरोज खान और राजकुमार में झगड़ा हो गया फाइव स्टार होटल में।  दरअसल हुआ यह था कि फिरोज खान को पता था कि राजकुमार हमेशा विग पहनते हैं असल जीवन में और अपने फिल्मों में भी, तो फिरोज खान ने पूरी पब्लिक के सामने राजकुमार का विग उतार के फेंक दिया और पूरी जनता आश्चर्यचकित हो गई।

इंडस्ट्री में रिवॉल्यूशन

अमरीश पुरी के अच्छे खासे बाल थे जब वो थिएटर में थे पर उस वक्त वो हिंदी फिल्मों में छोटे मोटे एक्टर ही थे। राकेश कुमार जो निर्देशक थे उन्होंने एक बार अमरीश पुरी को यह सुझाव दिया कि वो टकले हो जाएं और अमरीमश पुरी ने उनके सुझाव को मान लिया। यह सुझाव उनके जीवन को बदल देने वाला सुझाव था क्योंकि इसके बाद अमरीश पुरी ना सिर्फ बॉलीवुड बल्कि हॉलीवुड में भी नंबर वन विलेन बन गए।
अमरीश पुरी की सफलता की वजह से प्रेम चोपड़ा  जैसे अनुभवी स्टार भी गंजे हो गए और दूसरे यंग एक्टर तेज सप्रू भी पूरी तरीके से  गंजे हो गए।

इंडस्ट्री में रिवॉल्यूशन

एक एक्टर जो इंडस्ट्री में गंजेपन के साथ ही आए थे वो है अनुपम खेर। अनुपम अपने जवानी के दिनों में ही गंजे हो गए थे जब वह सिर्फ 23 साल के थे। महेश भट्ट की फिल्म ‘सारांश’ में एक गंजे वृद्ध इंसान का किरदार निभा कर अनुपम काफी फेमस हुए थे। अनुपम खेर को बहुत कम विग के साथ देखा गया है। अनुपम खेर और अमरीश पुरी ने गंजेपन को स्टाइल स्टेटमेंट बनाया है। अनुपम  आज भी गंजे कैरेक्टर निभाते हैं जैसे वो अभी हॉलीवुड में टीवी सीरियल कर रहे हैं।

इंडस्ट्री में रिवॉल्यूशन

रोशन के परिवार में ही गंजापन है।  इस परिवार के हेड म्यूजिक डायरेक्टर रोशन पूरी तरीके से टकले थे। उनके बड़े बेटे राकेश रोशन जब भी हीरो और विलेन का किरदार निभाते थे उन्हें विग पहनना पड़ता था। पर जब से उन्होंने प्रोडक्शन और डायरेक्शन की कमान संभाली है उन्होंने अपनी विग उतार फेंकी है और वो अपने  ओरिजिनल लुक में रहते हैं। उनके भाई म्यूजिक डायरेक्टर राजेश रोशन 20 वर्ष की उम्र में ही गंजे हो गए थे । यह हैरत की बात है कि रितिक रोशन के बाल सही कैसे हैं ।  रितिक रोशन के फैन्स उनके बाल के लिए भी प्रार्थना करते हैं क्योंकि इसकी वजह से ऋतिक ग्रीक गॉड लगते हैं।

एक इंसान जिनके गंजे सर को लोग याद रखते है वो हैं एम.बी शेट्टी जिनको सिर्फ ‘शेट्टी’ के नाम से जाना जाता है। वो एक फाइट डायरेक्टर थे और उन्होंने धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन के फिल्मों में विलेन का किरदार भी निभाया है। उनके बेटे हैं रोहित शेट्टी।

