फुल ऑन एन्टरटेनमेन्ट

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रणबीर कपूर ने साथी का चुनाव सही किया
कहते हैं दुख, तकलीफ और बुरे वक्त में ही असली नकली दोस्त की सही पहचान होती है। यह पहचान रणबीर कपूर को हो गई है। कुछ समय से वह अडेनॉयड स्वेलिंग की तकलीफ से जूझ रहा था ( दरअसल यह नैसल (नाक) के कैविटी के पिछले हिस्से में एक टिशू समूह का सूजन है ) डॉक्टर ने एक माइनर सर्जरी द्वारा इस समस्या को दूर तो कर दिया लेकिन कुछ दिनों के लिए उसे आराम करने की सलाह दी। लेकिन उसे अनुराग बसु की फिल्म की शूटिंग करने की जल्दी पड़ी थी, ऐसे में कैटरीना कैफ ने बताया जाता है मामला अपने हाथ में लेते हुए रणबीर को स्ट्रिक्टली शूटिंग ना करने की ताकीद देते हुए कुछ दिनों के लिए कम्प्लीट रेस्ट लेने को कह दिया। कैटरीना के इस फैसले से फिल्म की शूटिंग कुछ दिनों के लिए जरूर पिछड़ गई पर किसी ने कोई शिकायत नहीं की। क्योंकि सभी को अपने हीरो के स्वास्थ की चिन्ता तो थी ही और साथ में कौन भला कैटरीना के इस फाइनल फैसले को काटने की हिम्मत कर सकता था। खैर जो भी हो, इन सब आपा धापियों के बीच रणबीर को इस बात का एहसास तो हो ही गया कि कैटरीना उसका कितना ख्याल रखती है।

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गुलज़ार साहब को कोई मना ले प्लीज़
‘‘क्या वाकई में गुलजार साहब फिर कभी कोई फिल्म डायरेक्ट नहीं करेंगे?’’ यह प्रश्न हर उस फिल्म प्रेमी को बेचैन कर रहा है जो गुलजार जैसे महान लेखक गीतकार कवि और निर्देशक की अवार्ड विनिंग फिल्में जैसे ‘मेरे अपने’, ‘परिचय’, ‘मौसम’, ‘अंगूर’, ‘माचिस’, ‘हु तू तू’ देख चुके है। बताया जाता है कि गुलजार साहब के बहुत करीबी अपनों ने उन्हें बहुत रिक्वेस्ट किया कि वे फिल्में निर्देशित करना ना छोड़े लेकिन गुलजार साहब ने, कहा जाता है, कि एक तरह से मन ही बना लिया है कि अब वे सिर्फ और सिर्फ अपने साहित्य लेखन पर ही ध्यान देंगे। और वाकई में इन दिनों गुलजार साहब अपने किताबों में खोये हुए हैं, वे किताबें लिख रहे हैं, कविताएं लिख रहे हैं और कमाल का लिख रहे हैं। ऐसे में अब गुलजार के फैन्स उनकी बिटिया रानी मेघना की तरफ आशा भरी नज़र जमाये हुए है क्योंकि पापा गुलज़ार की तरह ही मेघना भी एक बेहतरीन फिल्म मेकर है और इन दिनों एक नई फिल्म भी बना रही है जिसे को-प्रोड्यूस कर रहे हैं फिल्म मेकर विशाल भारद्वाज जिसे गुलजार साहब अपनी तरह के फिल्म मेकर मानते हैं और विशाल मानते हैं कि गुलजार के साथ उनका रिश्ता पिता पुत्र या फिर गुरू शिष्य का है। तो शायद आगे चलकर गुलजार साहब को कोई मना ले कि वे फिल्में निर्देशित करना कभी ना छोड़े।

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जब कोई दिल को छू जाये तो कैटरीना हाँ कर देती है
हालांकि कैटरीना कैफ की पिछली तीनों फिल्में ‘एक था टाइगर’, ‘जब तक है जान’ और ‘धूम थ्री’ बहुचर्चित फिल्में साबित हुई थी लेकिन फिर भी बॉलीवुड में यह चर्चा आम है कि कैटरीना अपने कैरियर को लेकर बहुत गंभीरता के साथ नहीं सोचती है क्योंकि जहाँ आज की हर नई हीरोइन हर स्क्रिप्ट को बहुत ध्यान से पढ़ती है और बहुत सोच समझ कर फिल्में साइन करती है वही कैटरीना फटाक से किसी भी फिल्म के लिए हाँ कर देती है। जब पिछले दिनों ‘बैंग बैंग’ फिल्म से संबंधित बातचीत के मौके पर उसने पूछा गया कि सुना है आप फिल्मों के मामले में चूज़ी नहीं है जो इस बात की पुष्टी करते हुए वह बोली, ‘‘जी हाँ, मैं कोई फिल्म साइन करते समय स्क्रिप्ट की ज्यादा परवाह नहीं करती और ना ही इस बात की जानकारी लेती हूँ कि फिल्म का हीरो कौन है, मैं बस उस क्षण, उस वक्त, मेरे मूड और विचार के तहत जैसा मन करता है वही करती हूँ। बिना किसी कैलकुलेशन के बस दिल को छूने वाली किसी बात के बेसिस पर मैं फिल्म साइन करती हूँ लोगों को लगता है कि मैं सिर्फ टॉप के स्टार्स देखकर फिल्म साइन करती हूँ, यानि सलमान, आमिर, शाहरुख, अक्षय लेकिन हकीकत यह है कि कई फिल्मों में मुझे साइन करने के बाद हीरो तय किया गया।


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Mayapuri

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