गंगा जमुना क्यों सुपरहिट रही

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मायापुरी अंक 12.1974

में दिलीप कुमार ने जिस शाहदिली से कमाया. उसी शाहदिली से खर्च भी किया। यह दिलीप कुमार के अच्छे दिनों की घटना है। दिलीप कुमार को मालूम था कि इन्डस्ट्री में कहानीकार की स्थिति बड़ी दयनीय होती है। (कम से कम उन दिनों में यह सच था।) उन्होनें दस-बारह कहानीकारों की एक समिति बनाई (इस समिति में ख्वाजा अहमद अब्बास और कृष्ण चंदर जैसे कहानीकार भी थे।) दिलीप कुमार ने समिति के प्रत्येक सदस्य की एक-एक हजार रुपया महीना पगार बांध रखी थी हर पन्द्रहवे दिन इस समिति की एक बैठक होती थी। इस बैठक को दरबार की संज्ञा देना अधिक उचित होगा। इस दरबार में शहनशाह दिलीप कुमार एक ऊंची कुर्सी (या ताज) पर बैठते थे दिलीप कुमार अपनी फिल्म की कहानी का एक नुक्ता बोलते थे। इस नुक्ते पर समिति के सदस्य (दरबारी) बारी-बारी से अपनी राय जाहिर करते थे। काफी बहस और दिमागी कसरत के बाद कहानी का टुकड़ा पास किया जाता था। इस तरह अनेक ‘स्टोरी सेशन होने के बाद फिल्म की कहानी बनती थी। ‘गंगा जमुना की कहानी बनती थी। ‘गंगा जमुना की कहानी इसी समिति के दिमाग की उपज थी अब आप जान गये होगें कि गंगा जमुना क्यों सुपर हिट फिल्म बनी थी ?


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Mayapuri

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