इंडस्ट्री में रिवॉल्यूशन

अनजान जो कवि थे और जिनको 22 साल लग गये खुद को एक गीतकार के रूप में स्थापित करने में वो 21 वर्ष की उम्र में ही गंजे हो गए थे. इतिहास ने खुद को दोहराया और उनका बेटा समीर जो एक सफल गीतकार है वह भी अपने पिता की तरह 22 साल की उम्र में ही गंजे हो गए।
और यदि आपको लगता है कि सिर्फ अभिनेता ही गंजे हुए हैं तो आप यह जानकर आश्चर्यचकित होंगे कि उस वक्त की अभिनेत्रियां भी विधवा का किरदार निभाने के लिए गंजी हुई है। ‘बाबुल’ फिल्म जो रवि चोपड़ा की अंतिम फिल्म थी, इस फिल्म में विधवाओं  का किरदार निभा रही सभी महिलाएं गंजी हुई थी जिसमें खूबसूरत अभिनेत्री सारिका भी थीं।

इंडस्ट्री में रिवॉल्यूशन

परसिस खंबाटा जेम्स बॉन्ड की फिल्म के लिए गंजी हुई थी। अगर बेस्ट और मोस्ट नेचुरल बाल्ड वूमेन का खिताब  किसी को मिलना चाहिए तो वो तनुजा को मिलना चाहिए जिन्होंने एक मराठी फिल्म के लिए विग पहनने से इंकार कर दिया था क्योंकि वह चाहती थी कि वो इस किरदार को रियल रखने के लिए असल में गंजी हो। इस फिल्म के निर्देशक थे नितीश भारद्वाज नितीश भारद्वाज निर्देशक के नितीश भारद्वाज जिन्होंने महाभारत सीरियल में कृष्ण का किरदार निभाया था। आज की जनरेशन में गंजा होना एक नया हेयर स्टाइल या ये कहे कि फैशन ट्रेंड बन चुका है।

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जब प्रेमनाथ ने बॉलीवुड की छवि को बिगाड़ते हुए पूरे हॉलीवुड को अचंभित कर दिया था  https://mayapuri.com/when-premnath-shocked-the-stars-from-hollywood-and-gave-a-bad-name-to-the-industry-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5/ https://mayapuri.com/when-premnath-shocked-the-stars-from-hollywood-and-gave-a-bad-name-to-the-industry-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5/#respond Sun, 10 Nov 2019 04:30:13 +0000 https://mayapuri.com/?p=211618 Premnath

अली पीटर जॉन प्रेमनाथ अब वो हैंडसम हीरो नहीं थे। वो शांति की तलाश में निकलने के बहुत सालों बाद साधुओं के झुंड के साथ वापस आए थे। जब वो मुंबई पहुंचे तो पूरी इंडस्ट्री उनके भीतर इस बदलाव को देखकर आश्चर्यचकित थी। प्रेमनाथ टकले हो चुके थे, उन्होंने एक साधारण सी लुंगी पहनी थी […]

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Premnath

अली पीटर जॉन

प्रेमनाथ अब वो हैंडसम हीरो नहीं थे। वो शांति की तलाश में निकलने के बहुत सालों बाद साधुओं के झुंड के साथ वापस आए थे। जब वो मुंबई पहुंचे तो पूरी इंडस्ट्री उनके भीतर इस बदलाव को देखकर आश्चर्यचकित थी। प्रेमनाथ टकले हो चुके थे, उन्होंने एक साधारण सी लुंगी पहनी थी और ना सिर्फ गले में बल्कि पूरे शरीर पर 100 से अधिक मालाएं थी। सब से मिलकर वो ‘बम बम भोले’ कहा करते थे। पर कुछ फिल्ममेकर्स थे जैसे  विजयानंद, देवानंद और सुभाष  घई जो अभी भी प्रेमनाथ के साथ काम करना चाहते थे। प्रेमनाथ फिर से मशहूर हुए विजय आनंद की फिल्म ‘जॉनी मेरा नाम’ में अपने विलेन के किरदार से। इस फिल्म में प्रेमनाथ का एक डांस नंबर था पदमा खन्ना के साथ जो लगभग एक पोर्नोग्राफ़िक डांस ही था। प्रेमनाथ ने सुभाष घई की फिल्म ‘कालीचरण’ और ‘कर्ज’ में भी काफी अलग और पागलों वाला किरदार निभाया था।

