अभिव्यक्ति की आज़ादी का यहाँ सिर्फ लिमिटेड इडिशन में अवैलेबल है

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अभिव्यक्ति की आज़ादी, यानी फ्रीडम ऑफ स्पीच भी बहुत महंगी वस्तु है। सब इसे अफोर्ड नहीं कर सकते हैं। इसके लिए शायद आपको डॉलर में कमाने की ज़रूरत पड़ती है। बीते दिनों विदेशी पॉप स्टार रिहाना के एक ट्वीट ने तहलका मचा दिया था। रिहाना ने पूछा था कि “भारत में किसान इतना परेशान है, कोई इसपर बात क्यों नहीं कर रहा है?”

 

इतना ट्वीट करने की देर थी कि रिहाना बुद्धिजीवियों द्वारा सिर पे बिठा ली गई। रिहाना को खुलकर बोलने वाली अनोखी डीवा कहा जाने लगा, रिहाना की बेबाकी की जमकर तारीफ होने लगी, कंगना रनौत ने हालांकि रिहाना को कोसने में कोई कसर न छोड़ी लेकिन वो किसान आंदोलनकारियों को आतंकी बोलने की वजह से बहुत ट्रोल भी की गईं। फिर भूतपूर्व पॉर्न स्टार मिया खलीफा भी आंदोलनकारियों के ‘इंटरनेट’ कट करने को लेकर ट्वीट करती नज़र आईं, उन्होंने ऐसे आहत लिखा कि “ये मानवाधिकार का हनन है, इंटरनेट बंद करना गलत है” मानों किसानों के इंटरनेट बंद होने से उनकी टीआरपी डाउन हो गई हो।

मिया के सपोर्ट में भी बहुत लोग उतर आए, मिया भी अचानक मार्गदर्शक बन गईं। लेकिन अब सरकार को विदेशी आर्टिस्टस (?) की भारतीय मामलों में दखलंदाज़ी पसंद पसंद न आई तो विदेश मंत्रालय की तरफ से एक प्रेस रिलीज आ गया। जिसका सार सिर्फ इतना था कि भारत एक है, जो भी भारत की इमेज का गलत प्रचार कर रहा है उसको बढ़ावा न दें। देश के साथ रहें।

हालांकि मेरी नज़र में ये विदेशी सिंगर्स, पॉर्न स्टार्स की अभिव्यक्ति थी जिसके लिए वो पूरी तरह आज़ाद थे, फिर भी सरकार को अच्छा नहीं लगा तो कोई बात नहीं, उन्होंने अपनी तरफ से फॉर्मैलिटी पूरी कर दी।

लेकिन यहाँ इंडिया टोगेदर (भारत/भारतीय एक हैं/साथ हैं) और इंडिया अगैन्स्ट प्रापगैन्डा (भारत प्रॉपगंडा के खिलाफ है) हैशटैग के साथ बॉलीवुड के दिग्गजों, अक्षय कुमार, अजय देवगन और सुनील शेट्टी ने सपोर्ट कर दिया। इसके बाद देश के दो भारत रत्न, लता मंगेशकर  और सचिन तेंडुलकर ने भी इस बात का सपोर्ट किया कि हमारे देश के मसले हम खुद समेट लेंगे, विवादों के इतर भी भारत एक है।

अब जैसे 15000 किलोमीटर दूर बैठे पश्चिम में ग्रेटा, रिहाना और मिया खलीफा के अपने विचार थे; ऐसे ही हमारे बॉलीवुड के चमकते सितारों के भी अपने विचार निकले। कंगना रनौत को छोड़ किसी ने भी बेतुकी भाषा या अभद्रता से कुछ न कहा लेकिन फिर भी महाराष्ट्र सरकार को ‘इस लेवल’ की अभिव्यक्ति का आज़ाद होना अच्छा न लगा और उनके ट्वीट्स की जांच के लिए तैयारी कर ली।

सोचिए कितना हास्यपद है ये कि हमारे भारत रत्नों पर हमें भरोसा नहीं है लेकिन विदेश में बैठे कुछ नचनियों और पॉर्न स्टार की आवाज़ हमें क्रांति का नया स्पीकर लगती है। उद्धव सरकार के होम मिनिस्टर अनिल देशमुख की बेबाकी देखिए, वो साफ कहते हैं कि वो ये जांच अपनी सहयोगी पार्टी काँग्रेस के कहने पर करवा रहे हैं, उन्हें लगता है कि अक्षय, लता मंगेशकर और सचिन ने किसी दबाव में आकर ये ट्वीट किये हैं। इसमें जासूसी दिखाते हुए ये भी कहते हैं कि साइना नहवाल और अक्षय के ट्वीट एक से लग रहे हैं, तो कहीं दोनों को किसी ने प्रेशराइज़ तो नहीं किया ऐसा करने के लिए?

ये वही महाराष्ट्र सरकार है जो दिवगंत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की ‘मौत’ की जांच ठीक से नहीं करवा पा रहे थे, उसके लिए बाद में सीबीआई को जांच के लिए आना पड़ा, लेकिन कलाकारों के ‘ट्वीट्स’ की जांच करने के लिए इनके पास पर्याप्त साधन हैं।

मुझे लगता है कि जिस वक़्त नॉइडा फिल्म सिटी को लेकर पहले ही इतने ज़ोर शोर से तैयारी चल रही है वहीं महाराष्ट्र सरकार का ऐसी बचकानी हरकत करना बॉलीवुड को मुंबई से शिफ्ट करने का फ्लाइट टिकट साबित हो सकता है।

(यह लेखक के निजी विचार हैं)

सिद्धार्थ अरोड़ा सहर


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