‘‘हमारी फिल्म‘‘गदर’’व्हाइट मनी से बनी पहली फिल्म थी..’’- नितिन केनी

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विजन के सीईओ के तौर पर काम करते हुए कई अलग तरह के कदम उठा रहे  नितिन केनी ने हाल ही में संजय गुप्ता के साथ मिलकर ‘जज्बा’ के निर्माण करने का निर्णय लिया है.

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फिल्म ‘गदर एक प्रेम कथा’ के समय आपने जिस सिस्टम की शुरूआत की थी, आपको नहीं लगता कि काॅरपोरेट ने उसी सिस्टम को अपना रखा है?

-जी हां! कुछ कुछ वैसा ही है. हमारी फिल्म ‘गदर’ पहली व्हाइट मनी से बनी फिल्म थी. हमने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को उस वक्त दिखा दिया था कि हर किसी को चेक पेमेंट कर, टीडीएस काटकर भी फिल्म को बनाया जा सकता है और फायदा भी हो सकता है. उसी वक्त से लोगों ने इसे अपनाना शुरू कर दिया. बहुत से लोगों को नही पता है कि फिल्म ‘गदर’ का मैंने इंशोरेंस करवाया था. उसके बाद सुभाष घई ने फिल्म‘यादें’में इंशोरेंस लिया. ‘गदर’ के समय ही काॅरपोरेटाइज रूप से काम शुरू हुआ, जिसका फायदा आज लोगों को हो रहा है. उसके बाद तो आईडीबीआई सहित कुछ बैक वालों ने फिल्मों के निर्माण में आर्थिक मदद देने का काम षुरू किया, मगर सब वापस लौट गए. क्योंकि उन्हें फिल्म निर्माण का बिजनेस समझ में नहीं आया.

‘गदर’ की रिलीज के बाद आप जीटीवी से अलग हो गए थे. फिर कुछ समय बाद आपने पुनः एस्सेल विजन के सीईओ के तहत वापसी की है. क्या कहोगे?

-मैं कभी खाली नहीं बैठा.हमेषा काम करता रहा.‘गदरः एक पे्रम कथा’ की रिलीज के बाद मैंने दो अति महत्वाकांक्षी फिल्मों की षुरूआत की थी.यह एक अलग बात है कि वह दोनों ही फिल्में बन नही पायी. इनमें से पहली फिल्म स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की जिंदगी पर थी, जिसमें मनिषा कोइराला मुख्य भूमिका निभा रही थी. इस फिल्म को बनाने की इजाजत सोनिया गांधी से ली गयी थी. क्योंकि यह उनके परिवार का मसला था.उनकी षर्त थी कि हम उन्हें स्क्रिप्ट दें और जब स्क्रिप्ट को वह हरी झंडे दें, तभी हम फिल्म बनाएं. हमने जनवरी 2004 में सोनिया गांधी के पास अपनी फिल्म की स्क्रिप्ट भेजी.उसी वक्त केन्द्र मेें कांग्रेस पार्टी सत्ता में आ गयी और स्वर्गीय इंदिरा गांधी पर बनने वाली फिल्म से सोनिया गांधी की रूचि खत्म हो गयी.उन्होने आज तक हमारी स्क्रिप्ट को अप्रूव नही किया है. इसलिए फिल्म नही बन पायी. इसके बाद हमने 9 /11 के घटनाक्रम पर ‘गदर पार्ट 2’ बनाने की सोची थी. इसे निर्देशित करने के लिए इम्तियाज अली को साइन किया था.

यदि हमारी यह फिल्म बनती तो ‘सोचा ना था’के बाद इम्तियाज अली की यह दूसरी फिल्म होती. इस फिल्म की कहानी मैंने खुद लिखी थी. अब इसका अस्तित्व खत्म हो चुका है. अब ओसामा बिन लादेन जिंदा नहीं रहे. लेकिन जब हमने फिल्म बनाने की सोची थी, तब फिल्म बनती तो उसका महत्व बहुत ज्यादा होता. इस फिल्म की कहानी एक भारतीय लड़के और पाकिस्तानी लड़की की पे्रम कथा के इर्दगिर्द बुनी गयी थी. इन दानों फिल्मों को अंजाम नही मिल पाया. फिर मैंने फिल्म निर्माण से हटकर फिल्मों के ओवरसीज वितरण पर ध्यान देना षुरू किया. कुछ टीवी प्रोडक्शन भी शुरू किए. अनुराग बसु की टेली फिल्म ‘‘हिफाजत’’ का निर्माण किया था. ‘मुझसे शादी करोगे’,‘हल्ला बोल’ सहित सहित तमाम फिल्में मैंने ओवरसीज में डिस्टीब्यूट की. 2011 में मेरी मुलाकात फिर से सुभाष चंद्रा जी से हुई. तो उनके कहने पर मैंने उनके साथ जुड़ने का निर्णय लिया.

मैंने उनके सामने एक प्रोडक्षन कंपनी की रूपरेखा रखी. फिर प्रोडक्षन करने के लिए अगस्त 2012 में हमने ‘एस्सेल विजन’कंपनी की षुरूआत की.इस कंपनी के तहत हम कंटंेट क्रिएषन, प्रोडक्षन,डिस्ट्रीब्यूशन वगैरह करते हैं.अब इस कंपनी के तहत हम हिंदी मराठी व तमिल भाषा में टीवी के कार्यक्रम बनाते हैं.हमारे कार्यक्रमों की बदौलत जी मराठी चैनल उंचाइयों पर है.इसके अलावा हम जी रिश्ते अवार्ड सहित कुछ इवेंट करते रहते हैं.अभी हम डिजीटल कंटेंट का भी काम शुरू करने वाले हैं.फिल्म जो कि मेरी निजी रूचि का विषय है, उसमें भी हमने काम किया.हमने कुछ फिल्मों का सहनिर्माण किया है.मराठी में हम बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. मराठी की चार बड़ी फिल्में ‘दुनियादारी’,‘टाइम पास’,‘फैंड्री’और ‘‘लयभारी’का हमने सहनिर्माण किया और डिस्ट्रीब्यूशन किया.इन फिल्मों ने बहुत पैसा कमा कर दिया.

इसके अलावा हमने मराठी भाषा में क्रियेटिकली अक्लेम फिल्में मसलन प्रकाष बाबा आमटे,एकादषी, किला, और लोकमान्य का निर्माण किया. यह सारी फिल्में गोवा में संपन्न इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाया जा चुकी हैं.हमने डार्क नाइट के हिंदी वर्जन से हिंदी फिल्म के डिस्टीब्यूशन शुरू किया.फिर ‘डी डे’ और ‘द लंच’बाक्स का हमने सह निर्माण किया. दो छोटी फिल्में ‘3 ए एम’और ‘मैड’की हैं.अब हमने हिंदी सिनेमा में मेन स्ट्रीम में जाने का निर्णय करते हुए संजय गुप्ता की कंपनी ‘व्हाइट फेदर फिल्म्स’के साथ हाथ मिलाते हुए फिल्म‘जज्बा’का निर्माण कर रहे हैं. फिल्म‘जज्बा’में ऐश्वर्या बच्चन, इरफान खान,अनुपम खेर, शबाना आजमी अभिनय कर रहे हैं.


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Mayapuri

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