कृष्णा शाह, एक भारतीय फिल्ममेकर जिन्होंने हॉलीवुड में भी काम किया है,वो अपनी पहली डकैती के ऊपर आधारित फिल्म ‘ शालीमार’ बना रहे थे, जो हिंदी और इंग्लिश दोनों में बन रही थी। इस फिल्म में उन्होंने हॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों जगह के स्टार्स को कास्ट किया था, जैसे धर्मेंद्र, जीनत अमान, ओ. पी रालहान, प्रेम नाथ और हॉलीवुड के रेक्स हैरिसन, सिलविया माइल्स और अगर मुझे सही याद है तो जॉन सेक्सऑन।

‘शालीमार’ का लॉन्च बहुत भव्य समारोह के साथ हुआ। इस समारोह में बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक के बड़े-बड़े सितारे मौजूद थे।

इस मौके पर प्रेमनाथ अपनी पुरानी गाड़ी में बहुत सारे साधुओं के साथ पहुंचे और इससे पहले कि मुहूर्त का शॉट होता है उन्होंने सड़कों पर बहुत से पक्षियों को मार कर फेंक दिया। ये उनके पूजा करने का तरीका था।

उनका एक सेक्रेटरी था जो हमेशा उनके साथ होता था। सेक्रेटरी के हाथ में हर वक्त एक पीतल का घड़ा होता था। एक बार प्रेमनाथ ने अपने सेक्रेटरी पर जोर से चिल्लाया और कहां, ‘ वो पौट( घड़ा) लेकर आओ’। उस  सेक्रेटरी के पास अपने स्वामी के पागलों वाले आज्ञाओं को मानने के अलावा और कोई  चारा नहीं था। वो घड़ा लेकर आया, और प्रेमनाथ ने पूरी भीड़ के सामने अपनी लुंगी उठाकर उस घड़े में पेशाब की और वो घड़ा तब भी उस  सेक्रेटरी के हाथ में ही था। लोगों ने इसे अप्रिय कहा तो प्रेमनाथ लोगों के ऐसे कमेंट से नाखुश हुए। यह उनका एक तरीका (अनुष्ठान) था जिसका वो हर जगह पालन करते  थे। और एक बार तो ऐसा उन्होंने हवाई जहाज में भी किया था।

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माइकल जैक्सन हिंदी फिल्म बनाना चाहते थे https://mayapuri.com/michael-jackson-was-interested-in-making-a-hindi-film/ https://mayapuri.com/michael-jackson-was-interested-in-making-a-hindi-film/#respond Thu, 07 Nov 2019 07:50:04 +0000 https://mayapuri.com/?p=211626 माइकल जैक्सन हिंदी फिल्म बनाना चाहते थे

अली पीटर जॉन माइकल जैक्सन 80 और 90 के दशक में पूरी दुनिया पर छाए हुए थे। उनके तरीके का डांस और म्यूजिक ने लोगों को पागल बना दिया था। उनके फैंस उनके शो के लिए एक दूसरे का कत्ल करने के लिए भी तैयार रहते थे। पर वो अपने इस अद्भुत सफलता से संतुष्ट […]

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माइकल जैक्सन हिंदी फिल्म बनाना चाहते थे

अली पीटर जॉन

माइकल जैक्सन 80 और 90 के दशक में पूरी दुनिया पर छाए हुए थे। उनके तरीके का डांस और म्यूजिक ने लोगों को पागल बना दिया था। उनके फैंस उनके शो के लिए एक दूसरे का कत्ल करने के लिए भी तैयार रहते थे। पर वो अपने इस अद्भुत सफलता से संतुष्ट नहीं थे। उनके ज्यादा घनिष्ठ मित्र नहीं थे पर  कुछ मित्रों में से एक थे राजू पटेल, जो पूरी दुनिया में हिंदी फिल्मों के जाने माने डिस्ट्रीब्यूटर थे। जैकसन राजू पटेल के काफी करीब थे और उनके फैमिली का हिस्सा बन चुके थे। उनकी पत्नी  थी डिंपल पटेल जो जुबली कुमार राजेंद्र कुमार की बड़ी बेटी थी। माइकल जैकसन  ने इस परिवार के साथ बहुत समय  बिताया। उन्हें हिंदी फिल्में बहुत पसंद भी थी। एक दिन उन्होंने राजू से कहा कि उन्हें हिंदी फिल्म बनाने की इच्छा है।  पर इससे पहले कि माइकल जैक्सन का यह सपना पूरा हो पाता राजू अपने उम्र के 40 वें पड़ाव पर ही चल बसे और कुछ दिनों बाद माइकल जैकसन भी इस दुनिया से चले गए। माइकल जैकसन के म्यूजिक और डांस का आज भी युवाओं के बीच  क्रेज है और अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती जैसे अभिनेता भी माइकल जैकसन के फैन है। मिथुन चक्रवर्ती माइकल जैकसन के कितने बड़े फैन हैं कि उन्होंने अपने बेटे का नाम मिमोह रखा है जो माइकल जैक्सन और मोहम्मद अली दोनों के नाम का मिश्रण है।

माइकल जैक्सन डिंपल पटेल मुंबई में रहती है और अब जब भी वह   जैकसन के बारे में बात करती है वो भावपूर्ण हो जाती है यह बताते हुए कि कैसे जैकसन का मृत शरीर सिर्फ एक हड्डी के बंडल जैसा था।

माइकल जैक्सन

और भी विदेशी सेलिब्रिटीज जिन्होंने भारतीय जनता का दिल जीता है उनमें से एक है मोहम्मद अली,जेबा यह दोनों पाकिस्तानी थे और रूणा लैला जो बांग्लादेश की थी। दूसरे देश के स्टार भी इंडियन स्टार के बड़े फैन रह चुके हैं। एक बार फ्रेंच डेलिगेशन मुंबई आए थे सिर्फ और सिर्फ रेखा से मिलने। रेखा  का नाम तक वो सही से नहीं बोल पाते थे।  मैंने रेखा की मीटिंग फिल्म सिटी में अरेंज की जहां रेखा उत्सव फिल्म की शूटिंग कर रही थी। रेखा और उनके बीच 1 घंटे की लंबी मीटिंग हुई और वो लोग रेखा से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने एक साथ कहा कि रेखा को हॉलीवुड में काम करना चाहिए। मोहम्मद अली भी रेखा के काफी बड़े प्रशंसक थे। वो सन एंड सैंड होटल में लगातार रेखा को ही देखे जा रहे थे।  जब फ्रेंच डेलिगेशन रेखा से मिलकर जाने लगे तो रेखा ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने अमिताभ बच्चन के बारे में सुना है। पर उन्होंने इस बात को अनसुना कर दिया तब रेखा ने कहा कि, ‘यदि आप अमिताभ बच्चन को नहीं जानते हैं और उन से नहीं मिले हैं तो फिर आप भारतीय सिनेमा के बारे में कुछ भी नहीं जानते। ‘

माइकल जैक्सन

मनोज कुमार ने पाकिस्तान के अनुभवी एक्टर और कपल मोहम्मद अली और जेबा को अपने घर पर आमंत्रित किया था।  आनंद ने अपनी फिल्म ‘क्लर्क’ में पति-पत्नी के इस जोड़ी को कास्ट भी किया था। यह फिल्म बहुत बड़ी फ्लॉप साबित हुई और यह कपल वापस अपने देश चले गए।

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वहीदा रहमान – बच्चनों की मां https://mayapuri.com/waheeda-rehman-the-mother-of-all-the-bachchans/ https://mayapuri.com/waheeda-rehman-the-mother-of-all-the-bachchans/#respond Wed, 06 Nov 2019 11:08:36 +0000 https://mayapuri.com/?p=210269

अली पीटर जॉन अगर अमिताभ बच्चन के किसी एक चीज के बारे में बात करें तो वो है उनका लोगों और समस्याओं पर अपने विचार व्यक्त करना। वो हमेशा एक पत्थर के समान खड़े रहते हैं जब बात किसी इनसान,समाज या देश के विरुद्ध हो  तब। वो दिलीप ,बलराज साहनी और वहीदा रहमान के फैन […]

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अली पीटर जॉन

अगर अमिताभ बच्चन के किसी एक चीज के बारे में बात करें तो वो है उनका लोगों और समस्याओं पर अपने विचार व्यक्त करना। वो हमेशा एक पत्थर के समान खड़े रहते हैं जब बात किसी इनसान,समाज या देश के विरुद्ध हो  तब।
वो दिलीप ,बलराज साहनी और वहीदा रहमान के फैन थे और दूसरी अभिनेत्री जो उनके बहुत करीब थी वो थी नूतन जिनके साथ काम करना उनके लिए एक सपने जैसा था और यह सपना तब पूरा हुआ जब उन्हें सौदागर फिल्म में नूतन के साथ काम करने का मौका मिला। सौदागर राजश्री  द्वारा बनाई गई शुरुआती फिल्मों में से एक है। उन्हें दिलीप कुमार  के साथ काम करने का पहला और एकमात्र मौका ‘शक्ति’ में  मिला जिसके निर्देशक थे रमेश सिप्पी जिन्हें शोले के मेकर के रूप में जाना जाता है। फिल्म में दोनों ने बाप-बेटे  का किरदार निभाया था। फिल्म ने अच्छी कमाई नहीं की पर यह फिल्म हमेशा दो जनरेशन के महान अभिनेताओं का एक साथ काम करने की वजह से याद रखा जाएगा ।  इसके बाद दोनों किसी और फिल्म में साथ नहीं दिखें।

अमिताभ बच्चन हमेशा से बलराज साहनी के साथ काम करना चाहते थे और उन्होंने उनकी फिल्में देखकर अभिनय की बारीकियां सीखी हैं। पर यह अफसोस हमेशा अमिताभ बच्चन के साथ रहता है कि वो बलराज साहनी जैसे महान कलाकार के साथ काम नहीं कर पाए। पर हाल ही में उन्होंने बलराज साहनी के प्रति अपनी प्यार और सम्मान को दर्शाया है। मुझे बलराज साहनी के बेटे परीक्षित साहनी को जबरदस्ती अपने पिता के ऊपर बुक लिखवाना पड़ा और 8 महीने में परीक्षित ने अपने पिता के ऊपर किताब लिख ली।

बुक लिखी जा चुकी थी । बुक पब्लिशर प्रमुख ‘पेंग्विन पब्लिशर’ जिसने किताब को पब्लिश करने का निर्णय लिया पर वो बुक की प्रस्तावना किसी सेलिब्रिटी द्वारा लिखवाना चाहते थे श्री। परीक्षित मेरे पास आये और उन्होंने मुझसे इस परेशानी के बारे में बात की। मैंने उनसे कहा कि इसमें परेशान होने वाली कोई बात नहीं है क्योंकि मुझे पता है कि अमिताभ जी बलराज साहनी को एक देवता की तरह पूजते हैं और अमिताभ बच्चन जरूर  बलराज साहनी की किताब के लिए प्रस्तावना जरूर लिखेंगे।अमिताभ परीक्षित के बहुत करीबी दोस्त रहे हैं और उनके साथ देश प्रेमी में काम भी किया है।परीक्षण परेशान दिख रहे थे तो मैंने अमिताभ बच्चन के लिए परीक्षित के नाम से पत्र लिखा कि बलराज साहनी के किताब के लिए प्रस्तावना की जरूरत है। परीक्षित के हस्ताक्षर के बाद हमने वो पत्र अमिताभ को भेज दिया और अमिताभ ने उस किताब के लिए प्रस्तावना लिखकर भेज दिया जो किताब का मुख्य हाईलाइट था। मुझे पता था कि अमिताभ परीक्षित के निवेदन को ना नहीं कहेंगे।

एक महीने बाद पेंग्विन चाहते थे कि इस बुक को कोई बड़े स्टार रिलीज करें जैसे सलमान खान,अक्षय कुमार । मैंने परीक्षित से कहा कि यह तुम्हारे महान पिता का अपमान होगा अगर उनकी किताब का अनावरण कोई ऐसा इंसान करें जिसने कभी उनकी कोई फिल्म ही नहीं देखी होगी।  परीक्षित थोड़े परेशान हुए क्योंकि उन्हें लगा कि मैं उनकी किताब के अनावरण में देरी कर रहा हूं। अगर उन्होंने ऐसा सोचा होगा तो वो बिल्कुल बेवकूफ है क्योंकि किताब लिखने का आईडिया सिर्फ और सिर्फ मेरा था।

मैंने परीक्षित से कहा कि एकमात्र इंसान जो इस किताब को रिलीज कर सकते हैं वो हैं अमिताभ बच्चन उनके अलावा कोई ये काम नहीं कर सकता। फिर मैंने अमिताभ को एक दूसरी चिट्ठी लिखी। अमिताभ ना सिर्फ आने के लिए राजी हो गए बल्कि वो समय से आधे घंटे पहले ही पहुंच गए और फिर उन्होंने 2 घंटे तक बलराज साहनी के अभिनय और बलराज साहनी के बारे में बातें की।

अमिताभ को अब वहीदा  के साथ काम करने के सपने को पूरा करना था। अमिताभ को पहला चांस मिला रेशमा और शेरा में जिसमें उन्होंने एक बेवकूफ लड़के का किरदार निभाया था। फिल्म के सितारे सुनील दत्त और वहीदा रहमान थे पर अमिताभ को भी इस फिल्म में अपने काम के लिए काफी प्रशंसा मिली।  फिल्म में एक सीन था जिसमें वहीदा रहमान को राजस्थान की रेत में खाली पैर चलना था। यह दृश्य देखकर एक फैन होने के नाते अमिताभ बच्चन का दिल पिघल गया और वो दौड़कर वहीदा रहमान को उनकी चप्पले देने पहुंच गए। यह सीन ना तो कभी अमिताभ भूल सकते हैं और ना ही वहीदा।

अमिताभ और उनके परिवार का वहीदा रहमान के साथ बॉन्ड दिन प्रतिदिन और बढ़िया होता चला गया। वहीदा को अमिताभ के साथ अदालत फिल्म में कास्ट किया गया जिसमें अमिताभ का डबल रोल था। अमिताभ को वहीदा के साथ सबसे बेस्ट किरदार मिला यश चोपड़ा की फिल्म त्रिशूल में जहां वहीदा रहमान ने अमिताभ की मां का किरदार निभाया था।

वहीदा रहमान ने जया भादुरी की मां का किरदार भी निभाया था जब जया भादुरी जया बच्चन नहीं बनी थी तब, फिल्म थी फागुन। वहीदा ने अनुपम खेर द्वारा निर्देशित ओम जय जगदीश में अभिषेक बच्चन की मां का किरदार भी निभाया था। फिल्म बहुत बड़ी फ्लॉप साबित हुई थी जिसके बाद अनुपम खेर ने निर्देशन करने का ख्याल अपने दिल से निकाल दिया।

बच्चन परिवार खुद को बहुत सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें वहीदा रहमान जैसे महान कलाकार के साथ काम करने का मौका मिला और वहीदा रहमान भी बहुत  खुशी महसूस करती है इस बात को लेकर कि उनके करियर का सेकंड हाफ बहुत बढ़िया रहा जहाँ उन्हें बच्चनों के साथ काम करने का मौका मिला। कोई इस तरीके के रिश्ते को कैसे बयां कर सकता? एक रिश्ता जो सिर्फ एक सपना था और वो सपना  भारतीय सिनेमा के कुछ महान पलों में तब्दील हो गया।

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